Close Menu
Panchayat Tantra 24
  • Home
  • संपादकीय
    • रायपुर
    • दुर्ग
    • बस्तर
    • बिलासपुर
    • सरगुजा
  • राष्ट्रीय
    • दिल्ली
    • छत्तीसगढ़
    • मध्य प्रदेश
  • अंतरराष्ट्रीय
  • एंटरटेनमेंट
  • खेल
  • धर्म आध्यात्म
  • बिज़नेस
  • Contact Us

Subscribe to Updates

Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

What's Hot

बिलासपुर संभाग के 850 श्रद्धालु विशेष ट्रेन से अयोध्या धाम रवाना

October 21, 2026

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रावघाट – रायपुर एवं रायपुर – कुरूद यात्री रेल सेवाओं को दिखाई हरी झंडी

October 21, 2026

सत्य और धर्म की विजय का शाश्वत संदेश देता है विजयादशमी का पर्व – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

October 21, 2026
Facebook X (Twitter) Instagram
Wednesday, October 21
  • Home
  • Privacy Policy
  • Terms and Conditions
  • Contact Us
Panchayat Tantra 24
  • Home
  • संपादकीय
    • रायपुर
    • दुर्ग
    • बस्तर
    • बिलासपुर
    • सरगुजा
  • राष्ट्रीय
    • दिल्ली
    • छत्तीसगढ़
    • मध्य प्रदेश
  • अंतरराष्ट्रीय
  • एंटरटेनमेंट
  • खेल
  • धर्म आध्यात्म
  • बिज़नेस
  • Contact Us
Panchayat Tantra 24
Home » सिरपुर की समृद्ध सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक परिदृश्य अब विश्व में चमकेगा
रायपुर

सिरपुर की समृद्ध सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक परिदृश्य अब विश्व में चमकेगा

Author AuthorBy Author AuthorOctober 21, 2026No Comments10 Mins Read
Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email
Share
WhatsApp Telegram Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email Copy Link

छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक और प्राचीन धरोहर सिरपुर की वैश्विक पहचान की ओर बड़ा कदम

