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सावन में सोमवार व्रत का खास महत्व है। कहते हैं जो पूरे विधि विधान से इस व्रत को करता है उसकी हर इच्छा पूरी होती है। वैवाहिक जीवन में सुख और सुयोग्य जीवनसाथ मिलता है, धन मिलता है।
सावन में शिव जी पृथ्वी पर वास करते हैं ऐसी मान्यता है। यही वजह है कि शिव भक्तों उन्हें प्रसन्न करने के लिए सोमवार व्रत करते हैं, पूजा, कांवड़ यात्रा, दान आदि धार्मिक कार्य किए जाते हैं।
इस साल सावन की शुरुआत 11 जुलाई से होगी। 2025 में चार सावन सोमवार व्रत किए जाएंगे। जो लोग सोमवार व्रत की शुरुआत करना चाहते हैं उनके लिए सावन का महीना उत्तम होता है।
सावन सोमवार व्रत में तन और मन दोनों की शुद्धता बेहद आवश्यक है। पहले सावन सोमवार के दिन व्रती सूर्योदय से पूर्व स्नान के बाद शिव जी के समक्ष चारों सोमवार व्रत करने का संकल्प लें। स्त्रियां मासिक धर्म के कारण किसी सोमवार को व्रत नहीं कर पाएं तो उसे भाद्रपद माह में करें। कुछ लोग इस दिन से 16 सोमवार व्रत करने का संकल्प भी लेते हैं।
सावन सोमवार व्रत में फलाहार, साबूदाना, सिंघाड़े का आटा आदि खा सकते हैं। ध्यान रहे ये पदार्थ एक समय ही ग्रहण करें। व्रत संकल्प के बाद शिव पूजा के लिए हलवा, खीर का भोग बनाएं।
पूजा स्थान पर गंगाजल छिड़कर सफाई करें और मिट्‌टी से बने शिवलिंग या धातु के शिवलिंग का जल, पंचामृत से अभिषेक करें। इस दौरान शिव पंचाक्षरी मंत्र पढ़े। बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद फूल, अक्षत, चंदन, भस्म, मिठाई चढ़ाएं। आरती करें।
सावन सोमवार व्रत वाले दिन दोपहर में सोना नहीं चाहिए, साथ ही किसी का अपमान न करें, गलत शब्द न बोलें। प्रदोष काल में भी पूजा करें। इस व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद किया जाता है। संकल्प के पूरे व्रत होने के बाद उद्यापन करें।
 

 
सभी आठ ग्रहों में शनि ग्रह का विशेष महत्व होता है। कुंडली में शनि कमजोर होने से जातक को जीवन में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। शनि देव न्याय के देवता हैं, ऐसे में उनकी कृपा से व्यक्ति सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जीवन में काफी उन्नति करता है। लेकिन शनि देव का सम्मान न करने पर ये आपको मुश्किलों में डाल सकते हैं। साथ ही आपके द्वारा बनाए गए कामों को पूरी तरह से नष्ट कर सकते हैं।
शनि देव को लेकर ज्योतिष शास्त्र में कहा गया है कि जो लोग दुराचार, झूठे, किसी का सम्मान न करने वाले, पूजा पाठ जैसे कार्यक्रमों में शामिल न होने वाले या किसी भी तरह के अवैध कामों से जुड़े होते हैं, उनके जीवन में शनि का प्रकोप लंबे समय तक बना रहता है। ऐसे लोग जीवन में कितनी ही मेहनत क्यूं न करें लेकिन इनका काम हमेशा बिगड़ता चला जाएगा। ऐसे में कुछ ऐसी आदतें जिससे शनि का अनादर होता है।
शनि देव का अनादर करने वाली आदतें?
* किसी ऐसे उद्देश्य के पीछे भागना जिसकी वजह से कोई और परेशान हो। अपने उद्देश्य को अनदेखा करने वालों से भी शनि महाराज कुपित होते हैं।
* किसी को आगे बढ़ाने के लिए हेरफेर करना या ऊपर उठाने के लिए किसी अन्य को नुकसान पहुंचाना।
* अपनी सच्चाई को स्वीकार न करने वालों से भी शनि महाराज रुष्ट होते हैं। जो लोग दूसरों के सामने दिखावा करते हैं, ऐसे लोगों के काम बिगड़ते चले जाते हैं।
* जो लोग अपने ज्ञान के अहंकार के आगे किसी की बातों को सुनना पसंद नहीं करते, ऐसे लोगों पर कभी भी शनि देव की कृपा नहीं रहती है।
* जो लोग अपने कर्म से जी चुराते हो और अपना काम दूसरों पर डालते हो ऐसे लोगों से भी शनि महाराज खुश नहीं होते हैं।
* जो लोग अपनी गलतियों को स्वीकार नहीं करते हैं या फिर परिणामों से भागते हैं, उन्हें अपनी ये आदत सुधारनी चाहिए।
* शनि को न्याय का देवता कहा जाता है। शनि आपके कर्मों का हिसाब उस समय करते हैं, जब आपको किसी चीज की अत्यधिक आवश्यकता हो।
* शनि देव गलत कर्म करने वालों को कभी भी भूलते नहीं है। जो लोग दुराचारी प्रवृत्ति के होते हैं, शनि देव उनसे सब कुछ छीन लेते हैं।
शनि देव उन लोगों से अत्याधिक प्रसन्न होते हैं, जो दूसरों की मदद करते हो, बड़ों का सम्मान करने के साथ ही उनकी मार्गदर्शन प्राप्त करते हो। कहने का अर्थ आपके द्वारा किया गया किसी भी तरह का कार्य जो अच्छाई की भावना से किया गया हो, उसके प्रति शनि देव हमेशा खुश होते हैं।