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panchayattantra24.-पितृ पक्ष : पितृ पक्ष के दौरान ज्यादातर लोग अपने घरों में ब्राह्मणों को भोजन कराकर अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि देते हैं। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो तीर्थ स्थानों पर जाकर अपने पूर्वजों को पिंड दान करते हैं और वहीं उनका श्राद्ध करते हैं। आज हम आपको कुछ ऐसे ही तीर्थ स्थानों के बारे में बताने जा रहे हैं जहां माना जाता है कि यहां दर्शन करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। आइए आपको बताते हैं कौन से हैं ये तीर्थ स्थान. 
गया, बिहार वायु पुराण, गरुड़ पुराण और विष्णु पुराण के साथ-साथ गया तीर्थ का भी बहुत महत्व माना जाता है। यह स्थान श्राद्ध करने के लिए सबसे पवित्र स्थान माना जाता है। पुराणों में इस स्थान को मोक्ष भूमि और मोक्ष स्थान कहा गया है। कहा जाता है कि यहां आकर पितरों को तर्पण देने से पितरों को मोक्ष मिल जाता है। यहां हर साल पितृपक्ष के दौरान मेला लगता है। इसे पितृ पक्ष मेला कहा जाता है। पितृपक्ष के दौरान इन स्थानों पर जाने और प्रसाद चढ़ाने से पितर प्रसन्न होते हैं। 
 ब्रह्मकपाल, बद्रीनाथ उत्तराखंड बद्रीनाथ के ब्रह्मकपाल घाट के बारे में कहा जाता है कि यहां किया गया पिंडदान गया से 8 गुना अधिक फलदायी होता है। कहा जाता है कि यहां आकर असमय मरने वाले पूर्वजों का श्राद्ध करने से उनकी आत्मा को तुरंत मुक्ति मिलती है। यहां भगवान शिव को ब्रह्मचर्य के पाप से मुक्ति मिली थी। यह स्थान बद्रीनाथ धाम से कुछ ही दूरी पर अलकनंदा के तट पर स्थित है। ऐसा माना जाता है कि यहां पांडवों ने महाभारत युद्ध में मारे गए अपने परिवारों की मुक्ति के लिए बलिदान दिया था। 
प्रयागराज, उत्तर प्रदेश गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम पर पितरों के लिए तर्पण करना सर्वोत्तम माना जाता है। इलाहाबाद में पितृ पक्ष का बहुत बड़ा मेला लगता है। यहां दूर-दूर से लोग पिंडदान करने आते हैं और अपने पूर्वजों की मुक्ति के लिए प्रार्थना करते हैं। हरिद्वार, उत्तराखंड हरिद्वार, उत्तराखंड के सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों में से एक है, जहां लोग अपने पूर्वजों का दाह संस्कार करने जाते हैं, यहां श्राद्ध करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है। यहां गंगा नदी में स्नान करने से सभी पाप धुल जाते हैं, जबकि पितरों के नाम पर पिंडदान करने से उनकी आत्माओं को आशीर्वाद मिलता है। 
अयोध्या, उत्तर प्रदेश भगवान राम की जन्मस्थली अयोध्या में सरयू नदी के तट पर पितरों का श्राद्ध करने से उनकी आत्माओं को मुक्ति मिलती है। हर साल यहां सरयू नदी के तट पर भट्ट कुंड पर एक अनुष्ठान का आयोजन किया जाता है। यहां आने वाले लोग सबसे पहले पवित्र नदी में स्नान करते हैं और फिर अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि देते हैं। उज्जैन, मध्य प्रदेश महाकाल की नगरी उज्जैन में बहने वाली शिप्रा नदी भगवान विष्णु के शरीर से उत्पन्न हुई है। हर साल यहां बने घाटों पर श्राद्ध कर्म करने वालों की भारी भीड़ लगती है। महाकाल की नगरी में श्राद्ध करने से पितर पूर्ण रूप से तृप्त होते हैं। वाराणसी, उत्तर प्रदेश भगवान शिव की नगरी काशी में पितरों का श्राद्ध करना बहुत शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि काशी में प्राण त्यागने वाले को यमलोक नहीं जाना पड़ता। इसी प्रकार यहां श्राद्ध करने से पितरों की आत्मा को परम शांति मिलती है। काशी में मणिकर्णिका घाट पर गंगा नदी के तट पर अनुष्ठान होते हैं।
 

