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रायपुर । छत्तीसगढ़ के अंतरराष्ट्रीय ख्याति अर्जित कलाकार दीपक तिवारी (विराट) और लोक नाट्य में योगदान के लिए राकेश तिवारी को दिल्ली में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा संगीत नाट्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किए जाने पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ट्वीट कर बधाई दी है।
सीएम बघेल ने ट्वीट कर कहा, छत्तीसगढ़ी लोक नाट्य में योगदान हेतु रायपुर के राकेश तिवारी और अभिनय के क्षेत्र में योगदान के लिए राजनांदगांव के दीपक तिवारी को राष्ट्रपति महोदय द्वारा संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिलने पर बहुत बहुत बधाई।
राष्ट्र पटल पर छत्तीसगढ़ का पताका यूं ही फहराता रहे, अनंत शुभकामनाएं।

रायपुर । रामकुंड इलाके से मंगलवार को लापता हुए दो छात्रों में से एक का शव तालाब में मिला। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर कासव तालाब पहुंची और शव को बाहर निकलवाया। इसके बाद तालाब के पानी में खोजबीन शुरू हुई तो दूसरे बच्चे की लाश भी मिल गई। दोनों के अपहरण की रिपोर्ट आजाद चौक थाने में दर्ज करवाई गई थी।
जानकारी के मुताबिक रामकुंड के स्व. संतोष यादव के पुत्र जयकिशन (आठ) मायाराम सुरजन स्कूल में कक्षा तीसरी में पढ़ता था। वहीं स्व. बलराम ध्रुव का पुत्र मोनू ध्रुव (आठ) भी मंगलबाजार स्थित रामकृष्ण विद्यालय में तीसरी का छात्र था।
दोनों बच्चे स्कूल न जाकर मोहल्ले में खेल रहे थे। चूंकि मोहल्ले में भागवत कथा चल रही है, इससे परिजनों को लगा कि बच्चे यहीं कहीं होंगे। दोनों बच्चों को अंतिम बार मंगलवार दोपहर 12 बजे देखा गया था, उसके बाद से वे लापता थे। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है।

रायपुर । आम उपभोक्ताओं की दाल-रोटी पर फिर से महंगाई का साया पड़ने लगा है। पिछले कई महीनों से लगातार स्थिर रहने वाली दालों की कीमतों में तेजी आने लगी है। विशेषकर राहर व मूंग दालों की कीमतों में तो ज्यादा ही तेजी आ गई है। अनाज मार्केट में इसका असर दिखने लगा है। थोक बाजार में राहर दाल इन दिनों 600 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी के साथ 6800 से 8200 रुपये प्रति क्विंटल बिक रही है। इसी प्रकार मूंग दाल छिलके व धुली दोनों में 400 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी है। मूंग दाल (धुली) 7000-8000 रुपये प्रति क्विंटल तथा मूंग दाल (छिलका) 6500-7200 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है।
चिल्हर बाजार में राहर दाल की कीमतों में आठ रुपये किलो तथा मूंग दाल में पांच रुपये किलो की तेजी आ गई है। व्यापारिक सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में इनकी कीमतों में और तेजी के ही संकेत बने हुए हैं। इसका प्रमुख कारण तो यही है कि पुरानी राहर दाल लगभग खत्म होने को है तथा नई राहर आ रही है जिसमें फसल काफी कमजोर बताया जा रहा है।
इसके साथ ही बाजार में डिमांड भी बढ़ने लगी है। बताया जा रहा है कि राहर तथा मूंग दालों में तेजी का असर दूसरे दालों में भी दिखने लगा है। आने वाले दिनों में इनमें और तेजी के आसार बने हुए हैं। दालों के साथ ही गेहूं की कीमतों में भी 200 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आ गई है। यह 2600 से 3800 रुपये प्रति क्विंटल बिक रही है। कारोबारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में अब और तेजी के ही संकेत बन रहे हैं।
काबुली चना भी 800 रुपये क्विंटल महंगा
दालों व गेहूं के साथ ही काबुली चना की कीमतों में भी जबरदस्त बढ़ोतरी हो गई है। थोक मार्केट में काबुली चना के दाम 800 रुपये क्विंटल से बढ़कर 6000 से 8000 रुपये प्रति क्विंटल हो गए हैं। चिल्हर में ये 10 रुपये किलो तक बढ़ गए हैं।
आटा-सुजी के भी दाम बढ़े
गेहूं की कीमतों में आई तेजी के कारण इन दिनों आटा-सुजी के दाम भी बढ़ गए हैं। ब्रांडेड कंपनियों की आटे की पैकेट की कीमतों में भी पांच रुपये (प्रति पांच किलो) का इजाफा हुआ है। कारोबारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इनकी कीमतों में थोड़ी और बढ़ोतरी हो सकती है।
खाद्य तेल स्थिर
बाजार में कमजोर लिवाली के चलते खाद्य तेलों की कीमतों में स्थिरता बनी हुई है। कारोबारियों का कहना है कि खाद्य तेलों में अभी किसी भी प्रकार से तेजी के आसार नहीं है। बाजार में लिवाली कमजोर है।

