panchayattantra24.-रायपुर। छत्तीसगढ़ के अनुसूचित जनजातिय क्षेत्र में पंचायत अनुसूचित क्षेत्र विस्तार अधिनियम (पेसा) और वन अधिकार अधिनियम के तहत समन्वय से वनवासियों के हित में साझा जल-जंगल के बेहतर प्रबंधन से कार्य किया जाएगा। इस संबंध में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में पेसा और एफआरए टास्क फोर्स समिति की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में जल, जंगल, जमीन के संसाधनों का बेहतर प्रबंधन छत्तीसगढ़ राज्य हो तथा वनवासियों के लिए योजनाओं का क्रियान्वयन हो इस संबंध में मुख्य सचिव ने विभागाीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए है। उन्होंने कहा कि सभी पात्र व्यक्तियों को वन अधिकार अधिनियमों के अनुसार वन संसाधन अधिकार पत्र दिए जायें। बैठक में वन अधिकार अधिनियम और पेसा कानून के क्रियान्वयन के संबंध में मुख्य सचिव ने अधिकारियों को दिशा निर्देश दिए।
टास्क फोर्स की बैठक में छत्तीसगढ़ पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) नियम, प्रावधान एवं क्रियान्वन की स्थिति की जानकारी प्रस्तुत की गई। इसी तरह से वन अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत राज्य में प्राप्त निराकृत एवं लंबित दावों, आवेदनों की स्थिति की समीक्षा की गई। बैठक में सामुदायिक वन संसाधनों के संरक्षण एवं प्रबंधन के अधिकारों की मान्यता में हुई प्रगति तथा वन ग्रामों के राजस्व ग्रामों में संपरिवर्तन की प्रगति की जानकारी विभागीय अधिकारियों ने दी।
बैठक में अनुसूचित जनजाति और अन्य परम्परागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियमों के क्रियान्वयन की जानकारी का प्रस्तुतीकरण किया गया। इसी तरह से पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ पेसा नियम के क्रियान्वयन के संबंध में भी प्रस्तुतिकरण दिया गया।
बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा, पीसीसीएफ अरूण पाण्डेय, आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी सहित वन विभाग के अन्य अधिकारी शामिल हुए। बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंस से विभिन्न जिलों के कलेक्टर एवं अन्य अधिकारी शामिल हुए।
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