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panchayattantra24.-भारत में मंदिरों की महत्ता से शायद ही कोई अछूता हो। भारत के कोने-कोने में मंदिरों का वास हैं और उन मंदिरों के प्रति भक्तगणों की आस्था भी जुडी हुई हैं। जैसा कि अभी सावन का महीना चल रहा हैं तो हर तरफ भगवान शिव की ही बात की जा रही हैं और भोले बाबा के मंदिरों में भक्तों की भीड़ लगी हुई हैं। इसलिए सावन के इस पवित्र महीने को देखते हुए आज हम भी आपको लेकर जा रहे हैं देश के कुछ प्रसिद्द शिव मंदिर, जहाँ का अहसास कुछ इस तरह का होता है जैसे भगवान शिव स्वयं प्रकट हुए हों। तो आइये जानते हैं कुछ शिव मंदिरों के बारे में, जो कि पूरे भारतवर्ष में प्रसिद्ध है।
* काशी विश्वनाथ मंदिर वाराणसी, उत्तर प्रदेश
अमरनाथ गुफा, जम्मू कशमीर अमरनाथ गुफा भगवान शिव के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। अमरनाथ को तीर्थों का तीर्थ कहा जाता है क्यों कि यहीं पर भगवान शिव ने माँ पार्वती को अमरत्व का रहस्य बताया था। यहाँ की प्रमुख विशेषता पवित्र गुफा में बर्फ से प्राकृतिक शिवलिंग का निर्मित होना है। प्राकृतिक हिम से निर्मित होने के कारण इसे स्वयंभू हिमानी शिवलिंग भी कहते हैं।
* लिंगराज मंदिर, ओडीसा
लिंगराज मंदिर भारत के ओडिशा प्रांत की राजधानी भुवनेश्वर में स्थित है। यह इस शहर के प्राचीनतम मंदिरों में से एक है। धार्मिक कथा है कि लिट्टी तथा वसा नाम के दो भयंकर राक्षसों का वध देवी पार्वती ने यहीं पर किया था। संग्राम के बाद उन्हें प्यास लगी, तो शिवजी ने कूप बनाकर सभी पवित्र नदियों को योगदान के लिए बुलाया। यहीं पर बिन्दूसागर सरोवर है तथा उसके निकट ही लिंगराज का विशालकाय मन्दिर है।
* मुरुदेश्वर शिव मंदिर, कर्नाटक
यह हिन्दू भगवान शिव के एक नाम पर पड़ा है। यहां विश्व में भगवान की दूसरी सबसे ऊंची मूर्ति स्थित है। यह मंदिर अरब सागर के तट पर स्थित है और मेंगलोर से 165 किलो मीटर दूर अरब सागर के बहुत ही सुन्दर एवं शांत तट के किनारे बना हुआ है।
* रामेश्वरम, तमिल नाडु
रामेश्वरम हिंदुओं का एक पवित्र तीर्थ है। यह तमिल नाडु के रामनाथपुरम जिले में स्थित है। यह तीर्थ हिन्दुओं के चार धामों में से एक है। इसके अलावा यहां स्थापित शिवलिंग बारह द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। भारत के उत्तर मे काशी की जो मान्यता है, वही दक्षिण में रामेश्वरम् की है।
 