रायपुर । कभी छत्तीसगढ़ के सुपर सीएम कहे जाने वाले पूर्व इंडियन रिवेन्यू सर्विसेज (आईआरएस) अधिकारी अमन सिंह अब ईओडब्ल्यू जांच की जद में आ गए हैं। राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री कार्यालय से मिले शिकायती पत्र के आधार पर यह जांच कराने का निर्णय लिया है।
सामान्य प्रशासन विभाग ने आईजी ईओडब्ल्यू को इस जांच के बाबत आदेश जारी कर दिया है। अमन सिंह राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के प्रमुख सचिव पद पर पदस्थ थे।
सामान्य प्रशासन विभाग से जारी आदेश में ईओडब्ल्यू से कहा गया है कि 16 जनवरी को प्रधानमंत्री कार्यालय से प्राप्त पत्र, जिसमें शिकायतकर्ता विजया मिश्रा ने अमन सिंह के खिलाफ आरोप लगाया हैं, की जांच सुनिश्चित की जाए।
पत्र में कहा गया है कि पीएमओ में हुई शिकायतों के संबंध में अब तक कोई जांच नहीं कराई गई थी, इसलिये राज्य शासन ने यह निर्णय लिया है कि शिकायत की जांच एसआइटी गठित कर राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो द्वारा की जाए। राज्य शासन ने ईओडब्ल्यू को निर्देशित किया है कि ब्यूरो द्वारा जांच कार्यवाही करते हुए राज्य शासन को अवगत कराया जाए।
यह है सिंह के खिलाफ शिकायत
गौरतलब है कि दिल्ली की द्वारका में रहने वाली विजया मिश्रा ने चार जनवरी 2019 को प्रधानमंत्री कार्यालय में इमेल के जरिए सिंह के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में मिश्रा ने कहा है कि आईआरएस से वीआरएस लेने के बाद सिंह ने संविदा नियुक्ति के दौरान यह तथ्य छिपाया था कि उनके खिलाफ किसी भी तरह की जांच पेंडिंग नहीं है।
जबकि छत्तीसगढ़ में डेपुटेशन से पहले 2001-2002 में कस्टम एंड सेंट्रल एक्साइज डिपार्टमेंट में बंगलुरू में डिप्टी कमिश्नर रहते हुए उनके खिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़े एक मामले में जांच की गई थी। भ्रष्टाचार की शिकायत के बाद उन्हें सीबीआइ जांच से गुजरना पड़ा था। कस्टम एंड सेंट्रल एक्साइज के डीजी विजिलेंस ने सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों के तहत चार्जशीट जारी किया था।

