Close Menu
Panchayat Tantra 24
  • Home
  • संपादकीय
    • रायपुर
    • दुर्ग
    • बस्तर
    • बिलासपुर
    • सरगुजा
  • राष्ट्रीय
    • दिल्ली
    • छत्तीसगढ़
    • मध्य प्रदेश
  • अंतरराष्ट्रीय
  • एंटरटेनमेंट
  • खेल
  • धर्म आध्यात्म
  • बिज़नेस
  • Contact Us

Subscribe to Updates

Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

What's Hot

नवा रायपुर बनेगा इंटरनेशनल गोल्फ हब? विश्वस्तरीय कोर्स और बड़े टूर्नामेंट की तैयारी तेज

May 1, 2026

नक्सलवाद के बाद बदला गोगुण्डा का चेहरा: ‘हरा सोना’ से आय, विकास कार्यों से नई उम्मीद, अब गांव में गूंजेंगे गीत-संगीत

May 1, 2026

मिशन उत्कर्ष से रायपुर में बदली तस्वीर: बोर्ड परीक्षा परिणामों में ऐतिहासिक सुधार, सैकड़ों स्कूलों में दिखा असर

May 1, 2026
Facebook X (Twitter) Instagram
Friday, May 1
  • Home
  • Privacy Policy
  • Terms and Conditions
  • Contact Us
Panchayat Tantra 24
  • Home
  • संपादकीय
    • रायपुर
    • दुर्ग
    • बस्तर
    • बिलासपुर
    • सरगुजा
  • राष्ट्रीय
    • दिल्ली
    • छत्तीसगढ़
    • मध्य प्रदेश
  • अंतरराष्ट्रीय
  • एंटरटेनमेंट
  • खेल
  • धर्म आध्यात्म
  • बिज़नेस
  • Contact Us
Panchayat Tantra 24
Home » भारत के असम और बांग्लादेश के सिलहट क्षेत्र को लाभान्वित करेगा 54 नदियां 
संपादकीय

भारत के असम और बांग्लादेश के सिलहट क्षेत्र को लाभान्वित करेगा 54 नदियां 

adminBy adminSeptember 13, 2022No Comments7 Mins Read
Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email
Share
WhatsApp Telegram Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email Copy Link