 
K.W.N.S.-गर्मियों के मौसम में हमें कई तरह की समस्या से दो-चार होना पड़ता है. कभी घमौरियां, तो कभी डिहाइड्रेशन. मगर सबसे ज्यादा परेशानी त्वचा से संबंधित होती है. ऐसे में आज हम एक ऐसे फल के बारे में जानेंगे, जो पोषक तत्वों से भरपूर होता है, साथ ही उसका स्वाद लाजवाब होता. अगर आप अबतक नहीं समझें तो बता दें कि यहां बात हो रही है लीची की. जी हां… लीची में गर्मियों के मौसम में आपकी बॉडी को न सिर्फ हाइड्रेट रखती है, बल्कि खट्टी-मीठी स्वाद वाली रसीली लीची में पोषक तत्वों की भरमार होती है. लीची में विटामिन सी, बीटा कैरोटीन, नियासिन, राइबोफ्लेविन और इम्यूनिटी बूस्ट करने वाला फोलेट मौजूद होता है, साथ ही लीची त्वचा के लिए काफी ज्यादा फायदेमंद होता है, जो इसे गर्मियों के मौसम के लिए बिल्कुल सटीक बताता है।
हालांकि यहां ये जान लीजिए कि न सिर्फ लीची, बल्कि लीची के जिन छिलकों को हम फेंक देते हैं वो भी काफी ज्यादा फायदेमंद हैं. बता दें कि खूबसूरती बढ़ाने, स्किन को ग्लोइंग करने, गर्दन की टैनिंग साफ करने सहित लीची के छिलकों का कई तरह से इस्तेमाल किया जा सकता है. ऐसे में आइये आज बात करेंगे लीची फल के छिलकों के फायदों के बारे में… ये हैं लीची के छिलकों के फायदे टैनिंग से पा सकते हैं छुटकारा: लीची के छिलके गले की टैनिंग साफ करने में काफी ज्यादा कारगर साबित हो सकते हैं. लीची के छिलकों से गले की टैनिंग साफ करने के लिए इसे पीसकर बेकिंग पाउडर, नींबू का रस, नारियल तेल और हल्दी मिलाकर पेस्ट तैयार करना है, जिसके बाद गले पर जहां टैनिंग हुई है, वहां पेस्ट को लगाना होगा. कुछ देर हल्के हाथ से मसाज के बाद गले की डेड सेल्स निकल आएंगी और टैनिंग से आपको छुटकारा मिल जाएगा.
बॉडी स्क्रब के तौर पर करें इस्तेमाल: लीची के छिलके को आप गर्मियों के मौसम में एक बॉडी स्क्रब के तौर पर भी इस्तेमाल में ले सकते हैं. इसके लिए सबसे पहले आपको लीची के छिलके को धुलकर सुखाकर मिक्सी में दरदरा पीस लेना है, फिर उसमें चावल का आटा, एलोवेरा जेल और गुलाब जल मिलाकर एक पेस्ट तैयार करना है. एक बार पेस्ट तैयार हो जाने पर लीची के छिलकों से बने इस पेस्ट को चेहरे पर लगाना, फिर धीरे-धीरे हल्के हाथों से मसाज कर चेहरे को पानी से धो लें, जिससे डेड सेल्स आसानी से निकल जाएंगे और चेहरा भी निखर आएगा.
 