रायपुर । भाजपा नेताओं ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बीजेपी ने कांग्रेस पर बदलापुर की राजनीति का आरोप लगाया है। इसको लेकर बुधवार को बीजेपी के शीर्ष नेताओं ने धरना दिया। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष धरमलाल कौशिक, पूर्व मंत्री राजेश मूणत, सहित कई नेता धरने पर बैठे। इस मौके पर धरमलाल कौशिक ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस भाजपा के कार्यकर्ताओ को डराने का काम कर रही है। उन्होंने सवाल खड़ा करते हुए कहा कि अंतागढ़ टेप कांड में देर रात मूणत के खिलाफ FIR करने की ज़रूरत क्यों पड़ी।
कौशिक ने कहा कि कि कॉंग्रेस के खिलाफ ये लड़ाई सड़क से सदन तक चलेगी। वहीं मूणत ने कहा ऐसी कौनसी परिस्थिति बन गई कि एसआईटी के इंचार्ज को हटाना पड़ा। देर रात मेरे नाम से एफआईआर करानी पड़ी।  मूणत ने कहा कि यदि एसआईटी गठित करने ही है, तो भुपेश बघेल और पीएल पुनिया की जो सीडी जारी हुई थी, उसपर भी एसआईटी गठित की जाए।

रायपुर । छत्तीसगढ़ सरकार ने पहले की रमन सरकार में नियुक्त किये गए चार निगम-आयोगों के अध्यक्षों के कैबिनेट मंत्री के दर्जे को वापस ले लिया है। जानकारी के मुताबिक जिन निगम-आयोगों के अध्यक्षों के मंत्री पद के दर्जे को वापस लिया गया है उनमें दुग्ध महासंघ के अध्यक्ष रसिक परमार, मार्कफेड के अध्यक्ष राधाकृष्ण गुप्ता, बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रभा दुबे और मत्स्य महासंघ के अध्यक्ष रामकृष्ण धीवर का नाम शामिल है ।

रायपुर। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने लोकसभा सीट जीताने की जिम्मेदारी अपने मंत्रियों को सौंप दी है। मंत्रियों के बीच जिलों का बंटवारा इस तरह से किया कि हर मंत्री को एक-एक लोकसभा सीट जिताने की जिम्मेदारी दी जा सके। मुख्यमंत्री ने सभी मंत्रियों से कहा है कि वे लोकसभा चुनाव को देखते हुए अपने-अपने लोकसभा सीटों पर तत्काल फोकस करना शुरू कर दें। राज्य में मुख्यमंत्री को छोड़कर 11 मंत्री हैं और इतनी ही लोकसभा की सीटें।
सरगुजा संभाग के पांच में से तीन जिलों का प्रभार मंत्री टीएस सिंहदेव को देकर सरगुजा लोकसभा सीट के लिए उनकी जिम्मेदारी तय की गई है। इसी संभाग से डॉ. प्रेमसाय सिंह भी मंत्री हैं। उन्हें भी एक लोकसभा सीट देनी थी, तो मुख्यमंत्री ने उन्हें जांजगीर-चांपा जिले का प्रभारी बना दिया।
मंत्री ताम्रध्वज साहू दुर्ग लोकसभा सीट के सांसद थे। मंत्री बनने के बाद उन्होंने सांसद पद से इस्तीफा दिया है। अब दुर्ग लोकसभा सीट साहू के हवाले कर दिया गया है। मंत्री मोहम्मद अकबर कवर्धा के साथ ही राजनांदगांव जिले का भी प्रभारी बनाकर राजनांदगांव लोकसभा सीट का जिम्मा दिया है।
दुर्ग संभाग से तीसरे मंत्री रविंद्र चौबे को बिलासपुर व मुंगेली जिले का प्रभारी बनाया, ताकि बिलासपुर लोकसभा सीट का दायित्व उन्हें दिया जा सके। दुर्ग संभाग के ही चौथे मंत्री गुरु स्र्द्र कुमार को भी रायपुर संभाग के जिलों का प्रभार देना पड़ा है। उन्हें रायपुर संभाग के तीन जिले महासमुंद, गरियाबंद, धमतरी का प्रभारी बनाया है, जिसमें महासमुंद लोकसभा सीट भी है।
दुर्ग संभाग की पांचवीं मंत्री अनिला भेंड़िया हैं। उन्हें दुर्ग संभाग के एक जिले बालोद और बस्तर संभाग के एक जिले कांकेर का प्रभारी बनाया है। इन दो जिलों में एक कांकेर लोकसभा सीट है। कवासी लखमा बस्तर संभाग के पांच जिलों के साथ बस्तर लोकसभा सीट की जिम्मेदारी दी गई है।
मंत्री जयसिंह अग्रवाल कोरबा के विधायक हैं, इसलिए उन्हें कोरबा जिले का प्रभार देकर कोरबा लोकसभा सीट की भी जिम्मेदारी दे दी है। मंत्री उमेश पटेल रायगढ़ जिले के खरसिया विधानसभा सीट के विधायक हैं, तो उन्हें रायगढ़ लोकसभा सीट की जिम्मेदारी दी गई है। बघेल मंत्रिमंडल में रायपुर संभाग से डॉ. शिवकुमार डहरिया अकेले मंत्री हैं, इस कारण उन्हें रायपुर का प्रभारी बनाकर रायपुर लोकसभा सीट को संभालने के लिए कहा है।