यूनेस्को की विश्व धरोहर अस्थाई सूची में शामिल

Panchayattantra24.com-महासमुंद। छत्तीसगढ़ राज्य के महासमुंद अंतर्गत पुण्य सलिला महानदी के तट पर स्थित सिरपुर का अतीत सांस्कृतिक समृद्धि तथा वास्तुकला के लालित्य से ओतप्रोत सिरपुर अब विश्व के मानचित्र में चमकेगा। यूनेस्को के विश्व धरोहर की संभावित सूची में सिरपुर को शामिल किया गया है। सिरपुर प्राचीन काल में श्रीपुर के नाम से विख्यात रहा है तथ पाण्डुवंशी शासकों के काल में इसे दक्षिण कोसल की राजधानी होने का गौरव प्राप्त रहा है। सिरपुर की प्राचीनता का सर्वप्रथम परिचय शरभपुरीय शासक प्रवरराज तथा महासुदेवराज के ताम्रपत्र से उपलब्ध होता है। कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह ने बताया कि जिले के ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक धरोहर सिरपुर को यूनेस्को के विश्व धरोहर की संभावित सूची में शामिल किया गया है। यूनेस्को के आधिकारिक वेबसाइट पर तीसरे क्रम पर सिरपुर को सूचीबद्ध किया गया है। उल्लेखनीय है कि केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत द्वारा 01 जनवरी 2026 को ऐतिहासिक स्थल सिरपुर के पुरातात्विक स्थलों का अवलोकन किया गया था तत्पश्चात उन्होंने कहा था कि इन स्थलों के संरक्षण और संवर्धन के लिए कार्य किया जाएगा और सिरपुर को यूनेस्को के विश्व धरोहर सूची में शामिल करने प्राथमिकता से प्रयास किया जाएगा। इस दौरान प्रदेश के उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, धर्मस्व एवं पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, सांसद श्रीमती रूपकुमारी चैधरी, महासमुंद विधायक श्री योगेश्वर राजू सिन्हा एवं स्थानीय जनप्रतिनिधि गण मौजूद थे।
सिरपुर की समृद्ध सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक परिदृश्य
महाशिवगुप्त बालार्जुन के 57 वर्षीय, सुदीर्घ शासनकाल में यहीं अनेक मंदिर, बौद्ध विहार सरोवर तथा उद्यानों का निर्माण करवाया गया। सातवीं सदी ईस्वी में चीन के पर्यटक तथा विद्वान हेनसांग ने सिरपुर की यात्र की थी। उस समय यहाँ लगभग 100 संधाराम थे तथा महायान संप्रदाय के 10000 भिक्षु निवास करते थे। महाशिवगुप्त बालार्जुन ने स्वयं शेवमतावलंबी होते हुए भी बौद्ध विहारों को उदारतापूर्वक प्रचुर दान देकर संरक्षण प्रदान किया था।
लक्ष्मण मंदिर – यह ईंटों से निर्मित भारत के सर्वोत्तम मंदिरों में से एक है। अलंकरण सौंदर्य, मौलिक अभिप्राय तथा निर्माण कौशल की दृष्टि से यह अपूर्व है। लगभग 7 फुट ऊंच पाषाण निर्मित जगती पर स्थित यह मंदिर अत्यंत भव्य है। पंचरथ प्रकार का यह मंदिर गर्भगृह, अंतराल तथा मंडप से युक्त है। मंदिर की बाह्य भित्तियों में कूट द्वारा तथा वातायन आकृति, चैत्य गवाक्ष, भारवाहकगण, गज, कीर्तिमुख एवं कर्ण आमलक आदि अभिप्राय दर्शनीय है। मंदिर का प्रवेश द्वार अत्यंत आकर्षक है। द्वार शीर्ष पर शेषशायी विष्णु प्रदर्शित है। उभय द्वारा शाखा पर विष्णु के प्रमुख अवतार, कृष्ण लीला के दृश्य, अलंकरणात्क प्रतीक, मिथुन दृश्य तथा वैष्णव द्वारपालों का अंकन है। गर्भगृह के भीतर नागराज शेश की बैठी हुई सौम्य प्रतिमा रखी है। लक्ष्मण मंदिर का निर्माण महाशिवगुप्त बालार्जुन की माता वासटा ने अपने दिवंगत पति हर्षगुप्त की स्मृति में करवाया था। माता वासटा मगध के राजा सूर्यवर्मन की पुत्री थी। अभिलेखीय साक्ष्य के आधार पर इस मंदिर का निर्माण काल 650 ईस्वी के लगभग मान्य है।