 
K.W.N.S.-आज गुरुवार का दिन है और ये दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु के साथ साथ देव गुरु बृहस्पति की पूजा को समर्पित होता हैं इस दिन भक्त प्रभु की भक्ति में लीन रहते हैं और उनकी विधिवत पूजा व उपवास करते हैं।
मान्यता है कि इस दिन पूजा पाठ और व्रत के साथ अगर श्री विष्णु चालीसा का पाठ किया जाए तो भगवान जल्दी प्रसन्न होकर अपनी कृपा करते हैं और भक्तों की हर मनोकामना को पूर्ण कर देते हैं इसका पाठ आप रोजाना भी कर सकते हैं। तो आज हम आपके लिए लेकर आए हैं ये चमत्कारी पाठ।
श्री विष्णु चालीसा—
॥ दोहा ॥
विष्णु सुनिए विनय
सेवक की चितलाय।
कीरत कुछ वर्णन करूँ
दीजै ज्ञान बताय॥
॥ चौपाई ॥
नमो विष्णु भगवान खरारी।
कष्ट नशावन अखिल बिहारी॥ 1 ॥
प्रबल जगत में शक्ति तुम्हारी।
त्रिभुवन फैल रही उजियारी॥ 2 ॥
सुन्दर रूप मनोहर सूरत।
सरल स्वभाव मोहनी मूरत॥ 3 ॥
तन पर पीताम्बर अति सोहत।
बैजन्ती माला मन मोहत॥ 4 ॥
शंख चक्र कर गदा बिराजे।
देखत दैत्य असुर दल भाजे॥ 5 ॥
सत्य धर्म मद लोभ न गाजे।
काम क्रोध मद लोभ न छाजे॥ 6 ॥
सन्तभक्त सज्जन मनरंजन।
दनुज असुर दुष्टन दल गंजन॥ 7 ॥
सुख उपजाय कष्ट सब भंजन।
दोष मिटाय करत जन सज्जन॥ 8 ॥
पाप काट भव सिन्धु उतारण।
कष्ट नाशकर भक्त उबारण॥ 9 ॥
करत अनेक रूप प्रभु धारण।
केवल आप भक्ति के कारण॥ 10 ॥
धरणि धेनु बन तुमहिं पुकारा।
तब तुम रूप राम का धारा॥ 11 ॥
भार उतार असुर दल मारा।
रावण आदिक को संहारा॥ 12 ॥
आप वाराह रूप बनाया।
हिरण्याक्ष को मार गिराया॥ 13 ॥
धर मत्स्य तन सिन्धु बनाया।
चौदह रतनन को निकलाया॥ 14 ॥
अमिलख असुरन द्वन्द मचाया।
रूप मोहनी आप दिखाया॥ 15 ॥
देवन को अमृत पान कराया।
असुरन को छबि से बहलाया॥ 16 ॥
कूर्म रूप धर सिन्धु मझाया।
मन्द्राचल गिरि तुरत उठाया॥ 17 ॥
शंकर का तुम फन्द छुड़ाया।
भस्मासुर को रूप दिखाया॥ 18 ॥
वेदन को जब असुर डुबाया।
कर प्रबन्ध उन्हें ढुँढवाया॥ 19 ॥
मोहित बनकर खलहि नचाया।
उसही कर से भस्म कराया॥ 20 ॥
असुर जलंधर अति बलदाई।
शंकर से उन कीन्ह लड़ाई॥ 21 ॥
हार पार शिव सकल बनाई।
कीन सती से छल खल जाई॥ 22 ॥
सुमिरन कीन तुम्हें शिवरानी।
बतलाई सब विपत कहानी॥ 23 ॥
तब तुम बने मुनीश्वर ज्ञानी।
वृन्दा की सब सुरति भुलानी॥ 24 ॥
देखत तीन दनुज शैतानी।
वृन्दा आय तुम्हें लपटानी॥ 25 ॥
हो स्पर्श धर्म क्षति मानी।
हना असुर उर शिव शैतानी॥ 26 ॥
तुमने धुरू प्रहलाद उबारे।
हिरणाकुश आदिक खल मारे॥ 27 ॥
गणिका और अजामिल तारे।
बहुत भक्त भव सिन्धु उतारे॥ 28 ॥
हरहु सकल संताप हमारे।
कृपा करहु हरि सिरजन हारे॥ 29 ॥
देखहुँ मैं निज दरश तुम्हारे।
दीन बन्धु भक्तन हितकारे॥ 30 ॥
चहत आपका सेवक दर्शन।
करहु दया अपनी मधुसूदन॥ 31 ॥
जानूं नहीं योग्य जप पूजन।
होय यज्ञ स्तुति अनुमोदन॥ 32 ॥
शीलदया सन्तोष सुलक्षण।
विदित नहीं व्रतबोध विलक्षण॥ 33 ॥
करहुँ आपका किस विधि पूजन।
कुमति विलोक होत दुख भीषण॥ 34 ॥
करहुँ प्रणाम कौन विधिसुमिरण।
कौन भाँति मैं करहुँ समर्पण॥ 35 ॥
सुर मुनि करत सदा सिवकाई।
हर्षित रहत परम गति पाई॥ 36 ॥
दीन दुखिन पर सदा सहाई।
निज जन जान लेव अपनाई॥ 37 ॥
पाप दोष संताप नशाओ।
भव बन्धन से मुक्त कराओ॥ 38 ॥
सुत सम्पति दे सुख उपजाओ।
निज चरनन का दास बनाओ॥ 39 ॥
निगम सदा ये विनय सुनावै।
पढ़ै सुनै सो जन सुख पावै॥ 40 ॥
इति श्री विष्णु चालीसा 

 

