
रायपुर । राजधानी के रिंग रोड नंबर 1 और 2 के राज्य मार्ग और सर्विसेस रोड को ट्रक चालकों ने अवैध पार्किंग का अड्डा बना लिया है जिसके कारण यहां आए दिन दुर्घटना होते रहती है।
यहां कई गैरेज संचालकों ने तो स्थाई रुप से मुख्य मार्गों पर ही ट्रक रिपेयरिंग का काम तक शुरु कर दिया है। जिससे मार्ग बाधित है होने के साथ दुर्घटनाओं का खतरा और बढ़ गया है। लेकिन यातायात पुलिस और स्थानीय प्रशासन की उदासीनता की वजह से रिंगरोड डेंजर जोन बन गया है। इस रास्ते पर चलना यमराज को निमंत्रण देने जैसा ही है।
बावजूद इसके जिम्मा संभाले वाले परिवहन विभाग एवं पुलिस प्रशासन इस पर अंकुश लगाने में कोई ठोस प्रयास नहीं कर रही है। शहर में बिलासपुर मार्ग के सर्विस रोड पर टाटीबंध चौक से हीरापुर, कबीर नगर से प्रिन्स ढाबा ,सरोरा चौक से भनपुरी चौक और भनपुरी चौक से बिरगांव चौक तक जगह-जगह ट्रक कतार में खड़े नजर आते है। वही रिंग रोड नंबर एक में टाटीबंध से सरोना, जीके फोर्ड से आरडीए अपार्टमेंट , टिटोस डिस्को से शुभ होण्डा , रायपुरा से कुशालपुर, भाठागांव से संतोषी नगर और पचपेटी नाका से तेलीबांधा चौक तक सैकड़ों ट्रकों को वाहन चालक निश्चिन्त रूप से खड़ा करके रखते है जिससे की दुर्घटनाओं का अंदेशा बना रहता है। इसके साथ ही कई बार आधे से अधिक मार्ग भी बाधित हो जाता है। सबसे अधिक परेशानी शाम के समय होती है। अन्य वाहन चालकों को यहां से गुजरने में भी खासी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। रिंग रोड में बहुत से ऐसे ट्रांसपोटर्स है जिनके पास एक दर्जन से अधिक गाडिय़ां है इसके साथ ही वे अपनी गाडिय़ों को राज्य मार्ग और सर्विस रोड में ही छोड़ देते है, जिनसे छोटे वाहन चालकों को परेशानी के साथ साथ दुर्घटना का शिकार होना पड़ता है।
टाटीबंध से भनपुरी चौक तक लाइन से ट्रकों की कतारे देखने को मिल सकता है ऐसे ही रिंग रोड नम्बर 1 बहुत से रिहायशी कॉलोनी से भी जुड़ी है लेकिन यहां भी ट्रकों की पार्किंग ने कोलोनी तक पहुंचना मुहाल कर दिया है।
दुर्घटनाओं का सिलसिला
टाटीबंध चौक से भनपुरी तक रिंग-रोड नंबर-2 बनने के बाद यहां मौतों का सिलसिला जारी है। इसका बड़ा कारण ट्रकों की अवैध पार्किंग और सुस्त प्रशासन है जो आंख मूंद कर मूकदर्शक बनी हुई है। पिछले दो साल के भीतर इस सड़क में लगभग 42 लोगों की जानें जा चुकी है। पुलिस रिकॉर्ड ही बयां कर रहा हैं कि खमतराई, आमानाका, कबीर नगर, टाटीबंध थाना क्षेत्र के अंतर्गत पिछले दो वर्षों में दुर्घटनाओं पर रोक नहीं लग सकी है। पांच वर्ष पहले 2014 में इस सड़क पर जब रिंग रोड नहीं बना था तब भी मौतों का सिलसिला नहीं थमा, रिंग रोड बनने के बाद मौतों के आंकड़े और बढ़ गए। रिंग रोड में दुर्घटनाओं के रोकथाम के लिए कोई विकल्प नहीं तलाशा गया। यही कारण है कि पुलिस प्रशासन ना तो ट्रकों की अवैध पार्किंग के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है और ना ही अवैध गैरेज और ट्रांसपोर्टर्स को हटाने की कोशिश की गई।
रिंग रोड में अवैध पार्किंग पर हमारी नजर है, हम जल्द ही इन पर कड़ी कार्रवाई करेंगे।
– मेहरु मांडवी, एएसपी यातायात