
रायपुर । अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में पाटन निवासी प्रकाश चंद जैन को भर्ती करवाया गया है। प्रकाश को फेफड़ों की बीमारी के साथ निमोनिया था। स्थिति में सुधार के बाद वेंटिलेटर से बाहर आ चुका था। 24 अप्रैल को डॉक्टर्स ने इंजेक्शन लिखा। प्रकाश के बेटे ने एम्स परिसर में ही संचालित अमृत फॉर्मेसी से उसे खरीदा। इनमें से कुछ इंजेक्शन को लगाने के बाद प्रकाश की तबीयत बिगड़नी शुरू हो गई। वह फिर से वेंटिलेटर पर जा पहुंचा। परिजनों ने पाया कि इंजेक्शन सुपरपेनम 500 एमजी है, सभी एक्सपायर्ड हैं।
सूचना मीडिया तक पहुंची तो हड़कंप मच गया। इंजेक्शन की जांच की गई। सबसे पहले अमृत फॉर्मेसी के दो फॉर्मासिस्ट को बर्खास्त कर दिया गया। इस मामले की जांच के लिए डॉक्टर्स की चार सदस्यीय कमेटी गठित कर दी गई है। कमेटी चार दिन में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी
प्रथम दृष्टया दवा एक्सपायरी होना पाया गया है। फॉर्मेसी के स्टाफ पर कार्रवाई की गई है। मगर संपूर्ण जांच के बाद ही नतीजे पर पहुंचा जा सकता है। – डॉ. अजय दानी, अधीक्षक, एम्स रायपुर