PT – मंगलवार 19 जुलाई 2023 से गणेशोत्सव की शुरुआत हो चुकी है। घर-घर से लेकर पूजा पंडालों में गणपति की मूर्ति की स्थापना के बाद पूजा-पाठ किए जा रहे हैं। दस दिवसीय गणेशोत्सव में के बाद 11 वें दिन अगले बरस जल्दी आने का वचन देकर बप्पा विदा होंगे। 

 

गणेशोत्सव के दौरान आप भगवान गणेश की पूजा-अर्चना कर उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही इस दौरान भगवान गणेश के प्रभावशाली मंत्रों का जाप भी जरूर करें। इन मंत्रों के जाप से बप्पा शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों पर कृपा बरसाते हैं। साथ ही इन मंत्रों के जाप से जीवन में चल रही परेशानियों का भी अंत हो जाता है। जानते हैं श्री गणेश के इन प्रभावशाली मंत्रों के बारे में…

 

श्री गणेश के प्रभावशाली 10 मंत्र 

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।

निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

अर्थ है: घुमावदार सूंड वाले, विशाल शरीरकाय, करोड़ सूर्य के समान महान प्रतिभाशाली। मेरे प्रभु, हमेशा मेरे सभी कार्य बिना विघ्न के पूरे कीजिए। 

 

विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय लम्बोदराय सकलाय जगद्धितायं।

नागाननाथ श्रुतियज्ञविभूषिताय गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते॥ अमेयाय च हेरम्ब परशुधारकाय ते।

अर्थ: विघ्नेश्वर, वरदान देनेवाले, देवताओं को अतिप्रिय, लम्बोदर, कलाओं से परिपूर्ण, जगत् हितकारी, गज के समान मुख वाले, वेद और यज्ञ से विभूषित पार्वतीपुत्र को नमस्कार है। हे गणनाथ आपको नमस्कार है। 

 

अमेयाय च हेरम्ब परशुधारकाय ते।

मूषक वाहनायैव विश्वेशाय नमो नमः ॥

अर्थ है: हे हेरम्ब! आपको किसी भी प्रमाणों द्वारा मापा नहीं जा सकता, आप तो परशु धारण करने वाले हैं, आपका वाहन मूषक है, विश्वेश्वर आपको बार-बार मेरा नमस्कार है। 

 

एकदन्ताय शुद्घाय सुमुखाय नमो नमः।

प्रपन्न जनपालाय प्रणतार्ति विनाशिने ॥

अर्थ है: एक दांत और सुन्दर मुख वाले, जो शरणागत भक्तजनों के रक्षक और प्रणतजनों की पीड़ा को नाश करनेवाले हैं। उन शुद्धस्वरूप गणपति को मेरा बार-बार नमस्कार है। 

 

एकदंताय विद्‍महे। वक्रतुण्डाय धीमहि। तन्नो दंती प्रचोदयात।।

अर्थ है: एक दंत को हम जानते हैं, वक्रतुण्ड का हम ध्यान करते हैं। हे गजानन हमें प्रेरणा प्रदान करें। 

 

ऊँ नमो विघ्नराजाय सर्वसौख्यप्रदायिने। दुष्टारिष्टविनाशाय पराय परमात्मने।।

अर्थ है: समस्त सुखों को प्रदान करने वाले, सच्चिदानन्द स्वरूप विघ्नराज प्रभु गणेश को नमस्कार है। जो दुष्ट अरिष्ट ग्रहों का सर्वनाश करते हैं और जो परमात्मा हैं। उन गणपति महाराज को मेरा प्रणाम है। 

 