K.W.N.S.-सावन का महीना सनातन धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. इस दौरान भगवान शिव की पूजा आराधना कर उनसे आशीर्वाद लेने का सबसे अच्छा समय माना जाता है. सावन का महीना भगवान शिव को सबसे अधिक प्रिय है हिंदू कैलेंडर के अनुसार साल 2023 का श्रावण मास बेहद खास माना जा रहा है, क्योंकि इस बार सावन का महीना 30 नहीं बल्कि 59 दिनों का रहेगा. ऐसा इसलिए क्योंकि हिंदू पंचांग विक्रम संवत 2080 के अनुसार इस साल अधिक मास पड़ रहा है जिसमें पूरे 13 महीने होंगे. माना जा रहा है कि 19 साल बाद ऐसा संयोग बन रहा है कि जब सावन का महीना पूरे 59 दिनों का रहेगा. इस दौरान भक्त अपने आराध्य की प्रत्येक सोमवार विधि विधान से पूजा कर उन्हें प्रसन्न कर सकते हैं. आइए जानते हैं दिल्ली निवासी ज्योतिष आचार्य पंडित आलोक पाण्डया से सावन माह की तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व के बारे में.
कब से शुरू हो रहा श्रावण मास 2023
हिंदू पंचांग के अनुसार सावन का महीना 4 जुलाई 2023 से शुरू हो रहा है. इस दौरान पहला सोमवार 10 जुलाई 2023 को पड़ेगा.
श्रावण मास का दूसरा सोमवार 17 जुलाई 2023 को पड़ेगा.
श्रावण मास का तीसरा सोमवार 24 जुलाई 2023 को पड़ेगा.
श्रावण मास का चौथा सोमवार 31 जुलाई 2023 को पड़ेगा.
श्रावण मास का पांचवां सोमवार 7 अगस्त 2023 को पड़ेगा.
श्रावण मास का छठवां सोमवार 14 अगस्त 2023 को पड़ेगा.
श्रावण मास का सातवां सोमवार 21 अगस्त 2023 को पड़ेगा.
श्रावण मास का आठवां सोमवार 28 अगस्त 2023 को पड़ेगा.
सावन के सोमवार का महत्व
सनातन धर्म में विशेष महत्व रखने सावन का महीना भोले भक्तों के लिए किसी पर्व से कम नहीं. नेताओं के अनुसार श्रावण मास में भगवान शिव सृष्टि का संचार करते हैं और इस दौरान वह अपने भक्तों की आवाज को बड़ी ही आसानी से सुन लेते हैं. सावन मास में शिवलिंग का जलाभिषेक और दूध अभिषेक करना शुभ फलदाई माना जाता है.
दुर्लभ योग
हिंदू पंचांग के अनुसार इस बार सावन मास पूरे 59 दिनों का होने वाला है. इसके अलावा सावन के महीने में मणिकांचन योग भी बन रहा है जो बेहद दुर्लभ माना गया है. इस बार मलमास में ही रक्षाबंधन का त्यौहार भी मनाया जाएगा.
 

P. T. –   त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत करने से भगवान शिव प्रसन्‍न होते हैं। विशेष उपाय करें जिससे आपका भाग्योदय हो सकता है। प्रत्येक महिने की दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत करते हैं। इस बार बुधवार को प्रदोष व्रत है। इस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा करने से आपका भाग्योदय हो सकता है।

शिव परिवार की करें पूजा

प्रदोष व्रत के दिन सुबह स्नान करने के बाद भगवान शंकर, पार्वती और नंदी को पंचामृत व गंगाजल से स्नान कराएं।इसके बाद बेल पत्र, गंध, चावल, फूल, धूप, दीप, नैवेद्य (भोग), फल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची भगवान को चढ़ाएं। पूरे दिन निराहार (संभव न हो तो एक समय फलाहार) कर सकते हैं) रहें और शाम को दोबारा इसी तरह से शिव परिवार की पूजा करें।

भगवान शिवजी को लगाएं भोग

भगवान शिवजी को घी और शक्कर मिले जौ के सत्तू का भोग लगाएं। आठ दीपक आठ दिशाओं में जलाएं। भगवान शिवजी की आरती करें। भगवान को प्रसाद चढ़ाएं और उसीसे अपना व्रत भी तोड़ें। उस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें।

आंकड़े के फूल भगवान शिवजी को विशेष प्रिय

सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद तांबे के लोटे से सूर्यदेव को अर्ध्य देें। पानी में आंकड़े के फूल जरूर मिलाएं। आंकड़े के फूल भगवान शिवजी को विशेष प्रिय हैं। ऐसा करने से सूर्यदेव सहित भगवान शिवजी की कृपा बनी रहती है।

कर्ज से मुक्ति के लिए उपाय

सूर्यास्‍त के समय गुरु काे याद करते हुए शिवजी का स्मरण कर 17 मंत्र ॐ शिवाय नम:,ॐ सर्वात्मने नम:,ॐ त्रिनेत्राय नम:,ॐ हराय नम:, ॐ इन्द्र्मुखाय नम:, ॐ श्रीकंठाय नम:, ॐ सद्योजाताय नम:, ॐ वामदेवाय नम:, ॐ अघोरह्र्द्याय नम:, ॐ तत्पुरुषाय नम:, ॐ ईशानाय नम:, ॐ अनंतधर्माय नम:, ॐ ज्ञानभूताय नम:, ॐ अनंतवैराग्यसिंघाय नम: ॐ प्रधानाय नम:, ॐ व्योमात्मने नम: व ॐ युक्तकेशात्मरूपाय नम: बोलें, जिनके सिर पर कर्जा ज्यादा हो, वो शिवजी के मंदिर में जाकर दिया जलाकर ये मंत्र बोले।इससे कर्जा से मुक्ति मिलेगी।