गंधेश्वर मंदिर – महानदी के तट पर स्थित इस मंदिर का प्राचीन नाम गंधर्वेश्वर था। यह सतत पूजित शिव मंदिर है। इसका निर्माण प्राचीन मंदिरों एवं विहारों से प्राप्त स्थापत्य खण्डों से किया गया है। मंदिर परिसर में अनेक कलात्मक प्रतिमाएं संरक्षित की गई है। द्वार शाखा के विविध दृश्य है। इन्हीं दृश्यों में रावण के शीर्ष पर गर्दभमुख निर्मित है।
बौद्ध विहार- बौद्ध धर्म से संबंधित अवशेषों की दृष्टि से सिरपुर का विशेष महत्व है। उत्खनन कार्य से यहाँ दो बौद्ध विहार के अवशेष प्रकाश में आए हैं। विहारों के निर्माण में मुख्य रूप से ईंटों का उपयोग किया गया है। इन विहारों की तल योजना में गुप्तकालीन मंदिर तथा आवासीय भवन निर्माण कला का सुंदर समन्वय है। विहार में प्रमुख स्थाविर तथा अन्य भिक्षुओं के ध्यान, अध्ययन-अध्यापन तथा निवास की सुविधा थी। इन विहारों के मुख्य कक्ष में भगवान बुद्ध की भूमिस्पर्श मुद्रा में लगभग साढ़े छः फुट ऊँची प्रतिमा प्रस्थापित है। इनके अतिरिक्त अवलोकितेश्वर तथा मकरवाहिनी गंगा भी मिली है।
यहाँ के प्रमुख विहार से मिले अभिलेख से ज्ञात होता है कि महाशिवगुप्त बालार्जुन के राजत्वकाल
आनंदप्रभु नामक भिक्षु ने इसका निर्माण करवाया था। इस मठ में निवास के लिए 14 कमरे थे। यह विहार दो मंजिला था विहार के सम्मुख तोरणद्वार था, जिसके दोनों ओर द्वारपालों की प्रतिमायें रही है। अभिलेख के आधार पर इस विहार का नामकरण आनंदप्रभु कुटी विहार किया गया है। इसी के सन्निकट एक अन्य ध्वस्त विहार भी उत्खनन से प्रकाश में आया है। तल योजना के आधार पर इसे स्वास्तिक विहार के नाम से जाना जाता है। यहाँ पर भी भूमिस्पर्श मुद्रा में बुद्ध की प्रतिमा प्रस्थापित है। सिरपुर से बौद्ध धर्म से संबंधित पाषाण प्रतिमाओं के अतिरिक्त धातु प्रतिमाएं तथा मृण्मय पुरावशेष भी उपलब्ध हुए है।
राम मंदिर – लक्ष्मण मंदिर से कुछ दूरी पर पूर्व की ओर ईटों से निर्मित एक भग्न तथा जीर्ण-शीर्ण अवशिष्ट है। यह राम मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है। इस मंदिर के ऊर्ध्व विन्यास में कोण तथा भुजाओं के संयोजन से निर्मित प्रतिरथ ताराकृति की रचना करते है। इस कलात्मक मंदिर का संपूर्ण शिखर नष्ट हो चुका है तथा भग्नप्राय भित्तियां बच रहे है। लक्ष्मण मंदिर तथा राम मंदिर के निर्माण में कुछ दशकों का अंतराल है।