K.W.N.S.-भारत एवं बांग्लादेश के बीच 25 वर्षों में पहली बार दोनों देशों के बीच बहने वाली नदियों के जल बंटवारे का नया अध्याय शुरू हुआ है। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी परस्पर हुई बातचीत के बाद कुशियारा नदी के संदर्भ में अंतरिम जल बंटवारा समझौते पर हस्ताक्षर हुए हैं। 1996 में गंगा नदी जल संधि के बाद इस तरह का यह पहला समझौता है। इसे अत्यंत महत्वपूर्ण समझौता माना जा रहा है। यह भारत के असम और बांग्लादेश के सिलहट क्षेत्र को लाभान्वित करेगा। 54 नदियां भारत और बांग्लादेश की सीमाओं के आरपार जाती हैं और सदियों से दोनों देशों के करोड़ों लोगों की आजीविका का मुख्य साधन बनी हुई हैं। इन नदियों के किनारों पर मानव सभ्यता के विकास के साथ सृजित हुए लोक गीत और लोक कथाएं, धर्म एवं संस्कृति की ऐसी धरोहर हैं जो मानव समुदायों को लोक कल्याण का पाठ पढ़ाने के साथ नैतिक बल मजबूत बनाए रखने का काम करती हैं। बावजूद दोनों देशों के बीच बहने वाली तीस्ता नदी के जल बंटवारे पर फिलहाल कोई बात आगे नहीं बढ़ पाई। क्योंकि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की नाराजी पानी की मात्रा को लेकर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के समय से ही नाराज बनी हुई है। इस मर्तबा तो वे मोदी से इतनी खफा हैं कि हैदराबाद हाउस में हुए द्विपक्षीय वार्तालाप में शामिल ही नहीं हुईं। लेकिन अब उम्मीद है, देर-सवेर तीस्ता के जल बंटवारे का रास्ता खुल जाएगा। नदियों के जल बंटवारे का विवाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं, राष्ट्रीय स्तर पर भी विवाद का विषय बना रहा है। ब्रह्मपुत्र को लेकर चीन सेस तीस्ता का बांग्लादेश से, झेलम, सतलुज तथा सिंधु का पाकिस्तान से और कोसी को लेकर नेपाल से विरोधाभास कायम है। भारत और बांग्लादेश के बीच रिश्तों में खटास सीमाई क्षेत्र में कुछ भूखंडों, मानव बस्तियों और तीस्ता नदी के जल बंटवारे को लेकर पैदा होती रही है। हालांकि दोनों देशों के बीच संपन्न हुए भू-सीमा समझौते के जरिए इस विवाद पर तो कमोबेश विराम लग गया, लेकिन तीस्ता की उलझन बरकरार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2015 में बांग्लादेश यात्रा पर गए थे। तब ढाका में द्विपक्षीय वार्ता भी हुई थी, लेकिन तीस्ता की उलझन, सुलझ नहीं पाई थी। अब शेख हसीना की भारत यात्रा के दौरान अनेक समझौतों पर हस्ताक्षर होने के बावजूद तीस्ता का विवाद यथावत बना रह जाना हमारी कूटनीतिक कमजोरी को दर्शाता है। विदेश नीति में अपना लोहा मनवाने में लगे नरेंद्र मोदी से यह उम्मीद इसलिए ज्यादा थी, क्योंकि शेख हसीना दोनों देशों में परस्पर दोस्ती की मजबूत गांठ बांधने के उद्देश्य से भारत आती रही हैं । यह उम्मीद इसलिए भी थी, क्योंकि 2016 में मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने बांग्लादेश के साथ कुछ बस्तियों और भूक्षेत्रों की अदला-बदली में सफलता प्राप्त की थी। इसलिए उम्मीद की जा रही थी, कि तीस्ता नदी से जुड़े जल बंटवारे का मसला भी हल हो जाएगा। ऐसा माना जाता है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और केंद्र सरकार के बीच राजनीतिक दूरियों के चलते इस मुद्दे का हल नहीं निकल पा रहा है। यह विवाद 2011 में ही हल हो गया होता, यदि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अड़ंगा नहीं लगाया होता। तीस्ता के उद्गम स्रोत पूर्वी हिमालय में स्थित सिक्किम राज्य के झरने हैं। ये झरने एकत्रित होकर नदी के रूप में बदल जाते हैं। नदी सिक्किम और पश्चिम बंगाल से बहती हुई बांग्लादेश में पहुंचकर ब्रह्मपुत्र में मिल जाती है। इसलिए सिक्किम और पश्चिम बंगाल के पानी से जुड़े हित इस नदी से गहरा संबंध रखते हैं। तीस्ता नदी सिक्किम राज्य के लगभग समूचे मैदानी क्षेत्रों में बहती हुई बांग्लादेश की सीमा में करीब 2800 वर्ग किमी क्षेत्र मे बहती है। नतीजतन इन क्षेत्रों के रहवासियों के लिए तीस्ता का जल आजीविका के लिए वरदान बना हुआ है। इसी तरह पश्चिम बंगाल के लिए भी यह नदी बांग्लादेश के बराबर ही महत्व रखती है। बंगाल के छह जिलों में तो इस नदी की जलधारा को जीवनरेखा माना जाता है। भारत और बांग्लादेश के मध्य द्विपक्षीय सहयोग की शुरुआत इस देश के अस्तित्व में आने के वर्ष 1971 में ही हो गई थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पाकिस्तान से अलग होने वाले स्वतंत्र राष्ट्र बांग्लादेश का समर्थन करते हुए अपनी शांति सेना भेजी और इस देश को पाक की गुलामी से मुक्त कराया। इस कारण दोनों देशों के बीच भावनात्मक संबंध हिंदुओं पर अत्याचार के बावजूद कायम हैं। 