panchayattantra24.-बस्तर ,रायपुर। बस्तर के घने जंगलों में वन विभाग और ग्रामीणों की संवेदनशीलता से तेंदुए के दो बिछड़े शावकों को सुरक्षित उनकी मां से मिलाने का सफल अभियान पूरा हुआ। करीब 48 घंटे तक चले इस अभियान में वन अमले ने लगातार निगरानी रखी और शावकों को उनकी मां तक पहुंचाने के लिए पूरी सावधानी बरती।
यह अभियान वन मंत्री श्री केदार कश्यप के वन्यजीव संरक्षण और मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने के संकल्प को धरातल पर साकार करने का उदाहरण है। अभियान में वन विभाग की तत्परता के साथ ग्रामीणों का सहयोग भी महत्वपूर्ण रहा।
सूचना मिलते ही शुरू हुआ रेस्क्यू अभियान
22 अगस्त को चित्रकोट रेंज के पहाड़ी वन क्षेत्र में ग्रामीण बच्चों द्वारा तेंदुए का एक छोटा शावक उठाए जाने की सूचना वन विभाग को मिली। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम सक्रिय हुई। वन मंडलाधिकारी दीपेश कपिल के मार्गदर्शन में वन अमले ने रात करीब 11.20 बजे शावक को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया।
वन विभाग ने शावक को उसकी मां से मिलाने के लिए उसे तड़के करीब 4 बजे घने जंगल में चिन्हित सुरक्षित स्थान पर रखा। टीम को उम्मीद थी कि मादा तेंदुआ अपने शावक को वहां से ले जाएगी। हालांकि, अगले दिन निगरानी के दौरान मां के शावक तक नहीं पहुंचने की जानकारी मिली।
दूसरे शावक की भी हुई तलाश
पहले प्रयास के बाद वन विभाग ने ग्रामीणों के सहयोग से आसपास के क्षेत्र में दूसरे शावक की तलाश शुरू की। जल्द ही दूसरा शावक भी मिल गया। दोनों शावकों को सुरक्षित स्थान पर रखा गया और उनकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए आसपास हाई-रिजोल्यूशन ट्रैप कैमरे लगाए गए।
वन अमले ने करीब 48 घंटे तक लगातार निगरानी की। इस दौरान शावकों की सुरक्षा और उनकी मां तक सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित करने के लिए हर गतिविधि पर नजर रखी गई।
कैमरे में कैद हुआ मां का ममता भरा दृश्य
लगातार निगरानी के बाद सोमवार रात ट्रैप कैमरे में वह दृश्य दिखाई दिया, जिसका वन विभाग और ग्रामीणों को इंतजार था। मादा तेंदुआ अपने दोनों शावकों के पास पहुंची और उन्हें सुरक्षित अपने साथ घने जंगल की ओर ले गई।
शावकों के अपनी मां से मिलने के बाद वन विभाग की टीम ने राहत की सांस ली। इस तरह 48 घंटे का ‘मिशन रीयूनाइट’ सफलतापूर्वक पूरा हुआ।
वन्यजीव संरक्षण में संवेदनशीलता की मिसाल
यह अभियान केवल एक रेस्क्यू ऑपरेशन नहीं, बल्कि वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता और मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व की मिसाल है। वन विभाग ने शावकों को अनावश्यक रूप से अपने पास रखने के बजाय उनकी मां से मिलाने को प्राथमिकता दी।
ग्रामीणों की सजगता, वन अमले की तत्परता और आधुनिक निगरानी तकनीक के समन्वय से दो नन्हे शावकों को उनका प्राकृतिक परिवार वापस मिल सका। यह सफलता बताती है कि वन्यजीव संरक्षण केवल विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि वन विभाग और स्थानीय समुदाय के साझा प्रयासों से ही अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
Subscribe to Updates
Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.
