रायपुर । सात लोगों की हत्या करने वाले आरोपी अरुण चंद्राकर को पुलिस ने रविवार सुबह कुकरबेड़ा के पास लोगों की मदद से पकड़ लिया। इसके बाद उसे सरस्वती थाने ले जाया गया। जानकारी के मुताबिक अरुण अपनी बेटी का जन्मदिन मनाने के लिए रायपुर आया था। 2012 में उसने सात हत्याएं की थी, इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था। मई 2018 में उसे सजा मिलने के बाद जब दुर्ग पुलिस उसे ले जा रही थी, तभी वह उन्हें चकमा देकर फरार हो गया था।
इस दौरान उसने साधू का रूप धारण कर लिया और महाराष्ट्र के गोंदिया और नागपुर सहित कई शहरों में घूमता रहा। रविवार सुबह पुलिस जैसे ही अरुण को पकड़ने पहुंची तो वह भागकर नाले में कूद गया, इसके बाद पुलिस ने भी उसे घेर लिया और लोगों की मदद अरुण को पकड़ लिया गया।
जिस पर शक होता उसे ही मार देता
मामला जनवरी 2012 में कुकुरबेड़ा से एक बच्ची की गुमशुदगी की जांच के दौरान उजागर हुआ था।पुलिस ने इस मामले में अरुण चंद्राकर को अरेस्ट किया था और उसकी निशानदेही पर अलग-अलग जगहों से दफनाए गए शवों के कंकाल जब्त किए थे। तीन हत्याओं का आरोप साबित होने पर कोर्ट ने आरोपी अरूण को पत्नी लीली चंद्राकर, साली पुष्पाद देवांगन और मकान मालिक बहादुर सिंह की हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
सीरियल किलर अरुण चंद्राकर के खिलाफ सरस्वती नगर में 3, आमानाका में 3 और दुर्ग के नंदनी थाना में 1 हत्या का मामला दर्ज है। रायपुर के सभी 6 मामलों में आजीवन कारावास की सजा हो चुकी थी। लेकिन 1 मई 2018 को दुर्ग कोर्ट में पेशी के लिए ले जाते समय पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया था।
यह सीरियल किलर नोएडा के निठारी हत्याकांड से प्रभावित था और अकसर उसी से संबंधित न्यूज टीवी पर देखता रहता था। उसे जिस पर भी शक होता था यह उसे ही मौत के घाट उतार देता था। उसे लगता था कि जब किसी को शव ही नहीं मिलेगा तो उसे कोई पकड़ेगा भी नहीं। यह बात उसने पुलिस को दिए बयान में कही थी। आरोपी ने कई लोगों को बेहोशी की हालत में जिंदा ही दफना दिया था। उसने अपने पिता को ट्रेन से धक्का दे दिया था, आरोपी ने अपने पिता, पत्नी, साली सहित कुल 7 लोगों की हत्या कर दी थी।
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