आर्थिक परेशानी से बचने के लिए उपाय

जिनके घर में आर्थिक कष्ट रहते हैं वो कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को शाम के समय जप-प्रार्थना करें एवं शिवमंदिर में दीप-दान करें और रात को जब 12 बजे थोड़ी देर जाग कर जप और एक श्री हनुमान चालीसा का पाठ करें। शाम को बराबर सूर्यास्त हो रहा हो उस समय एक दिया पर पांच लंबी बत्तियां अलग-अलग उस एक में हो शिवलिंग के आगे जला के रखना। बैठ कर भगवान शिवजी के नाम का जप करना प्रार्थना करने से कर्जा जल्दी उतरता है।

 
K.W.N.S.-तुलसीदास कृत रामचरितमानस में एक दोहा और एक चौपाई ऐसी है जो हमें यह बताती है कि किस तरह के इंसान से बात नहीं करना चाहिए। यदि आप बात करेंगे तो समय बर्बाद करने के साथ ही मुसीबत में भी फंस सकते हो। यह दोहा और चौपाई प्रभु श्रीराम के मुख से उद्धृत हुआ है। आओ जानते हैं कि कौन हैं वे इंसान और कौनसी हैं वे बातें।
दोहा :
लछिमन बान सरासन आनू। सोषौं बारिधि बिसिख कृसानु॥
सठ सन बिनय कुटिल सन प्रीति। सहज कृपन सन सुंदर नीति॥1॥- सुंदरकाण्ड
अर्थ:- हे लक्ष्मण! धनुष-बाण लाओ, मैं अग्निबाण से समुद्र को सोख डालूँ। मूर्ख से विनय, कुटिल के साथ प्रीति, स्वाभाविक ही कंजूस से सुंदर नीति (उदारता का उपदेश),॥1॥
भावार्थ : प्रभु श्रीराम कहते हैं कि मूर्ख से विनयपूर्वक बात नहीं करना चाहिए। कोई भी मूर्ख व्यक्ति दूसरों की प्रार्थना को समझता नहीं है, क्योंकि वह जड़ बुद्धि होता है। मूर्ख लोगों को डराकर ही उनसे काम करवाया जा सकता है।
इसी के साथ दूसरा है कुटिल स्वभाव वाले व्यक्ति के साथ प्रेमपूर्वक बात नहीं करना चाहिए। ऐसे व्यक्ति प्रेम के लायक नहीं होता। यह सदैव दूसरों को कष्ट ही देते हैं और इन पर भरोसा करना घातक होता है। ये अपने स्वार्थ के लिए दूसरों को संकट में डाल सकते हैं। अत: कुटिल व्यक्ति से प्रेम पूर्वक बात नहीं करनी चाहिए। तीसरा है कंजूस से सुंदर नीति अर्थात उदारता या उपदेश से काम नहीं चलता है। वह धन का लालची होता है। अत: उससे किसी की मदद या दान की अपेशा नहीं करना चाहिए। कंजूस से ऐसी बात करने पर हमारा ही समय व्यर्थ होगा।
चौपाई :
ममता रत सन ग्यान कहानी। अति लोभी सन बिरति बखानी॥
क्रोधिहि सम कामिहि हरिकथा। ऊसर बीज बएँ फल जथा॥2॥- सुंदरकाण्ड
अर्थ:- ममता में फँसे हुए मनुष्य से ज्ञान की कथा, अत्यंत लोभी से वैराग्य का वर्णन, क्रोधी से शम (शांति) की बात और कामी से भगवान्‌ की कथा, इनका वैसा ही फल होता है जैसा ऊसर में बीज बोने से होता है (अर्थात्‌ ऊसर में बीज बोने की भाँति यह सब व्यर्थ जाता है)॥2॥
श्रीराम कहते हैं- ममता में फंसे हुए व्यक्ति से कभी भी ज्ञान की बात न करें। वह कभी भी सत्य और असत्य में भेद नहीं कर पाता है। ममता के कारण वह खुद का और दूसरों का भी नुकसान कर बैठता है। इसी तरह अति लोभी व्यक्ति के समक्ष त्याग या वैरोग्य की महिमा का वर्णन करना व्यर्थ है। ऐसे लोग कभी भी त्यागी या वैरागी नहीं बन सकते हैं। इसी तरह जिस व्यक्ति को हर समय क्रोध आता रहता है उससे शांति की बातें करना व्यर्थ है। वह क्रोध या अवेश में सबकुछ भूल जाता है। क्रोध के आवेश में व्यक्ति अच्छी-बुरी बातों में भेद नहीं कर पाता है। फिर अंत में कामी व्यक्ति होता है। वासना से भरे व्यक्ति के समक्ष कभी भी भगवान की बातें नहीं करना चाहिए। ऐसे व्यक्ति को रिश्तों और उम्र की भी समझ नहीं होती है और वह मर्यादा को भूला देता है।
 

