दंतेवाड़ा । सटीक सूचना और त्वरित कार्रवाई से जिले की फोर्स को फिर सफलता मिली है। इस बार जवान ग्रामीण वेशभूषा में नक्सलियों के करीब पहुंच कर कमांडर को मार गिराया। कार्रवाई करने वाली टीम में इस बार 20 जवान शामिल थे। जो ग्रामीण वेशभूषा में टी शर्ट और लूंगी पहनकर जंगल में घुसे थे। जिससे नक्सली दूर से उन्हें नहीं पहचान पाए और उनका कमांडर मारा गया।
विधायक भीमा मण्डावी पर हमले के बाद फोर्स ने अपनी रणनीति में बदलाव कर रही है। मुखबिरों की सूचना पर तत्काल एक्शन लेते सफलता भी पा रही है। सर्चिंग और कार्रवाई के दौरान परिस्थिति अनुसार रणनीति भी तैयार करती है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार मुखबिर ने जानकारी दी थी कि फरसपाल थाना इलाके में ग्रामीण और तेंदूपत्ता के कुछ ठेकेदारों को बुलाया है। इसी सूचना पर डीआरजी (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड) के चुनिंदा 20 जवानों को सुबह रवाना किया गया। हथियारों से लैस ये जवान बाइक से लूंगी, बनियान और टी शर्ट पहने जंगल में पहुंचे।
जिसके चलते नक्सली और उनके शुभचिंतक पहचान नहीं पाए। लेकिन घेराबंदी के दौरान नक्सलियों ने फायरिंग करते भागने लगे। इस बीच एक नक्सली मारा गया और कुछ घायल हुए। घायल साथियों को लेकर नक्सली भागने में कामयाब रहे। जबकि मारे गए नक्सली का शव पुलिस ने अपने कब्जे में किया। वहीं सर्चिंग के दौरान 9 एमएम का एक पिस्टल, कारतूस सहित अन्य नक्सली सामग्री बरामद हुई ।
आय का बड़ा स्रोत है तेंदूपत्ता
नक्सलियों के लिए तेंदुपत्ता आय का एक बड़ा जरिया है।सीजन में इलाके से करोड़ों रुपए के तेन्दूपत्ता की खरीदी सरकार और ठेकेदार करते हैं। सुरक्षित खरीदी और निकासी के लिए नक्सली ठेकेदारों से मोटी वसूली करते हैं। उनकी बात नहीं मानने पर हत्या और ट्रकों के साथ पत्ते को आग के हवाले कर दी जाती है। इस भय से कुछ ठेकेदार नक्सलियों की शर्तें मानकर लेवी देते हैं।
सपोर्टिंग पार्टी भी सादे ड्रेस में पहुंची
नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए जंगल में जवान जहां लुंगी टी शर्ट में गए वहीं सपोर्टिंग पार्टी के जवान भी सादे कपड़ों में पहुंचे थे। डीआरजी के ज्यादातर जवान स्थानीय और सरेंडर कैडर के हैं। जो स्थानीय बोली भाषा और भौगोलिक परिदृश्य को भलीभांति जानते हैं।
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