1983 में दोनों देशों के बीच एक तदर्थ जल हिस्सेदारी पर संधि हुई थी, जिसके तहत 39 एवं 36 प्रतिशत जल बंटवारा तय हुआ। इस समझौते द्वारा तीस्ता नदी के जल वितरण का समान आवंटन का प्रस्ताव ही नई द्विपक्षीय संधियों का अब तक आधार बना हुआ है। इसी कड़ी में वर्ष 2011 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह के बांग्लादेश दौरे से पहले इस नदी जल के बंटवारे पर प्रस्तावित अनुबंध की सभी शर्तें सुनिश्चित हो गई थीं, लेकिन पानी की मात्रा के प्रश्न पर ममता ने आपत्ति जताकर ऐन वक्त पर डा. सिंह के साथ ढाका जाने से इनकार कर दिया था। हालांकि तब की शर्तें सार्वजनिक नहीं हुई हैं, लेकिन ऐसा माना जाता है कि वर्षा ऋतु के दौरान तीस्ता का पश्चिम बंगाल को 50 प्रतिशत पानी मिलेगा और अन्य ऋतुओं में 60 फीसदी पानी दिया जाएगा। ममता की जिद थी कि भारत सरकार 80 प्रतिशत पानी बंगाल को दे, तब इस समझौते को अंतिम रूप दिया जाए। लेकिन तत्कालीन केंद्र सरकार इस प्रारूप में कोई फेरबदल करने को तैयार नहीं हुई, क्योंकि उस समय केंद्रीय सत्ता के कई केंद्र थे। नतीजतन लाचार प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह शर्तों में कोई परिवर्तन नहीं कर सके। लिहाजा ममता ने मनमोहन सिंह के साथ ढाका जाने की प्रस्तावित यात्रा को रद्द कर दिया था। लेकिन अब राजग सरकार ने तब के मसौदे को बदलने के संकेत दिए हैं। लिहाजा उम्मीद की जा रही थी कि पश्चिम बंगाल को पानी देने की मात्रा बढ़ाई जा सकती है। हालांकि 80 प्रतिशत पानी तो अभी भी मिलना मुश्किल है, लेकिन पानी की मात्रा बढ़ाकर 65-70 फीसदी तक पहुंचाई जा सकती है। परंतु नतीजा ठन-ठन गोपाल ही रहा। ममता बनर्जी राजनीति की चतुर खिलाड़ी हैं, इसलिए वे एक तीर से कई निशाने साधने की फिराक में भी रहती हैं। तीस्ता का समझौता पश्चिम बंगाल के अधिकतम हितों को ध्यान में रखते हुए होता तो ममता बंगाल की जनता में यह संदेश देने में सफल होती कि बंगाल के हित उनकी पहली प्राथमिकता हैं। तब से अब तक ममता इस मुद्दे पर एकतरफा प्रभाव जमाए हुए हैं। नतीजतन परिणाम नहीं निकल पा रहा है। यदि यह समझौता हो जाता है तो इसके सामरिक हित भी भारत के लिए महत्वपूर्ण हैं। भारत का उत्तर-पूर्वी क्षेत्र सामरिक दृष्टि से बांग्लादेश के उदय के समय से ही नाजुक बना हुआ है। इसलिए बांग्लादेश की आर्थिक कमजोरी के चलते बांग्लादेशी घुसपैठियों की निरंतरता बनी हुई है। बांग्लादेश में करीब 10 लाख म्यांमार से विस्थापित रोहिंग्या शरणार्थी बने हुए हैं। यह भी भारत में लगातार घुसपैठ कर सीमावर्ती राज्यों में जनसंख्यात्मक घनत्व बिगाड़ रहे हैं। करीब 40000 रोहिंग्या भारत में अवैध घुसपैठियों के रूप में आमद कर चुके हैं। लिहाजा तीस्ता एवं अन्य नदियों के जल बंटवारों पर कोई निर्णायक स्थिति बन जाती है तो बांग्लादेश में कृषि और जल आधारित रोजगार मिलने लग जाएंगे, फलस्वरूप भारत में घुसपैठ थमने की उम्म्मीद की जा सकेगी। दोनों देशों में संधि के उपरांत संयुक्त रूप से बाढ़ और सूखे की आपदा से निराकरण के उपाय तलाशना भी आसान होगा। कालांतर में दक्षिण पूर्व एशियाई देशों से व्यापार व पर्यटन को बढ़ावा देने के मकसद से बांग्लादेश से भी भारत को मदद मिलेगी। वैसे भी नरेंद्र मोदी सरकार का मुख्य मकसद व्यापार के जरिए देश का चहुंमुखी विकास ही है। लेकिन इन जरूरी समस्याओं के निदान के साथ साहित्य और संस्कृति के आदान-प्रदान की भी जरूरत है।
 