 
 K.W.N.S.-भगवान शिव बहुत जल्दी अपने भक्तों से प्रसन्न हो जाते हैं और अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं. इसलिए उन्हें देवों के देव महादेव कहा जाता है. काल भैरव को भगवान शिव का अवतार माना गया है. कालाष्टमी का दिन इनकी पूजा के लिए श्रेष्ठ माना जाता है. कालाष्टमी हर साल ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है. इस बार यह तिथि 12 मई 2023 को पड़ रही है. जो व्यक्ति कालाष्टमी के दिन पूरी श्रद्धा से काल भैरव की पूजा करता है, उनके सभी दुख और कष्ट समाप्त हो जाते हैं। 
तांत्रिकों के लिए भी कालाष्टमी का बहुत महत्व है. इस रात को तंत्र सीखने वाले काल भैरव की पूजा करते हैं और सफलता पाने के लिए अनुष्ठान करते हैं। 
कालाष्टमी शुभ मुहूर्त
कालाष्टमी तिथि 12 मई को सुबह 9:06 बजे से शुरू होकर अगले दिन यानी 13 मई 2023 को सुबह 6:50 बजे समाप्त होगी. हालांकि मान्यताओं के अनुसार रात में काल भैरव की पूजा की जाती है. ऐसे में व्रत 12 मई को ही रखा जाएगा
कालाष्‍टमी व्रत का क्या है महत्‍व
कालाष्टमी के दिन भगवान काल भैरव की पूजा होती है. इस दिन व्रत रखने से आपके मन से हर तरह का डर दूर हो जाता है. जिन लोगों को रात में बुरे सपने आते हैं उन्हें कालाष्टमी के दिन भगवान काल भैरव की पूजा करनी चाहिए. ऐसा करने से उन्हें रात में डर नहीं लगेगा। 
पूजा विधि
कालाष्टमी के दिन सूर्योदय से पहले स्नान करके तैयार हो जाएं. व्रत रखने वाले लोग काले रंग के वस्त्र धारण कर सकते हैं. इसके बाद काल भैरव का ध्यान करते हुए हाथ में गंगाजल लेकर व्रत का संकल्प लें. काल भैरव को धतूरा, दूध, दही, बेलपत्र, धूप, दीप, फल, फूल, पंचामृत चढ़ाएं और काल भैरव के मंत्रों का जाप करें. शाम को आरती कर फलाहार लें. अगले दिन व्रत तोड़ने के बाद जरूरतमंदों को दान अवश्य करें। 
 
 

 
 
