panchayattantra24.-जगदलपुर: बस्तर में स्वास्थ्य विभाग इलाज और जागरूकता के दावे कर रहा है, लेकिन मरीजों का भरोसा अब भी अस्पतालों से ज्यादा झाड़-फूंक और देसी उपचार पर दिखाई दे रहा है। हालात ऐसे हैं कि सरकारी अस्पतालों में पीलिया के गिने-चुने मरीज पहुंच रहे हैं, जबकि शहर से लगे आड़ावाल में देसी इलाज के लिए लोगों की लंबी कतारें लग रही हैं।
दरअसल, जगदलपुर के महारानी जिला अस्पताल में रोजाना सिर्फ एक या दो पीलिया मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि मरीजों को बेहतर उपचार और आसपास के लोगों की स्वास्थ्य जांच की सुविधा दी जा रही है। डॉक्टरों के मुताबिक, दूषित पानी पीलिया फैलने की सबसे बड़ी वजह है, इसलिए नगर निगम के साथ मिलकर संक्रमित जल स्रोतों को चिन्हित करने का काम भी किया जा रहा है।
दूसरी ओर नगर निगम ने भी माना है कि शहर के कई इलाकों से दूषित पानी की शिकायतें मिली हैं। कई जगह पेयजल पाइपलाइन नालियों से गुजर रही है, जिससे पानी संक्रमित हो रहा है। दलपत सागर जैसे इलाकों में टैंकर से पानी सप्लाई करने की व्यवस्था की गई है और प्रभावित क्षेत्रों में सुधार का काम जारी होने का दावा किया जा रहा है। लेकिन प्रशासनिक दावों के बीच सबसे बड़ा सवाल लोगों के भरोसे को लेकर खड़ा हो रहा है। आड़ावाल में देसी इलाज कराने वालों की भीड़ लगातार बढ़ रही है।
स्वास्थ्य विभाग खुद मान रहा है कि झाड़-फूंक के भरोसे रहने वाले कई मरीज गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचते हैं, जिससे मौत का खतरा भी बढ़ जाता है। अब सवाल यह है कि आखिर सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर क्यों पड़ रहा है और क्यों आज भी बीमारी के इलाज में विज्ञान से ज्यादा अंधविश्वास हावी दिखाई दे रहा है।
सिविल सर्जन ने दी सलाह
सिविल सर्जन डॉ. संजय प्रसाद का इस मामले में कहना है कि अभी देखने में आया है कि पीलिया के कुछ केस जिला चिकित्सालय में पहुंच रहे हैं। गर्मी के कारण वाटर जनित रोग या पानी से होने वाले रोग की संख्या बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि हमारी सलाह रहती है कि समय रहते उनका इलाज किया जाए और देखने में आता है कि लोग झाड़ फूंक के चक्कर में काफी लेट अस्पतालों में पहुंचते हैं उससे वो बिमारी और गंभीर हो जाती है, तो लोगों से यही अपील है कि गर्मी बहुत ज्यादा है अपना ध्यान रखें। ऐसे लक्षण यदि उनमें पाए जाते हैं कि पीलिया है या पीलिया होने की संभावना है, तो तुरंत ही अपने नजदीकी अस्पताल के डॉक्टर से संपर्क करें।
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