रक्ष रक्ष गणाध्यक्ष रक्ष त्रैलोक्यरक्षकं। 

भक्तानामभयं कर्ता त्राता भव भवार्णवात्॥

अर्थ है: हे गणाध्यक्ष रक्षा कीजिए, रक्षा कीजिए। हे तीनों लोकों के रक्षक! रक्षा कीजिए। आप भक्तों को अभय प्रदान करने वाले हैं भवसागर से मेरी रक्षा कीजिए। 

 

ॐ श्रीं गं सौभाग्य गणपतये वर्वर्द सर्वजन्म में वषमान्य नम:।।

अर्थ हैं: यह गणेश शुभ लाभ मंत्र है, जिसका अर्थ है, भगवान गणेश की कृपा हमें हर जन्म में मिलती रहे। हम सारी बाधाओं को दूर कर खुशहाल जीवन देने की कामना करते हैं। 

 

गजाननाय महसे प्रत्यूहतिमिरच्छिदे । 

अपारकरुणापूरतरङ्गितदृशे नमः ॥

अर्थ है: विघ्नरूप अन्धकार का नाश करनेवाले, अथाह करुणारूप जलराशि से तरंगति नेत्रों वाले श्रीगणेश नामक ज्योतिपुंज को मेरा नमस्कार है। 

 

परात्परं चिदानन्दं निर्विकारं हृदि स्थितम् । 

गुणातीतं गुणमयं मयूरेशं नमाम्यहम् ॥

अर्थ है: जो परात्पर, चिदानन्दमय, निर्विकार सबके हृदय में अंतर्यामी रूप से है, गुणातीत और गुणमय हैं, उन मयूरेश गणेश को मेरा प्रणाम है। 

 
 panchayattantra24.-सनातन धर्म में पेड़ पौधो को शुभ मानकर उनकी पूजा की जाती है जिसमें बरगद का पेड़ भी शामिल है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बरगद पर ब्रह्मा विष्णु और शिव का वास होता है ऐसे में अधिकतर लोग इस पेड़ की पूजा करते हैं और देवी देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं लेकिन आज हम आपको अपने इस लेख द्वारा बरगद के पेड़ से जुड़े कुछ आसान उपाय बता रहे हैं जिसे करने से धन के अभाव के साथ साथ अन्य परेशानियों का भी समाधान हो जाएगा। तो आइए जानते है बरगद के पेड़ के अचूक टोटके। 
 बरगद के अचूक उपाय— वास्तु अनुसार बरगद को बेहद पवित्र माना गया है लेकिन भूलकर भी इसे कभी घर के अंदर नहीं लगाना चाहिए इसे हमेशा खुली जगह और घर के बाहर लगाना ही अच्छा होता है। अगर आपको नौकरी नहीं मिल रही है या फिर नौकरी में किसी प्रकार की दिक्कत हो रही है तो ऐसे में आप बरगद के पेड़ का उपाय कर सकते है। आप रोजाना बरगद के पेड़ के नीचे घी का दीपक जलाएं ऐसा करने से कारोबार और नौकरी में तरक्की होती है और सारे काम भी बनने लग जाते है। 
 मनोकामना पूर्ति के लिए बरगद के पत्ते को लेकर उसमें अपनी मनोकामना लिखें और इस पत्ते को नदी में प्रवाहित कर दें। ऐसा करने से सभी इच्छाएं पूरी हो जाती है। इसके अलावा अगर आप लंबे वक्त से धन का अभाव झेल रहे हैं या फिर हाथ में पैसा नहीं टिकता है तो ऐसे में आप बरगद के तने पर केसर और हल्दी अर्पित करें। इस उपाय को करने से हर तरह की समस्या दूर हो जाती है साथ ही साथ धन लाभ के योग बनने लगते है। अगर आप तनाव व चिंता से परेशान है तो बरगद के नीचे बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करें। ऐसा करने से मानसिक तनाव दूर हो जाता है।
 