K.W.N.S.-हर कोई अपने जीवन में सुख शांति चाहता है इसके लिए लोग प्रयास भी करते है। लेकिन इसके बावजूद भी अगर आपको परेशानियों व कष्टों का सामना करना पड़ रहा है या फिर आपको लगता है कि आप पर किसी ने टोना टोटका कर दिया है आप तंत्र मंत्र से घिरे हुए है तो ऐसे में आप शनिवार के दिन शनि महाराज का ध्यान करते हुए श्री शनि अष्टोत्तार नामावाली का पाठ कर सकते हैं मान्यता है कि ये चमत्कारी पाठ सभी प्रकार के तंत्र मंत्र से मुक्ति दिलाता है।
श्री शनि अष्टोत्तार नामावाली—
ओं शनैश्चराय नमः ।
ओं शान्ताय नमः ।
ओं सर्वाभीष्टप्रदायिने नमः ।
ओं शरण्याय नमः ।
ओं वरेण्याय नमः ।
ओं सर्वेशाय नमः ।
ओं सौम्याय नमः ।
ओं सुरवन्द्याय नमः ।
ओं सुरलोकविहारिणे नमः । 9
ओं सुखासनोपविष्टाय नमः ।
ओं सुन्दराय नमः ।
ओं घनाय नमः ।
ओं घनरूपाय नमः ।
ओं घनाभरणधारिणे नमः ।
ओं घनसारविलेपाय नमः ।
ओं खद्योताय नमः ।
ओं मन्दाय नमः ।
ओं मन्दचेष्टाय नमः । 18
ओं महनीयगुणात्मने नमः ।
ओं मर्त्यपावनपदाय नमः ।
ओं महेशाय नमः ।
ओं छायापुत्राय नमः ।
ओं शर्वाय नमः ।
ओं शरतूणीरधारिणे नमः ।
ओं चरस्थिरस्वभावाय नमः ।
ओं चञ्चलाय नमः ।
ओं नीलवर्णाय नमः । 27
ओं नित्याय नमः ।
ओं नीलाञ्जननिभाय नमः ।
ओं नीलाम्बरविभूषाय नमः ।
ओं निश्चलाय नमः ।
ओं वेद्याय नमः ।
ओं विधिरूपाय नमः ।
ओं विरोधाधारभूमये नमः ।
ओं भेदास्पदस्वभावाय नमः ।
ओं वज्रदेहाय नमः । 36
ओं वैराग्यदाय नमः ।
ओं वीराय नमः ।
ओं वीतरोगभयाय नमः ।
ओं विपत्परम्परेशाय नमः ।
ओं विश्ववन्द्याय नमः ।
ओं गृध्नवाहाय नमः ।
ओं गूढाय नमः ।
ओं कूर्माङ्गाय नमः ।
ओं कुरूपिणे नमः । 45
ओं कुत्सिताय नमः ।
ओं गुणाढ्याय नमः ।
ओं गोचराय नमः ।
ओं अविद्यामूलनाशाय नमः ।
ओं विद्याऽविद्यास्वरूपिणे नमः ।
ओं आयुष्यकारणाय नमः ।
ओं आपदुद्धर्त्रे नमः ।
ओं विष्णुभक्ताय नमः ।
ओं वशिने नमः । 54
ओं विविधागमवेदिने नमः ।
ओं विधिस्तुत्याय नमः ।
ओं वन्द्याय नमः ।
ओं विरूपाक्षाय नमः ।
ओं वरिष्ठाय नमः ।
ओं गरिष्ठाय नमः ।
ओं वज्राङ्कुशधराय नमः ।
ओं वरदाभयहस्ताय नमः ।
ओं वामनाय नमः । 63
ओं ज्येष्ठापत्नीसमेताय नमः ।
ओं श्रेष्ठाय नमः ।
ओं मितभाषिणे नमः ।
ओं कष्टौघनाशकाय नमः ।
ओं पुष्टिदाय नमः ।
ओं स्तुत्याय नमः ।
ओं स्तोत्रगम्याय नमः ।
ओं भक्तिवश्याय नमः ।
ओं भानवे नमः । 72
ओं भानुपुत्राय नमः ।
ओं भव्याय नमः ।
ओं पावनाय नमः ।
ओं धनुर्मण्डलसंस्थाय नमः ।
ओं धनदाय नमः ।
ओं धनुष्मते नमः ।
ओं तनुप्रकाशदेहाय नमः ।
ओं तामसाय नमः ।
ओं अशेषजनवन्द्याय नमः । 81
ओं विशेषफलदायिने नमः ।
ओं वशीकृतजनेशाय नमः ।
ओं पशूनां पतये नमः ।
ओं खेचराय नमः ।
ओं खगेशाय नमः ।
ओं घननीलाम्बराय नमः ।
ओं काठिन्यमानसाय नमः ।
ओं आर्यगणस्तुत्याय नमः ।
ओं नीलच्छत्राय नमः । 90
ओं नित्याय नमः ।
ओं निर्गुणाय नमः ।
ओं गुणात्मने नमः ।
ओं निरामयाय नमः ।
ओं निन्द्याय नमः ।
ओं वन्दनीयाय नमः ।
ओं धीराय नमः ।
ओं दिव्यदेहाय नमः ।
ओं दीनार्तिहरणाय नमः । 99
ओं दैन्यनाशकराय नमः ।
ओं आर्यजनगण्याय नमः ।
ओं क्रूराय नमः ।
ओं क्रूरचेष्टाय नमः ।
ओं कामक्रोधकराय नमः ।
ओं कलत्रपुत्रशत्रुत्वकारणाय नमः ।
ओं परिपोषितभक्ताय नमः ।
ओं परभीतिहराय नमः ।
ओं भक्तसङ्घमनोऽभीष्टफलदाय नमः । 108
इति श्री शनि अष्टोत्तार शतनामावली: ||
 

