रायपुर । छत्तीसगढ़ के घोर नक्सल प्रभावित जिले सुकमा में मंत्री और एसपी के बीच हुए लेटर वार ने सियासी घमासान तेज कर दिया है। मंत्री कवासी लखमा को एसपी जितेंद्र शुक्ला की लिखी चिट्ठी सामने आने के बाद एक ओर जहां एसपी का तबादला हो गया है, वहीं अब इस मुद्दे पर सियासी बवाल भी देखने मिल रहा है।
इस मामले में चुप्पी तोड़ते हुए मंत्री कवासी लखमा ने हरिभूमि से कहा कि वे 20 साल से विधायक हैं, लेेकिन पहली बार ऐसी चिट्ठी देखी जिसमें सीधे तौर पर जनप्रतिनिधि के अधिकारों को ही चुनौती देने की कोशिश की गई है। इतना ही नहीं, मंत्री ने यह भी साफ कर दिया है कि दोनों चिट्ठियों को वारयरल किसने किया, इसकी जाचं की जाएगी।
मंत्री ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए एसपी का तबादला किए जाने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल धन्यवाद भी दिया है। उद्योग मंत्री कवासी लखमा ने कहा, मैं मंत्री होने से पहले उस जिले का 20 साल से विधायक हूं। जनप्रतिनिधि होने के नाते क्षेत्र के लोग सुख दुख लेकर मेरे पास आते हैं। इसलिए उनके हितों को लेकर पत्र लिखना मेरा काम भी है और अधिकार भी।
चूंकि मुझसे संबंधित टीआई के संबंध में भी अवेदन किया गया था, इसलिए मैंने एसपी को चिट्ठी लिखी थी। लोकतंत्र में एसपी भी मंत्री को चिट्ठी लिख सकते हैं, लेकिन पत्र में अधिकारों को लेकर ही चुनौती दी गई है। यह भी कहा गया है कि किसी प्रकार बाहरी हस्तक्षेप उचित नहीं है। मंत्री का कहना है जब उन्हें क्षेत्र की जनता 20 साल से अपना प्रतिनिधि चुन रही है, तो किस आधार पर उन्हें बाहरी करार दिया जा सकता है और एसपी को इसका अधिकार किसने दिया कि वह पत्र लिखकर को लेकर चुनौती दें।
दाल में कुछ तो काला है
दोनों ही चिट्ठियों के वायरल होने को लेकर मंत्री कवासी लखमा ने कहा, मैं प्रतिपक्ष में रहते हुए भी अधिकारियों को चिट्ठी को वायरल करना और मुझे चिट्ठी भेजकर उसे भी लीक कराकर वायरल करना बेहद गंभीर मामला है। बेहद चतुराई से इसे अंजाम दिया है। चुंकि मेरे किसी कार्यकर्ता ने तो चिट्ठी को वायरल किया नहीं है, इसलिए दाल लमें कुछ काला है, यह साफ नजर आता है। चिट्ठियों को वायरल करने में किसकी भूमिका रही है, इसकी जाचं कराई जाएगी। इसक बाद सबकुछ सामने आ जाएगा।
ऐसी है एसपी की चिट्ठी
विशयांकित संदर्भित पत्र का अवलोकन करने का कश्ट करें। जिसके माध्यम से श्री सुरेंद पामभोई निरीक्षक थाना प्रभारी फुलबगड़ी जिला सुकमा का थाना प्रभारी नियुक्त किए जाने हेतु निर्देशित में लेख इस प्राकर हे कि जिले में कानून व्यवस्था एवं सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी पुलिस अधीक्षक की होती है। जो वे अपने अधिनस्थ कार्यरत थाना प्रभारियों के माध्यम से करते हैं और यह पुलिस अधीक्षक का विशेषाधिकार है कि वे इस कार्य हेतु किसे नियुक्त करें या किसे हटावें। पुलिस अधीक्षक के उक्त कार्य में किसी प्रकार का बाहरी हस्ताक्षेप करना अथवा प्रभाव डालना उचित नहीं है। जिससे निरीक्षक सुरेंद्र पामभोई थाना प्रभारी फुलबगड़ी को थाना प्रभारी छिंदगढ़ या तोंगपाल बनाया जाना संभव नहीं है। पत्र आपकी ओर सादर प्रेषित है।
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