 
panchayattantra24.-आचार्य चाणक्य को भारत के महान ज्ञानियों और विद्वानों में से एक माना गया हैं जिनकी नीतियां देश ही नहीं बल्कि दुनियाभर में प्रसिद्ध हैं जिसे चाणक्य नीति के नाम से जाना जाता हैं चाणक्य ने अपने जीवन के अनुभवों को नीतिशास्त्र में पिरोया हैं। जिसका अनुसरण अगर कोई मनुष्य कर लेता हैं तो उसका पूरा जीवन सरल और सफल हो जाएगा। आचार्य चाणक्य ने मानव जीवन से जुड़े हर पहलु पर अपनी नीतियों का निर्माण किया हैं चाणक्य ने अपनी नीतियों के द्वारा पिता और पुत्र के संबंधों के बारे में भी बहुत कुछ कहा हैं ऐसे में आज हम आपको आचार्य चाणक्य नीति अनुसार बताने जा रहे हैं कि पिता और पुत्र के बीच संबंध कैसे होने चाहिए। जिससे पुत्र का भविष्य उज्जवल बना रहे।
चाणक्य अनुसार ऐसा हो पिता पुत्र का संबंध— आचार्य चाणक्य ने अपनी एक नीति के माध्यम से बताया हैं कि व्यक्ति को अपने पुत्र के साथ समय समय पर कैसा व्यवहार करना चाहिए। अगर पुत्र की आयु पांच वर्ष हैं या उससे कम हैं तो उसे भरपूर प्रेम देना चाहिए और कटु व्यवहार व बातों को करने से बचना चाहिए। इस दौरान आपका व्यवहार बहुत मधुर होना चाहिए। इसके बाद 10 वर्ष तक पुत्र का तारण यानी देखभाल करना चाहिए। जब पुत्र की आयु 16 वर्ष की हो जाए तब उसके साथ मित्र के समान व्यवहार करना चाहिए और जीवन की सभी महत्वपूर्ण बातों को शेयर करना शुरु कर देना चाहिए। ऐसा करने से पुत्र का भविष्य अच्छा होता हैं और उसके सभी सपने पूरे हो सकते हैं।
 

 
 panchayattantra24.-अगर आपको लगता है कि आपके काम बिगड़ रहे हैं और आप जो भी करने की कोशिश कर रहे हैं उसमें आपको नकारात्मकता ही मिल रही है तो आपको 84 महादेवों में से 62वें महादेव श्री रूपेश्वर महादेव की पूजा करनी चाहिए, जिससे आपकी नकारात्मकता खत्म हो जाएगी और सकारात्मक ऊर्जा भी मिलेगी। मगरमुहा से सिंहपुरी के रास्ते में, कुटुंबेश्वर महादेव मंदिर के पूर्वी दाहिनी ओर, अति प्राचीन श्री रूपेश्वर महादेव मंदिर स्थित है, जो 84 महादेवों में 62वें स्थान पर है। मंदिर के पुजारी पंडित शशांक त्रिवेदी ने बताया कि मंदिर में भगवान शिव के दो शिवलिंग हैं, जो काले और सफेद पत्थर से बने हैं। पंडित ने बताया कि एक जलाशय में सफेद चमकीले पत्थर का शिवलिंग है, जिसकी पूजा करने से सकारात्मक ऊर्जा आती है, जबकि उसके सामने काले पत्थर का शिवलिंग है, जिसकी पूजा करने से नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाती है।
ऐसा माना जाता है कि भगवान के दर्शन से नकारात्मक ऊर्जा नष्ट हो जाती है और हमें सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। मंदिर में प्रतिदिन भगवान की विशेष पूजा-अर्चना के साथ जलाभिषेक का सिलसिला जारी है। मंदिर में नियमित आरती-पूजा के साथ-साथ भगवान को प्रसाद भी चढ़ाया जाता है। मंदिर में श्री रूपेश्वर महादेव के साथ अति प्राचीन धन्य माता भी विराजमान हैं, जो महिषासुर मर्दिनी के रूप में यहां दर्शन दे रही हैं।
यह भी मन्दिर में विराजमान है
गर्भगृह में प्रवेश करने से पहले फर्श पर शिव-पार्वती की प्राचीन मूर्ति है, जबकि पास में अवतारों की प्राचीन मूर्तियाँ हैं। इसके सामने पत्थर के मध्य में एक वृत्त बना हुआ है। फर्श पर विष्णु की मूर्ति है और पास में किसी देवी की मूर्ति है। शेष दीवार पर मध्य में एक ही सफेद पत्थर पर ढाल, धनुष आदि अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित महिषासुर मर्दिनी देवी की साढ़े पांच फीट ऊंची अत्यंत कलात्मक एवं आकर्षक दिव्य प्रतिमा स्थापित है, जिसके दोनों ओर शिव-परिवार सहित ब्रह्मा, विष्णु आदि की मूर्तियां उत्कीर्ण हैं।
यह श्री रूपेश्वर महादेव की कथा है
पद्मकल्प में महादेव ने देवी पार्वती को पद्म राजा की कहानी सुनाते हुए कहा कि राजा ने शिकार करते समय हजारों जंगली जानवरों को मार डाला। फिर एक अत्यन्त सुन्दर वन में एक एकान्त आश्रम में प्रवेश किया। वहां उन्हें साधु के वेश में एक कन्या दिखाई दी। राजा ने मुनिवर के बारे में पूछा। उन्होंने कहा कि मैं कण्व ऋषि को अपना पिता मानती हूं। राजा ने मीठी-मीठी बातें करने वाली लड़की को अपनी पत्नी बनाने का प्रस्ताव रखा।
राजा ने दुल्हन का विवाह एक गंधर्व से कर दिया
उसने ऋषि के आने तक इंतजार करने को कहा, लेकिन लड़की शादी के लिए राजी हो गई। राजा ने दुल्हन से गंधर्व विवाह किया। जब कण्व ऋषि लौटे तो उन्होंने कन्या और राजा दोनों को कुरूपता का श्राप दिया, लेकिन कन्या ने कहा कि मैंने स्वयं ही उन्हें अपना पति चुना है। श्राप से मुक्ति पाने के लिए ऋषि ने उन दोनों को महाकालवन भेज दिया, जहां लिंग को आकार लेते देख दोनों सुंदर हो गईं। इस लिंग को रूपेश्वर के नाम से जाना जाने लगा।