संग्रहालय- लक्ष्मण मंदिर परिसर में भारतीय पुरातत्वीय सर्वेक्षण विभाग द्वारा स्थापित संग्रहालय में सिरपुर से प्राप्त अनेक दुर्लभ प्रतिमाएं तथा स्थापत्य खण्ड संरक्षित कर रखी गई है। ये कलाकृतियाँ शैव, वैष्णव, बौद्ध तथा जैन धर्म से संबधित है। एक अंगड़ाई लेती हुई नायिका की 196च्प्भ् प्रतिमा में सौंन्दर्य, अनुराग तथा चपलता का अद्भुत सामंजस्य है। काले पाषाण से निर्मित चतुर्मुख शिवलिंग के प्रशांत मुख पर लास्य के भाव है। उनके कंठ तथा जटा-जूट में मुक्ताहार गुंफित है। केशीवध को प्रदर्शित करती हुई प्रतिमा में कृष्ण तथा अश्व का अंकन अत्यंत प्रभावोत्पादक है। महिषासुरमर्दिनी प्रतिमा में देवी के अनुग्रह तथा संहारक शक्ति की व्यंजना है। इसके अतिरिक्त यहाँ अन्य प्रतिमायें भी प्रदर्शित है, जिनमें नृसिंह, अंबिका, चामुंडा, विष्णु, सुर्य प्रतिमा के भाग, शिशु सहित मातृका, जैन तीर्थकर, दुर्गा, नाग पुरुष तथा बुद्ध विशेष महत्वपूर्ण है। सिरपुर से संग्रहित नाग पुरुष की एक मानवाकार प्रतिमा रायपुर संग्रहालय में भी प्रदर्शित है।
धातु प्रतिमाएं- सातवीं आठवीं सदी ईस्वी में सिरपुर
धातु प्रतिमाओं के निर्माण के केन्द्र के रूप में स्थापित हो चुका था। इस काल में सिरपुर महायान धर्म का प्रसिद्ध केन्द्र था। सिरपुर में सर्वप्रथम 1939 में धातु प्रतिमाओं का भण्डार प्राप्त हुआ था। सिरपुर से प्राप्त धातु प्रतिमाएं रायपुर, नागपुर, नई दिल्ली स्थित संग्रहालयों तथा मुम्बई के भारतीय विद्या भवन में संरक्षित है। सिरपुर से प्राप्त धातु प्रतिमाओं का प्रदर्शन इंग्लैंड, जर्मनी तथा अमेरिका में किया जा चुका है।
सिरपुर की धातु प्रतिमाओं में श्री एवं शील का अद्भुत संतुलन है। यहाँ से प्राप्त धातु प्रतिमाओं में बुद्ध, अवलोकितेश्वर प्रद्मपणि, वज्रपाणि, मंजूश्री, तारा आदि के अतिरिक्त ऋषभनाद तथा विष्णु की धातु प्रतिमाएं भी उपलब्ध हुई है। इन प्रतिमाओं के प्रदीप्त मुख, अर्घ निलिम्ब नेत्र, बरद मुद्रा युक्त हथेली की उंगलियों एवं परिधान की तरंगवत सिलवटों में आध्यात्मिक सौंदर्य के साथ कला का चरमोत्कर्ष व्याप्त है।
उत्खनन – सिरपुर के तिमिराच्छादित अतीत के परतों को अनावृत करने के उद्देश्य से पुरातत्व विभाग के द्वारा संयुक्त रूप से श्री एम.जी दीक्षित के निर्देशन में उत्खनन कार्य संपादित किया गया था। उत्खनन से यहाँ पर टीले के भीतर दबे हुए दो बौद्ध विहारों को क्रमशः अनावृत किया गया है। इनमें से एक का नाम आनंदप्रभु कुटी विहार तथा दूसरे का स्वास्तिक विहार रखा गया है। सिरपुर के उत्खनन से लगभग 2000 से अधिक वस्तुएं प्राप्त हुई है। उत्खनित वस्तुओं में धातु प्रतिमा, प्रतिमाफलक, आभूषण बनाने के विविध उपकरण, लोहे के अनेक प्रकार के बर्तन, कीलें-ताले, जंजीर, सिलबट्टा, दीपक, पूजा के पात्र, घड़े, मिट्टी के मटके, कांच की चूड़ियां, पकी मिट्टी की मुहरें एवं खिलौने तथा तीन सिक्के भी मिले है। इनमें से एक सिक्का शरभपुरीय शासक प्रसन्नमात्र का है तथा दूसरा कलचुरी शासक रत्नदेव के समय का है। तीसरा सिक्का विशेष महत्वपूर्ण है। यह सिक्का चीनी राजा काई युवान (713 से 741 ईस्वी) के समय का है।
राजमहल अवशेष – सिरपुर में स्थित उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के समीप महानदी के तट पर स्थित है। डॉ. अरुण कुमार शर्मा रिटायर्ड सुप्रिन्टेडिंग भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा (2000-01) में किये गये उत्खनन में एक विशाल परिसन के अवशेष उपलब्ध हुए, जिसे उन्होंने राजमहल नाम से अभिहित किया। यहाँ से प्राप्त अवशेषों में भगवान विष्णु एवं लक्ष्मी की प्रतिमाएं महत्वपूर्ण है। वर्ष 2001 से वर्ष 2004 के मध्य सिरपुर में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के द्वारा नागार्जुन बोधिसत्व संस्थान मनसर के तत्वावधान में उत्खनन कार्य संपादित किया गया। इस अवधि में निम्नलिखित स्मारक अवशेष अनावृत किये गए।
