
रायपुर । मंत्री टीएस सिंहदेव के पास स्वास्थ्य के साथ साथ पंचायत विभाग का भी प्रभार है ऐसे में संविलियन से वंचित रह गए शिक्षाकर्मियों के वेतन भत्ते, महंगाई भत्ते से लेकर संविलियन तक की जिम्मेदारी टी एस सिंहदेव के ही कांधे पर हैं और इसी जिम्मेदारी को याद दिलाते हुए शिक्षाकर्मियों ने पंचायत मंत्री के सामने अपना दुखड़ा रोया। स्वास्थ्य एवं पंचायत मंत्री टी एस सिंहदेव ने बिलासपुर प्रवास के दौरान सिम्स में स्वास्थ्य सुविधाओं का जायजा लिया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए तथा मरीजों को उनकी हर परेशानी के निवारण हेतु साथ खड़े होने का भरोसा दिलाया । फेसबुक पर इसी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए उन्होंने पोस्ट डाला और लिखा कि सुविधाओं से संपन्न हो हर जन, पूरा करेंगे जनता से किया हर वचन।
यूं तो पोस्ट स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़ा था, लेकिन स्वास्थ्य के साथ-साथ सिंहदेव के पास पंचायत का भी जिम्मा है, जो अपनी मांगों को लेकर लगातार मुखर हैं। ऐसे में महीनों से अपने वेतन की राह देख रहे और बीते ढाई साल से महंगाई भत्ता तक न पाने वाले शिक्षाकर्मियों के सब्र का बांध टूट गया। शिक्षाकर्मियों ने याद दिलाया कि चुनाव के ठीक पहले आप ही घोषणा पत्र की समिति के अध्यक्ष थे और आपने हमें भरोसा दिलाया था कि यदि शिक्षाकर्मी कांग्रेस को सत्ता की चाबी सौंपते है तो जो शिक्षाकर्मी रमन शासन की फूट डालो और शासन करो की नीति के चलते संविलियन से वंचित रह गए हैं उन सभी का सरकार आते ही संविलियन कर दिया जाएगा। कांग्रेस के घोषणा पत्र में 2 वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुके शिक्षाकर्मियों के संविलियन का मुद्दा शिक्षाकर्मियों के विषय में सबसे अहम और सबसे प्रमुख मुद्दा था । जिन शिक्षाकर्मियों को भाजपा सरकार से संविलियन की सौगात नहीं मिली थी वही पिछली सरकार से सबसे अधिक नाराज थे और उन्होंने ही बढ़ चढ़ का कांग्रेस का साथ दिया इसके बाद कई मौकों पर पंचायत मंत्री और स्कूल शिक्षा मंत्री ने उनके संविलियन की बात भी कही और बजट सत्र में तो शिक्षाकर्मियों के संविलियन की उम्मीद सभी को थी लेकिन बावजूद इसके शिक्षाकर्मियों के संविलियन के विषय में कोई निर्णय नहीं लिया गया । अब हालत यह है कि कई जिलों में तीन तीन चार चार महीने से शिक्षाकर्मियों को वेतन ही नहीं मिल रहा है क्योंकि 8 वर्ष से कम सेवा अवधि वाले शिक्षाकर्मी आबंटन पर निर्भर है । हालत यह है कि एक ही स्कूल में सेवा देने वाले नियमित शिक्षक और शिक्षक (एलबी) को माह की 1 तारीख को ही वेतन मिल जाता है वही शिक्षाकर्मी कई कई माह से अपने वेतन की राह ताकते बैठे रहते हैं । शिक्षाकर्मी लगातार सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी मांग सरकार तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं बावजूद इसके उन्हें कोई सफलता मिलते हुए दिखाई नहीं दे रही। यही कारण है कि जब आज पंचायत मंत्री ने जनता से किए गए सभी वादों को पूरा करने की बात लिखी तो शिक्षाकर्मी खुद को रोक नहीं पाए और उनका दर्द शब्द बनकर मंत्री जी के फेसबुक पोस्ट पर नजर आने लगा अब देखना होगा कि पंचायत मंत्री उनके इस कमेंट को किस प्रकार लेते हैं और क्या पंचायत विभाग में रह गए शिक्षाकर्मियों के हित में मंत्री जी वैसा ही कुछ निर्णय लेते हैं जैसा अभी फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की दशा सुधारने के लिए उनके द्वारा लगातार निर्णय लिया जा रहा है।