 
 
 
 panchayattantra24.-धर्म अध्यात्म: क्या आपने कभी सोचा है कि किचन में बनाई जाने वाली रोटी का भी आपकी किस्मत से कनेक्शन होता है, यदि नहीं तो चूल्हे पर बनाई जाने वाली रोटी से जुड़े जरूरी नियम को जानने के लिए पढ़ें ये लेख. कभी भूलकर भी गिनकर नहीं बनानी चाहिए रोटी, जानें इससे जुड़े नियम और अचूक उपाय सनातन परंपरा खाने-पीने से लेकर सोने-उठने तक के लिए कुछेक नियम बताए गए हैं,जिनका पालन करने पर व्यक्ति को अपने जीवन में हमेशा शुभता और सफलता प्राप्त होती है. हिंदू धर्म में किचन को बहुत पवित्र स्थान माना गया है,जहां पर बनाई जाने वाली रोटी न सिर्फ व्यक्ति को जीवन जीने की ताकत बल्कि सुख-सौभाग्य भी प्रदान करती है. हिंदू मान्यता के अनुसार यदि कोई किचन में बनाए जाने वाली रोटी से जुड़े इन नियमों की अनदेखी करता है तो उसे तमाम तरह की परेशानियां झेलनी पड़ती हैं. आइए रोटी से जुड़े सभी धार्मिक एवं ज्योतिषीय नियम को विस्तार से जानते हैं. हिंदू मान्यता के अनुसर जिस प्रकार एकादशी व्रत वाले दिन चावल खाने की मनाही है, कुछ उसी प्रकार दिवाली, शरद पूर्णिमा, शीतलाष्टमी, नागपंचमी और किसी की मृत्यु हो जाने पर घर में रोटी नहीं बनाई जाती है. मान्यता है कि इस नियम की अनदेखी करने वाले लोगों से मां अन्नपूर्णा नाराज हो जाती हैं और उन्हें जीवन में धन और अन्न की कमी झेलनी पड़ती है.
हिंदू धर्म के अनुसार किचन में बनाई गई पहली रोटी को हमेशा गाय को देना चाहिए. यदि आपके आस-पास गाय न मिल पाए तो पहली रोटी किसी कुत्ते को खिलाएं. मान्यता है कि रोटी से जुड़े इस उपाय को करने पर उस घर में रहने वालों की सारी विपदा गाय या कुत्ता रोटी को खाकर दूर कर देता है. रोटी के इस उपाय को करने से उस घर में रहने वालों पर सुख-समृद्धि बनी रहती है. हिंदू धर्म में किचन में बनी पहली रोटी को गाय को खिलाने का जहां बहुत ज्यादा पुण्यफल माना गया है, वहीं बासी, जूठी या खराब हो चुकी रोटी गाय को खिलाने को बड़ा पाप माना गया है. चूंकि गाय में 33 कोटि देवताओं का वास माना गया है, ऐसे में इस महापाप से बचने के लिए भूलकर भी गाय को ऐसी रोटी न खिलाएं.
वास्तु के अनुसार किचन में रोटी बनाते समय धार्मिक नियमों के साथ कुछेक वास्तु नियमों का भी ख्याल रखना चाहिए. जैसे वास्तु के अनुसार जिस चूल्हे पर आप रोटी बनाती हैं, वह आपके किचन में हमेशा आग्नेय कोण यानि दक्षिण पूर्व दिशा में होना चाहिए. साथ ही रोटी बनाते समय आपका मुंह पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए.कुछ लोगों की आदत होती है कि रोटी बनाने से पहले वे अपने घर के सदस्यों से पूछते हैं कि वे कितनी रोटी खाएंगे या फिर खिलाते या खाते समय रोटी को गिनते हैं. हिंदू मान्यता में इसे शुभ नहीं माना गया है. मान्यता है रोटी का संबंध सूर्य से होता है और जब आप गिनकर रोटी बनाते हैं तो उससे सूर्य देवता का अपमाना होता है और ऐसा करने पर आपको जीवन में सूर्य ग्रह से जुड़े परेशानियों को झेलना पड़ता है.
 

