रायपुर । जंगल सफारी का जू अगले महीने से पर्यटकों के लिए खोल दिया जाएगा। अगले महीने के दूसरे पखवाड़े में जू का उद्घाटन करने की तैयारी है। जू में अभी 10 बाड़ों में सफेद शेर और सिंह के अलावा घडिय़ाल और दरियाई घोड़े जैसे वन्य प्राणी हैं। फिलहाल इन्हीं के साथ जू शुरू किया जाएगा। जल्द ही यहां साउथ अफ्रीका से जिराफ और जेब्रा लाने की तैयारी है। इसके लिए सेंट्रल जू अथॉरिटी ने औपचारिक सहमति दे दी है।जंगल सफारी के अफसरों ने पिछले दिनों दिल्ली में जू का पूरा कलेक्शन प्लान दिखाया। उसके प्रेजेंटेशन के दौरान अफसरों ने बताया कि वे ईमू और शुतुर्गमुर्ग की जगह जेब्रा और जिराफ रखने का प्रस्ताव रखते हुए अनुमति मांगी। सेंट्रल जू अथॉरिटी के अफसरों ने उन्हें कहा कि वे अपने कलेक्शन प्लान में बदलाव करने के बाद दोबारा प्रस्तुत करें। उन्हें मंजूरी दे दी जाएगी। अफसरों ने वन विभाग के आला अफसरों और शासन के जिम्मेदारों को इसकी जानकारी दे दी है। शासन स्तर पर ही वन विभाग के अफसरों को ये निर्देश दिए गए थे कि जू में ऐसे आर्कषक वन्य प्राणी होने चाहिए जो देश के गिने चुने जू में ही रखे गए हैं। उसके बाद ही जेब्रा और जिराफ लाने के लिए सेंट्रल जू अथॉरिटी से मंजूरी मांगी गई। अथॉरिटी के अफसरों ने यहां के जू का कलेक्शन प्लान देखने के बाद उनके प्रस्ताव को मंजूर कर लिया।
ई रिक्शा की सुविदा मुहैया होगी
जंगल सफारी के गेट से ही जू में जाने का रास्ता है। जू का गेट सफारी से लगभग आधा किलोमीटर दूर है। वहां तक पर्यटकों को खासतौर पर बुजुर्गों को पहुंचाने के लिए व्यवस्था की जाएगी। अफसर ये तैयारी कर रहे हैं कि ऐसे पर्यटकों को ई रिक्शा के जरिये जू के गेट तक पहुंचाया जाएगा।
जू का खास आकर्षण है दरियाई घोड़े
छत्तीसगढ़ में कहीं भी दरियाई घोड़े नहीं हैं। जू के लिए दो महीने पहले ओडिशा से दरियाई घोड़े लाए गए थे। इसके एवज में यहां से तेंदुआ दिया गया। अफसरों का कहना है कि विदेशों से भी वन्य प्राणी लाने में ज्यादा दिक्कत नहीं है। वहां का वन विभाग उन वन्य प्राणियों को जो वहां ज्यादा संख्या में पाए जाते हैं, उन्हें देने में किसी तरह की तकनीकी दिक्कत पैदा नहीं करता है।
