panchayattantra24.-बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने न्यायिक अनुशासन और आदेशों की अवहेलना को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए रायगढ़ फैमिली कोर्ट द्वारा पारित आदेशों को निरस्त कर दिया है। न्यायमूर्ति बिभु दत्त गुरु की एकल पीठ ने इस बात पर गंभीर आपत्ति जताई कि 10 मार्च 2026 को हाईकोर्ट द्वारा सिविल सूट की कार्यवाही पर रोक लगाए जाने के बावजूद, निचली अदालत के पीठासीन अधिकारी ने उसी दिन और 12 मार्च को न केवल सुनवाई जारी रखी, बल्कि भरण-पोषण जैसे विषयों पर आदेश भी पारित किए।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब उच्च न्यायालय किसी कार्यवाही पर रोक लगा देता है, तो निचली अदालत अधिकार विहीन हो जाती है और उसे आगे की कार्यवाही का कोई कानूनी अधिकार नहीं रहता। इस मामले में याचिकाकर्ता ने कोर्ट स्टाफ और प्रतिवादी के बीच मिलीभगत का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष सुनवाई पर संदेह जताया था और केस को स्थानांतरित करने की मांग की थी।
हालांकि, संबंधित अधिकारी के तबादले के कारण ट्रांसफर याचिका को तो निराकृत कर दिया गया, लेकिन हाईकोर्ट ने आदेशों की अनदेखी को गंभीरता से लेते हुए रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया है कि संबंधित पीठासीन अधिकारी से 15 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण लिया जाए। यह रिपोर्ट मुख्य न्यायाधीश के समक्ष प्रशासनिक स्तर पर प्रस्तुत की जाएगी ताकि भविष्य में उच्च न्यायालय के आदेशों की गरिमा सुनिश्चित की जा सके।
Subscribe to Updates
Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.