 
panchayattantra24.-पटना/देवघर। सावन के महीने में सभी शिवालयों में भक्तों की भीड़ देखी जाती है लेकिन सावन महीने की पहली सोमवारी के मौके पर आज भगवान शिव के मंदिर में भक्तों का सुबह से ही तांता लगा हुआ है। सोमवार के मौके पर मंदिर परिसरों को आकर्षक ढ़ंग से सजाया गया है। झारखंड के देवघर स्थित बैद्यनाथ धाम और वासुकीनाथधाम मंदिर के रास्ते कावड़ियों के बोलबम के नारे से गूंज रहे हैं। सुल्तानगंज से उतरवाहिनी गंगा का पवित्र जल उठाकर 105 किलोमीटर लंबी पैदल यात्रा कर कांवडिये बैद्यनाथ धाम पहुंचकर कामना लिंग पर जलाभिषेक करते हैं।
सुबह चार बजे की विशेष पूजा के बाद से ही यहां भक्तों द्वारा जलाभिषेक प्रारंभ हुआ जो बदस्तूर जारी है। बैद्यनाथ धाम में कांवड़ियों की मुख्य मंदिर से पूर्व करीब चार किलोमीटर लंबी कतार लगी हुई है। मेला क्षेत्र में सुरक्षा की कमान संभाल रहे पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सावन महीने की पहली सोमवारी को एक लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। मंदिर का पट रात को श्रृंगार पूजा के बाद बंद कर दिया जाएगा। वासुकीनाथ मंदिर में भी बाबा के भक्तों का आना जारी है। यहां भी सुबह से ही भक्तों की लंबी कतार लगी हुई है।
बिहार की राजधानी पटना के बैकुंठपुर मंदिर, गायघाट के गौरीशंकर मंदिर, पटना सिटी के तिलेश्वर महादेव मंदिर, अलखिया बाबा मंदिर में भी सुबह से ही भक्तों का तांता लगा हुआ है। इसके अलावे बिहार के भी मुजफ्फरपुर के बाबा गरीबनाथ मंदिर, मोतिहारी के सोमेश्वर मंदिर, रोहतास के गुप्ताधाम मंदिर, सोनपुर के हरिहरनाथ मंदिर सहित सभी शिवालयों में सुबह से ही भीड़ उमड़ रही है। मुजफ्फरपुर बाबा गरीबनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी है। विभिन्न जगहों से हजारों कांवड़िए अपनी अपनी मुरादे लेकर बाबा गरीबनाथ दरबार पहुंचकर जलाभिषेक कर रहे हैं। प्रशासन की तरफ से भी मुज़फ़्फ़रपुर के साथ-साथ कई जिलों के पुलिस बल और पदाधिकारियों को ड्यूटी में तैनात किया गया है।
 

