Close Menu
Panchayat Tantra 24
  • Home
  • संपादकीय
    • रायपुर
    • दुर्ग
    • बस्तर
    • बिलासपुर
    • सरगुजा
  • राष्ट्रीय
    • दिल्ली
    • छत्तीसगढ़
    • मध्य प्रदेश
  • अंतरराष्ट्रीय
  • एंटरटेनमेंट
  • खेल
  • धर्म आध्यात्म
  • बिज़नेस
  • Contact Us

Subscribe to Updates

Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

What's Hot

कचरे से कंचन बनाने की राह पर कोतरी, बिहान की दीदियों ने संभाली स्वच्छता की कमान

September 25, 2026

मिनीमाता महतारी जतन योजना: रेजा मजदूरी से बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की राह पर सुनीता

September 25, 2026

कॉलेज और आईटीआई में पहुंचा परिवहन विभाग, 8 दिनों में 178 विद्यार्थियों को मिला लर्निंग लाइसेंस

September 25, 2026
Facebook X (Twitter) Instagram
Friday, September 25
  • Home
  • Privacy Policy
  • Terms and Conditions
  • Contact Us
Panchayat Tantra 24
  • Home
  • संपादकीय
    • रायपुर
    • दुर्ग
    • बस्तर
    • बिलासपुर
    • सरगुजा
  • राष्ट्रीय
    • दिल्ली
    • छत्तीसगढ़
    • मध्य प्रदेश
  • अंतरराष्ट्रीय
  • एंटरटेनमेंट
  • खेल
  • धर्म आध्यात्म
  • बिज़नेस
  • Contact Us
Panchayat Tantra 24
Home » मंगलवार के दिन इस तरह करें हनुमान चालीसा का पाठ, बजरंग बली होंगे प्रसन्न
धर्म आध्यात्म

मंगलवार के दिन इस तरह करें हनुमान चालीसा का पाठ, बजरंग बली होंगे प्रसन्न

adminBy adminDecember 26, 2023No Comments3 Mins Read
Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email
Share
WhatsApp Telegram Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email Copy Link

PT – सनातन धर्म में हर दिन देवी-देवताओं की पूजा के लिए समर्पित माने गए हैं। मंगलवार के दिन हनुमान जी का व्रत और पूजा करने की परंपरा है। इस दिन हनुमान जी की विधिवत पूजा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। माना जाता है कि मंगलवार के दिन हनुमान जी की पूजा करने से मंगल दोष से मुक्ति मिलती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मंगलवार की पूजा के दौरान हनुमान चालीसा का पाठ करने या सुनने से साधक के सभी बिगड़े काम बनते हैं। हनुमान चालीसा का पाठ पूरे श्रद्धा-भाव के साथ करना चाहिए। ऐसा करने से हनुमान जी प्रसन्न होते हैं।

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निजमन मुकुरु सुधारि। बरनउं रघुबर बिमल जसु, जो दायक फल चारि।।

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।

चौपाई

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।

राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।

महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी।।

कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुण्डल कुँचित केसा।।

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजे। कांधे मूंज जनेउ साजे।।

शंकर सुवन केसरी नंदन। तेज प्रताप महा जग वंदन।।

बिद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर।।

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया।।

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा।।

भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचन्द्र के काज संवारे।।

लाय सजीवन लखन जियाये। श्री रघुबीर हरषि उर लाये।।

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं।।

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा।।

जम कुबेर दिगपाल जहां ते। कबि कोबिद कहि सके कहां ते।।

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा।।

तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना। लंकेश्वर भए सब जग जाना।।

जुग सहस्र जोजन पर भानु। लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।।

दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।

राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।

सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रच्छक काहू को डर ना।।

आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हांक तें कांपै।।

भूत पिसाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै।।

नासै रोग हरे सब पीरा। जपत निरन्तर हनुमत बीरा।।

संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।

सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा।।

और मनोरथ जो कोई लावै। सोई अमित जीवन फल पावै।।

चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा।।

साधु संत के तुम रखवारे।। असुर निकन्दन राम दुलारे।।

अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता।।

राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा।।

तुह्मरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दुख बिसरावै।।

अंत काल रघुबर पुर जाई। जहां जन्म हरिभक्त कहाई।।

और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।।

सङ्कट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।

जय जय जय हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।

जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बन्दि महा सुख होई।।

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा।।

तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय महं डेरा।।

दोहा

पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।

राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।

Share. WhatsApp Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Copy Link Telegram Email
admin
  • Website

Related Posts

माघ गुप्त नवरात्रि 2026 में….. घटस्थापना मुहूर्त.

January 6, 2026

जनवरी में एकादशी कब-कब ? नोट करें षटतिला और जया एकादशी की डेट

January 4, 2026

अधूरी मनोकामना पूरी करने के लिए आज है खास दिन, जानें सफला एकादशी का मुहूर्त

December 14, 2025
Advertisement
× Popup Image


RO No. 13728/1

Recent Posts

  • कचरे से कंचन बनाने की राह पर कोतरी, बिहान की दीदियों ने संभाली स्वच्छता की कमान
  • मिनीमाता महतारी जतन योजना: रेजा मजदूरी से बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की राह पर सुनीता
  • कॉलेज और आईटीआई में पहुंचा परिवहन विभाग, 8 दिनों में 178 विद्यार्थियों को मिला लर्निंग लाइसेंस
  • वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर किया श्रद्धापूर्वक नमन
  • वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने अनंत चतुर्दशी पर प्रदेशवासियों को दी हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं

Recent Comments

No comments to show.

 

Panchayat Tantra 24

panchayattantra24.com एक ऐसा न्यूज बेबसाईट है, जिसके माध्यम से विभिन्न दैनिक समाचार पत्र एवं अन्य पत्रिका को समाचार एवं फोटो फीचर की सेवायें न्यूनतम शुल्क में प्रदान किया जाता है। साथ ही लिंक के द्वारा भी अन्य पाठकों को फेसबुक, व्हाट्सएप, यूट्यूब व अन्य संचार माध्यम से प्रतिदिन समय-समय पर न्यूज भेजा जाता है।

Email Us: panchayattantra24@gmail.com
Contact: +91 7000291426

Categories

  • Uncategorized
  • अंतरराष्ट्रीय
  • एंटरटेनमेंट
  • खेल
  • छत्तीसगढ़
  • दिल्ली
  • दुर्ग
  • धर्म आध्यात्म
  • बस्तर
  • बिज़नेस
  • बिलासपुर
  • मध्य प्रदेश
  • रायपुर
  • राष्ट्रीय
  • संपादकीय
  • सरगुजा

Contact Details

Owner and Editor
Kanya Kumari pandey

Mobile No.
7000291426

Address
Subhas Nagar Near Jal Vihar Colony Raipur Chhatisgarh

© 2026 Designed by RT Internet Services.
  • Home
  • Privacy Policy
  • Terms and Conditions
  • Contact Us

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.