panchayattantra24.- सुकमा। बरसात की रातें और घने जंगलों से घिरा सुकमा का कच्चा रास्ताकृयह सिर्फ एक सफर नहीं, बल्कि रोज की एक चुनौती थी। छिंदगढ़ विकासखंड के पुसपाल से चितलनार मार्ग पर सूरज ढलते ही सन्नाटा और गहरा अंधेरा पसर जाता था। लगभग 450 की आबादी वाले कोकावाड़ा(जांगड़पाल) गांव के लोगों के लिए रात के समय बाहर निकलना जान जोखिम में डालने जैसा था। न तो कोई रोशनी का जरिया, न पक्का सहारा; लोग गाड़ियों की हल्की हेडलाइट या हाथ में थामी टॉर्च की मद्धम लौ के भरोसे जहरीले सांप-बिच्छुओं के डर के बीच कदम बढ़ाने को मजबूर थे।
वर्षों से इस खौफ को रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा मान चुके ग्रामीणों की उम्मीद को तब नया मोड़ मिला, जब गांव के युवा रितेश यादव को मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के बारे में पता चला। बिना किसी दफ्तर के चक्कर काटे, रितेश ने महज एक फोन कॉल से अपनी और पूरे गांव की यह पीड़ा प्रशासन तक पहुंचाई। उन्होंने बताया कि अंधेरे में डूबा यह रास्ता किस तरह बच्चों, बुजुर्गों और आपात स्थिति में मरीजों के लिए आफत बन जाता है।
शिकायत दर्ज होते ही जिला प्रशासन ने स्ट्रीटलाइट लगाने का कार्य शुरू किया। कलेक्टर श्री अमित कुमार की सीधी निगरानी में तय समय सीमा के भीतर काम शुरू हुआ और किसी को यकीन नहीं था कि जिस समस्या से वे वर्षों से जूझ रहे थे, उसका हल महज एक सप्ताह में निकल आएगा। सात दिनों के भीतर सड़क के खंभों पर स्ट्रीट लाइटें लग गईं और पूरा मार्ग दूधिया रोशनी से जगमगा उठा। प्रशासनिक सक्रियता ने यह साबित कर दिया कि सुशासन में गांव की दूरी नहीं, ग्रामीणों की समस्या का समाधान मायने रखता है।
अब जब शाम ढलती है, तो पुसपाल-चितलनार मार्ग पर डर का अंधेरा नहीं, बल्कि राहत और सुरक्षा की चमक दिखाई देती है। रात के समय सुरक्षित सफर करते ग्रामीणों के चेहरे पर राहत साफ पढ़ी जा सकती है। अपने गांव को रौशन देख रितेश यादव और समस्त ग्रामवासियों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और जिला प्रशासन का आभार जताते हुए कहा कि यह सिर्फ लाइटें नहीं लगी हैं, बल्कि नक्सल प्रभावित क्षेत्र के अंतिम छोर तक सरकार के भरोसे और विकास की नई किरण पहुंची है।
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