 
panchayattantra24.-सनातन धर्म में वैसे तो हर महीने को महत्वपूर्ण बताया गया हैं, लेकिन सावन का महीना बेहद ही खास माना जाता हैं जो कि शिव शंकर की पूजा आराधना को समर्पित होता हैं इस दौरान भक्त भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए उनकी विधिवत पूजा करते हैं और उपवास आदि भी रखते हैं। माना जाता है कि ऐसा करने से शिव कृपा बरसती हैं, श्रावण मास को प्रेम और भक्ति का प्रतीक भी माना जाता हैं ऐसे में अगर आप शिव कृपा हासिल करना चाहते हैं और अपने जीवन की हर परेशानी से छुटकारा चाहते हैं तो आप सावन के पावन महीने में शमी पौधे से जुड़ा उपाय आजमा सकते हैं, माना जाता है कि इन आसान उपायों को करने से आर्थिक, मानसिक और शारीरिक परेशानियों का समाधान हो जाता हैं, तो आज हम आपके लिए लेकर आए हैं शमी पौधे से जुड़े उपाय।
शमी पौधे के आसान उपाय— 
अगर आप फिजूल खर्ची से परेशान रहते हैं जिसके कारण आपके पास पैसा टिक नहीं पाता हैं, तो ऐसे में आप शनिवार की सुबह शमी के पेड़ के नीचे एक सुपारी और एक सिक्का गाड़ दें। फिर लगातार सात दिनों तक शमी पेड़ के ​नीचे तिल के तेल का दीपक जलाए। माना जाता है कि इस आसान से उपाय को करने से अनावश्यक खर्चों पर रोक लग जाती हैं और लंबे समय तक धन भी घर में टिकता हैं। इसके अलावा आर्थिक लाभ पाने के लिए तुलसी के पौधे के पास शमी का पौधा लगाएं और रोजाना इसमें जल अर्पित कर विधि विधान से पूजा करें। माना जाता है कि ऐसा करने से धन की देवी माता लक्ष्मी प्रसन्न हो जाती हैं और आर्थिक उन्नति प्रदान करती हैं साथ ही धन हानि व कर्ज जैसी समस्याओं से भी छुटकारा मिल जाता हैं।
अगर आप लंबे वक्त से कर्ज में डूबे हुए हैं और इससे मुक्ति नहीं मिल पा रही हैं तो ऐसे में आप सावन के शनिवार को शमी के पौधे पर काले तिल चढ़ाएं और कर्ज मुक्ति के लिए प्रार्थना करें ऐसा करने से आपको लाभ जरूर मिलेगा। अच्छी नौकरी पाने के लिए आप सावन के दिनों में शमी के पौधें की जड़ में तांबे के लोटे से जल अर्पित करें माना जाता है इस उपाय को करने से मनचाही नौकरी प्राप्त होती हैं। घर की सुख शांति के लिए सावन सोमवार के दिन शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग पर शमी के पुष्प के साथ बेलपत्र अर्पित करें ऐसा करने से लाभ मिलता हैं।
 