Share. WhatsApp Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Copy Link Telegram Email
admin
  • Website

Related Posts

BJP ने कर्नाटक–तेलंगाना निकाय चुनावों के लिए प्रभारी नियुक्त किए, चंडीगढ़ मेयर चुनाव हेतु ऑब्ज़र्वर तय

January 21, 2026

पहलगाम आतंकी हमले के बाद मोदी सरकार का पाकिस्तान के खिलाफ आक्रामक रुख

May 2, 2025

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय न्याय प्रणाली में बड़े सुधारों की शुरुआत की: तीन नए आपराधिक कानून लागू

December 7, 2024
Advertisement
× Popup Image


RO No. 13728/1

Recent Posts

  • नवा रायपुर बनेगा इंटरनेशनल गोल्फ हब? विश्वस्तरीय कोर्स और बड़े टूर्नामेंट की तैयारी तेज
  • नक्सलवाद के बाद बदला गोगुण्डा का चेहरा: ‘हरा सोना’ से आय, विकास कार्यों से नई उम्मीद, अब गांव में गूंजेंगे गीत-संगीत
  • मिशन उत्कर्ष से रायपुर में बदली तस्वीर: बोर्ड परीक्षा परिणामों में ऐतिहासिक सुधार, सैकड़ों स्कूलों में दिखा असर
  • राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ की दोहरी उपलब्धि: फाइलेरिया और मलेरिया उन्मूलन मॉडल को मिली देशभर में पहचान
  • स्वर्गीय विवेक अंधारे को मंत्री राजेश अग्रवाल ने दी श्रद्धांजलि

Recent Comments

No comments to show.

 

Panchayat Tantra 24

panchayattantra24.com एक ऐसा न्यूज बेबसाईट है, जिसके माध्यम से विभिन्न दैनिक समाचार पत्र एवं अन्य पत्रिका को समाचार एवं फोटो फीचर की सेवायें न्यूनतम शुल्क में प्रदान किया जाता है। साथ ही लिंक के द्वारा भी अन्य पाठकों को फेसबुक, व्हाट्सएप, यूट्यूब व अन्य संचार माध्यम से प्रतिदिन समय-समय पर न्यूज भेजा जाता है।

Email Us: panchayattantra24@gmail.com
Contact: +91 7000291426

Categories

  • Uncategorized
  • अंतरराष्ट्रीय
  • एंटरटेनमेंट
  • खेल
  • छत्तीसगढ़
  • दिल्ली
  • दुर्ग
  • धर्म आध्यात्म
  • बस्तर
  • बिज़नेस
  • बिलासपुर
  • मध्य प्रदेश
  • रायपुर
  • राष्ट्रीय
  • संपादकीय
  • सरगुजा

Contact Details

Owner and Editor
Kanya Kumari pandey

Mobile No.
7000291426

Address
Subhas Nagar Near Jal Vihar Colony Raipur Chhatisgarh

© 2026 Designed by RT Internet Services.
  • Home
  • Privacy Policy
  • Terms and Conditions
  • Contact Us

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.