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मंगलवार को अपने मंत्रिमंडल के सभी 11 मंत्रियों में 27 जिलों का बंटवारा करके उन्हें प्रभारी बना दिया। मंत्री कवासी लखमा को सबसे ज्यादा बस्तर संभाग के सात में से छह जिलों का प्रभार दिया गया है।
वहीं, मंत्री टीएस सिंहदेव को सरगुजा संभाग के पांच में से तीन जिले सरगुजा, बलरामपुर व सूरजपुर की जिम्मेदारी दी गई है। बाकी दो जिले कोरिया व जशपुर दो मंत्रियों को अलग-अलग मिले हैं। मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया को रायपुर के साथ बलौदाबाजार-भाटापारा का प्रभारी बनाया गया है।
मुख्यमंत्री बघेल ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद किस मंत्री को कौन से जिले का प्रभारी बनाया, इस पर मंथन किया। शाम को सूची जारी की गई। मुख्यमंत्री ने ज्यादातर मंत्रियों को उनके ही जिले का प्रभार दिया और आसपास के जिले भी उन्हें दिए गए हैं। हालांकि, इस कवायद में सरगुजा और दुर्ग संभाग के तीन मंत्रियों डॉ. प्रेमसाय सिंह, रविंद्र चौबे और गुरु स्र्द्र कुमार को उनके क्षेत्र का जिला नहीं मिल पाया है।
मंत्री-जिला प्रभार
टीएस सिंहदेव-सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर
रविंद्र चौबे-बिलासपुर, मुंगेली
डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम-जांजगीर
डॉ. शिवकुमार डहरिया-रायपुर, बलौदाबाजार-भाटापारा
मोहम्मद अकबर-कवर्धा, राजनांदगांव
ताम्रध्वज साहू-दुर्ग, बेमेतरा
कवासी लखमा-बस्तर, नारायणपुर, बीजापुर, सुकमा, कोंडागांव, दंतेवाड़ा
जयसिंह अग्रवाल-कोरबा, कोरिया
उमेश पटेल-रायगढ़, जशपुर
गुस्र् स्र्द्र कुमार-महासमुंद, धमतरी, गरियाबंद
अनिला भेंड़िया-कांकेर, बालोद

लोरमी। भाजपा नेता ने गुड़ फैक्टरी में पांच नाबालिग लड़की सहित 11 बैगा मजदूरों को बंधक बना लिया था। परिजन ने इसकी सूचना चिल्फी चौकी को दी। इस पर एसडीओपी तेजराम पटेल, नायब तहसीलदार मुकेश देवागंन, लेबर इंस्पेक्टर जीआर आर्मो मौके पर पहुंचे और सभी मजदूरों को मुक्त कराया। लोरमी क्षेत्र के ग्राम गोल्हापारा में शत्रुहन साहू गुड़ फैक्टरी चलाता है।
काम की अधिकता को देखते हुए उसने बिजराकछार पंचायत के पांच नाबालिग लड़कियों सहित 11 बैगा मजदूरों को काम कराने के लिए एक माह पहले लेकर आया था। उनसे प्रतिदिन बेतहाशा काम कराया जा रहा था। बैगा बच्चों से परिजन मिलने के लिए आते थे, लेकिन उन्हें मिलने नहीं देता था।
न तो देता था और न ही ढंग से भोजन देता था। लड़कियां काफी परेशान थीं। छुड़ाने के बाद उनका और बैगा श्रमिकों का स्वस्थ्य परीक्षण कराया गया। संचालक के खिलाफ लेबर इंस्पेक्टर आर्मों कार्रवाई कर रहे हैं।