 
 panchayattantra24.-सनातन धर्म में वैसे तो हर महीने का महत्व होता हैं लेकिन श्रावण मास बेहद ही खास माना जाता हैं जो कि आज यानी 4 जुलाई से शुरु हो चुका हैं और इसका समापन 31 अगस्त को हो जाएगा। इस बार सावन में अधिकमास होने के कारण ये पूरे दो महीनों तक रहेगा। सावन के पहले दिन मंगलवार पड़ा हैं जो कि बेहद ही खास माना जा रहा हैं। श्रावण मास के पहले मंगलवार के दिन मंगला गौरी व्रत पूजन किया जाता हैं इस दिन शादीशुदा महिलाएं और कुंवारी कन्याएं उपवास रखते हुए माता गौरी की विधिवत पूजा करती हैं माना जाता हैं कि ऐसा करने से माता का आशीर्वाद मिलता हैं और जीवन में सुख समृद्धि आती हैं, लेकिन इसी के साथ ही अगर आज के दिन कुछ उपायों को किया जाए तो भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण हो जाती हैं तो आज हम आपको अपने इस लेख दवारा मंगला गौरी व्रत पर किए जाने वाले उपाय बता रहे हैं तो आइए जानते हैं।
आज से करें आसान उपाय- सावन के पहले दिन यानी मंगलवार को मंगला गौरी का व्रत पूजन किया जा रहा हैं साथ ही इस दिन कई शुभ योगों का निर्माण भी हो रहा हैं। ऐसे में इस दिन अपनी कामना हेतु हनुमान जी को सिंदूर और चोला अर्पित करें साथ ही चमेली के तेल का दीपक जलाकर भगवान की आरती करें। भोग में भगवान को गुड़ चना या बेसन के लडडू अर्पित करें। माना जाता है कि सावन के पहले मंगलवार के दिन अगर इस उपाय को किया जाए तो जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और हर इच्छा बजरंगबली पूरी कर देते हैं। अगर आप लंबे वक्त से दुख परेशानी झेल रहे हैं और इनसे छुटकारा पाना चाहते हैं तो ऐसे में आप सवन के पहले मंगलवार के दिन पूजा करते समय राम रक्षा स्तोत्र का पाठ जरूर करें। माना जाता है कि ऐसा करने से भगवान हनुमान और श्रीराम की कृपा प्राप्त होती हैं जिससे जीवन के सभी कष्टों का निवारण हो जाता हैं।
 

 
 panchayattantra24.-हर घर की रसोई में चावल का इस्तेमाल भोजन के तौर पर रोजाना किया जाता हैं चावल जहां सेहत के लिहाज से उपयोगी मानी जाती हैं तो वही ज्योतिषशास्त्र में सभी इसका महत्व कम नहीं होता हैं।
ज्योतिषशास्त्र में चावल से जुड़े कई ऐसे चमत्कारी उपाय बताए गए हैं जिसे करने से व्यक्ति की रातों रात किस्मत चमक जाती हैं तो आज हम आपको अपने इस लेख दवारा चावल से जुड़े कुछ अचूक उपाय बता रहे हैं जो आपको धन दौलत और सुख समृद्धि प्रदान करते हैं तो आइए जानते हैं।
चावल से जुड़े अचूक उपाय-
अगर आप कुंडली के चंद्रमा को मजबूत करना चाहते हैं तो ऐसे में पूर्णिमा के दिन चालव की खीर बनाएं और चंद्र देव को इसका भोग लगाएं। ऐसा करने से चंद्र देव प्रसन्न हो जाते हैं साथ ही धन लाभ के योग भी बनने लगते हैं। वही इसके अलावा गुरुवार के दिन मीठे पीले चावल केसर डालकर बनाएं और इसका भोग माता लक्ष्मी व श्री हरि को लगाएं मान्यता है कि ऐसा करने से आर्थिक स्थिति में सुधार होने लगता हैं और किस्मत भी चमक जाती हैं।
अगर आपके पास पैसा अधिक समय तक नहीं रुकता है यानी धन आता है और खर्च हो जाता हैं तो ऐसे में आप एक लाल वस्त्र में चावल के सात साबुत दाने लपेट कर अपने पर्स में रख लें। मान्यता है कि इस उपाय को करने से धन अधिक वक्त तक आपके पास टिका रहेगा। वही रोजाना सुबह एक मुटठी चावल किसी तालाब में बहाएं जहां अधिक मछलियां हो। ऐसा करने से ईष्टदेव की कृपा बनी रहती हैं साथ ही व्यक्ति को सभी समस्याओं से मुक्ति मिल जाती हैं।