 
K.W.N.S.-हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार किसी सभी देवी देवता की पूजा आराधना व व्रत बिना उनकी आरती किए पूर्ण नहीं माना जाता है और ना ही व्रत पूजन का कोई फल साधक को प्राप्त होता है। मंगलवार का दिन हनुमान पूजा के लिए श्रेष्ठ माना गया है।
ऐसे में अगर आप आज के दिन प्रभु की विधिवत पूजा कर रहे हैं या फिर दिनभर उपवास रख रहे हैं तो बजरंगबली की प्रिय आरती का पाठ जरूर करें मान्यता है कि श्री हनुमान जी की आरती पूजा में पढ़ने से प्रभु जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं और अपने भक्तों की सभी परेशानियों व दुखों को दूर कर देते हैं साथ ही साथ साधकों की इच्छाएं भी पूरी हो जाती है। तो आज हम आपके लिए लेकर आए है हनुमान आरती।
॥ श्री हनुमंत स्तुति ॥
मनोजवं मारुत तुल्यवेगं,
जितेन्द्रियं, बुद्धिमतां वरिष्ठम् ॥
वातात्मजं वानरयुथ मुख्यं,
श्रीरामदुतं शरणम प्रपद्धे ॥
॥ आरती ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥
जाके बल से गिरवर काँपे ।
रोग-दोष जाके निकट न झाँके ॥
अंजनि पुत्र महा बलदाई ।
संतन के प्रभु सदा सहाई ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ॥
दे वीरा रघुनाथ पठाए ।
लंका जारि सिया सुधि लाये ॥
लंका सो कोट समुद्र सी खाई ।
जात पवनसुत बार न लाई ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ॥
लंका जारि असुर संहारे ।
सियाराम जी के काज सँवारे ॥
लक्ष्मण मुर्छित पड़े सकारे ।
लाये संजिवन प्राण उबारे ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ॥
पैठि पताल तोरि जमकारे ।
अहिरावण की भुजा उखारे ॥
बाईं भुजा असुर दल मारे ।
दाहिने भुजा संतजन तारे ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ॥
सुर-नर-मुनि जन आरती उतरें ।
जय जय जय हनुमान उचारें ॥
कंचन थार कपूर लौ छाई ।
आरती करत अंजना माई ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ॥
जो हनुमानजी की आरती गावे ।
बसहिं बैकुंठ परम पद पावे ॥
लंक विध्वंस किये रघुराई ।
तुलसीदास स्वामी कीर्ति गाई ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥
॥ इति संपूर्णंम् ॥
 

 

K.W.N.S.-हिंदू धर्म में वैसे तो कई पर्व मनाए जाते हैं लेकिन इन सभी में अक्षय तृतीया का त्योहार बेहद ही खास माना जाता है। जो कि हर साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को देशभर में धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इसे कई जगहों पर आखा तीज के नाम से भी जाना जाता है। इस बार अक्षय तृतीया का पर्व 22 अप्रैल दिन शनिवार को पड़ रहा है।
इस दिन बिना मुहूर्त देखें किसी भी शुभ व नए कार्य की शुरुआत की जा सकती है। ऐसे में अक्षय तृतीया की तिथि को अबूझ मुहूर्त माना जाता है। इस दिन को सोना चांदी खरीदने के लिए भी उत्तम माना जाता है मान्यता है कि ऐसा करने से धन दौलत में वृद्धि होती है। धार्मिक तौर पर ये तिथि लक्ष्मी कृपा पाने के लिए भी श्रेष्ठ मानी जाती है तो आज हम आपको अपने इस लेख द्वारा अक्षय तृतीया पर सोना खरीदने का शुभ मुहूर्त बता रहे हैं तो आइए जानते है।
अक्षय तृतीया की तारीख—
आपको बता दें कि वैशाख शुक्ल की तृतीया का आरंभ— 22 अप्रैल दिन शनिवार को प्रात: 7 बजकर 49 मिनट से आरंभ हो रहा है। जिसका समापन 23 अप्रैल दिन रविवार को 7 बजकर 47 मिनट पर हो रहा है। ऐसे में अक्षय तृतीया का पर्व 22 अप्रैल को मनाया जाएगा।
जानिए शुभ मुहूर्त—
अक्षय ​तृतीया के दिन पूजन का शुभ मुहूर्त— 22 अप्रैल दिन शनिवार को प्रात: 7 बजकर 49 मिनट से दोपहर 12 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। वही इस दिन सोना खरीदने का शुभ मुहूर्त सुबह 7 बजकर 49 मिनट से 23 अप्रैल दिन रविवार को सुबह 7 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। ऐसे में इस मुहूर्त में सोने की खरीदारी करने से जातक को धन लाभ की प्राप्ति होती है साथ ही धन दौलत में वृद्धि भी होती है।