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार पहली से पांचवीं तक सरकारी स्कूलों के बच्चों को अब न सिर्फ किताबें, बल्कि निजी स्कूलों की तर्ज पर सरकारी नोटबुक (कॉपियां) भी देगी। छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम के प्रॉफिट फंड से कार्पोरेट सोशल रिस्पांसबिलिटी के तौर पर 22 लाख बच्चों के लिए नोटबुक तैयार कराई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी स्कूल में ज्यादातर बीपीएल परिवार के बच्चे पढ़ते हैं। उनके लिए किताबें तो मुफ्त में मिल जाती हैं पर कॉपियां नहीं मिलतीं। ऐसे बच्चों के लिए यह योजना वरदान साबित होगी।
सीखने और सिखाने का पैमाना पहले ही तय
सरकारी स्कूलों में बच्चों के पढ़ने-पढ़ाने और सिखाने का पैमाना सरकार ने पहले ही फिक्स कर दिया है। इसके मुताबिक पहली के बच्चे को कम से कम गणित में 20 तक गिनती और जोड़, घटाने की प्रक्रिया आनी चाहिए। 20 तक गिनती के बीच में वह कौन बड़ी संख्या और कौन छोटी संख्या है, यह तय कर पा रहा है तो उसका लर्निंग आउटकम ठीक है। 01 से 20 तक गिनती सीखना पर्याप्त है। इसी तरह कक्षा दूसरी के बच्चे को 99 तक गिनती लिखना, पढ़ना आना चाहिए , साथ ही रुपए, सिक्के, शेप्स की जानकारी हो जाए तो उसे अधिक पढ़ाने की जरूरत नहीं होगी। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने कक्षा और उम्र के आधार पर बच्चों में लिखने, पढ़ने, समझने और बोलने की क्षमता को परखने का आधार तय कर दिया है। उसके हिसाब से ही नोटबुक बनाई जा रही है।
ये मिलेगा फायदा
नोटबुक इस तरह से डिजाइन की गई है कि इसमें शिक्षक किसी एक कक्षा के विभिन्न् लर्निंग आउटकम पर काम करने के बाद उन पर अलग-अलग तरीके से अभ्यास करा सकेंगे। यह सामग्री इस प्रकार से तैयार की गई है कि शिक्षक किसी एक कक्षा के विभिन्न् लर्निंग आउटकम पर कार्य करने के बाद उन पर अलग-अलग तरीकों से अभ्यास कराएंगे।
नोटबुक डिजाइन के लिए सौंप चुके हैं काम
नोटबुक बनाने के लिए समग्र शिक्षा विभाग के सहायक संचालक डॉ. एम सुधीश को काम दिया गया है। वे बच्चों के पढ़ने-पढ़ाने और सिखाने के पैमाने पर ही नोटबुक की डिजाइन कर रहे हैं। डॉ. सुधीश प्रदेश में शिक्षा गुणवत्ता अभियान के लिए हर साल माड्यूल तैयार कर रहे हैं। इसके आलावा नवाचार शिक्षा पर भी फोकस करते हुए गुणवत्ता के लिए काम कर रहे हैं।
राज्य सरकार बच्चों के हित में काम करने के लिए हर तरह से तैयार है। इसी कड़ी में हमने अब पाठ्यपुस्तक निगम के प्रॉफिट फंड को शिक्षा की गुणवत्ता में खर्च करने का निर्णय लिया है। इससे सरकारी स्कूलों के बच्चों को बेहतर डिजाइन और लर्निंग आउटकम की नोटबुक मिलेगी। – एस प्रकाश, संचालक लोक शिक्षण संचालक एवं एमडी पाठ्यपुस्तक निगम