बिलासपुर । सिम्स में आगजनी की घटना के बाद 18 साल से जमे सात डॉक्टरों का प्रदेश के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में तबादला कर दिया गया है। इनमें से छह एचओडी हैं। वहीं इनकी जगह एक प्राध्यापक व दो सहायक प्राध्यापक को भेजा गया है।
सिम्स में 22 जनवरी को आगजनी की घटना के बाद एनआइसीयू में गंभीर हालत में भर्ती नवजातों को हटना पड़ा था। बाद में इसमें से पांच की मौत हो गई। घटना में सिम्स की अव्यवस्था सबसे सामने आ गई। मंत्री से लेकर अधिकारियों के निरीक्षण में जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही को घटना का प्रमुख कारण माना गया। इसके बाद मंगलवार को चिकित्सा शिक्षा विभाग ने सिम्स के सात डॉक्टरों का तबादला आदेश जारी कर दिया। इसमें से चार सीनियर डॉक्टर सालों से यहां जमे हुए हैं। इनमें पास सिम्स के संचालन से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। इसमें माइक्रोबायोलाजी डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ. रमणेश मूर्ति, अस्पताल अधीक्षक डॉ. बीपी सिंह, मेडिसीन डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ. लखन सिंह और दंत रोग विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. भूपेंद्र कश्यप शामिल हैं।
इसके अलावा एनस्थीसिया डिपार्टमेंट की एचओडी डॉ. मधुमिता मूर्ति, रेडियोलॉजी डिपार्टमेंट की एचओडी डॉ. अर्चना सिंह और कम्युनिटी मेडिसिन डिपार्टमेंट की एचओडी डॉ. हेमलता ठाकुर का नाम शामिल है। इनके स्थान पर जगदलपुर मेडिकल कॉलेज के प्राध्यापक डॉ. अविनाश मेश्राम, रायपुर मेडिकल कॉलेज के सहायक प्राध्यापक डॉ. उल्लास गोन्नाडे और सहायक प्राध्यापक डॉ. रेखा बारापात्रे को सिम्स भेजा गया है।
कहां भेजे गए डॉक्टर
– डॉ. रमणेश मूर्ति अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज
– डॉ. मधुमिता मूर्ति अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज
– डॉ. बीपी सिंह जगदलपुर मेडिकल कॉलेज
– डॉ. अर्चना सिंह जगदलपुर मेडिकल कॉलेज
– डॉ. लखन सिंह अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज
– डॉ. हेमलता सिंह अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज
– डॉ. भूपेंद्र कश्यप जगदलपुर मेडिकल कॉलेज
ये भी है वजह
– व्यवस्था संभालने में जिम्मेदार अधिकारी नाकाम रहे।
– तमाम संसाधन के बाद भी लोगों का उपचार से वंचित होना।
– शासन को आए दिन सिम्स प्रबंधन की शिकायत मिल रही थी।
– सिम्स में गुटबाजी के कारण कामकाज प्रभावित होना।
– लापरवाह अधिकारी-कर्मचारियों पर कार्रवाई न करना।
– शिकायतों की जांच के नाम पर खानापूर्ति।
हाईकोर्ट के निर्देश का भी पालन नहीं किया गया।
प्रशासनिक कार्यों के साथ इलाज पर पड़ा असर
इस तबादले का सिम्स के प्रशासन के साथ चिकित्सकीय व्यवस्था पर असर पड़ेगा। ट्रांसफर सूची में शहर के कुछ वरिष्ठ डॉक्टरों का नाम शामिल है। इन्हें सालों का अनुभव है। इनके जाने से मेडिकल कॉलेज में अध्यापन कार्य और पैथोलाजी व माइक्रोबायोलाजी का काम प्रभावित होगा। वहीं डॉ. लखन सिंह के जाने का सीधा असर मरीजों पर पड़ेगा। अब मेडिसीन डिपार्टमेंट का पूरा जिम्मा डॉ. पंकज टेम्भुर्णीकर पर आएगा। दोनों डॉक्टर ओपीडी में हर दिन 300 से 400 मरीजों को देखते थे।
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