बौद्ध विहार (तीवर देव महाविहार)- दक्षिण कोसल (छत्तीसगढ़) में अब तक के सबसे बड़े विहार के रूप में परिगणित तीवरदेव बौद्ध विहार डाॅ. अरुण कुमार शर्मा (2002-03) के उत्खनन के दौरान प्राप्त हुआ। यह बौद्ध विहार कसडोल जाने वाले मार्ग पर दाहिने ओर लक्ष्मण मंदिर से लगभग 1 कि.मी. पूर्व स्थित है। वस्तुतः यह पूरा क्षेत्र एक बौद्ध सांस्कृतिक संकुल ही है। क्योकि इसी परिसर में अन्य विहार, बौद्ध भिक्षुणी बिहार भी स्थित है। किन्तु तीवर देव महाविहार अपनी विशालता, भव्यता, अद्भुत शिल्प कौशल की दृष्टि से अद्वितीय है। उत्खनन के दौरान प्राप्त अभिलेखीय साक्ष्यों के आधार पर उत्खननकर्ता द्वारा इसे तीवर देव महाविहार के नाम से अभिहित किया गया है। यह बौद्ध महाविहार लगभग 902 वर्ग मी. परिक्षेत्र में निर्मित है।
सुरंग टीला – भूमि स्पर्श मुद्रा में प्रतिमा स्थापित है। बुद्ध के अतिरिक्त गर्भगृह से रत्नसंभव तथा पद्मपाणि की प्रतिमाएं भी प्राप्त हुई थी। गर्भगृह के सामने वाले मण्डप के चारों ओर लगभग 2.25- मी. चैड़ा गलियारा है। इस विहार में जल निकासी के लिए प्रस्तर निर्मित भूमिगत नाली के अवशेष भी प्राप्त हुए है। इस विहार के कक्षों को कालातंर में लघु गर्भगृहों (पूजा कक्षों) में परिवर्तन पश्चात् इस विहार के दक्षिण दिशा की ओर विस्तार किया गया तथा अनेक नवीन कक्षों का निर्माण किया गया तथा पूर्व की अपेक्षा एक अन्य बड़े मण्डप का (12.5 गुणा 9 मी.) भी निर्माण किया गया तथा चारों ओर 36 मी. लम्बा एवं 1.5 मी. चैड़ा गलियारा है। यह मण्ड 10 स्तंभों पर आधारित था। इस विस्तारित बाग में कतिपय सोपन सीढ़ियों) की प्राप्ति के आधार पर उत्खनन कर्ता द्वारा इसके दो मंजिला होने का अनुमान किया गया है।
इस विहार की सबसे बड़ी विशेषता इसका अत्यंत अलंकृत प्रवेश द्वार है जिसे देखकर बौद्ध विहार की अपेक्षा किसी मंदिर के गर्भगृह के प्रवेशद्वार की द्वार शाखाओं का स्मरण होता है। इस विहार के प्रवेश द्वार के शिल्पांकन में सर्वाधिक महत्वपूर्ण पशु मैथुन का दृश्य है। जिसमें हाथियों को मैथुन मुद्रा में प्रदर्शित किया गया है। यह इसलिए भी रोचक एवं जिज्ञासा वर्धक है कि प्रायः बौद्ध विहारों में इसके शिल्पांकन का अभाव है। इसी प्रकार पंचतंत्र वर्णित मगरमच्छ एवं वानर की कथा का उत्कीर्णन भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। तथा मंगोलियाई हाव-भाव युक्त नारी मूर्तियों के साथ-साथ आलिंगनबद्ध प्रणय प्रदर्शित करती युगल मूर्तियां भी आकर्षण का केन्द्र है। शिल्पाकंन की दृष्टि से यह प्रवेश द्वार दक्षिण कोसल की उच्च कला दक्षता को प्रदर्शित करता है। उपर्युक्त वर्णित शिल्पाकंनों के अतिरिक्त भेड़ों की लड़ाई एवं उन्हें प्रोत्साहित करते उनके स्वामी का दृश्यांकन समकालीन परिवेश में मनोरंजन के साधनों के बारे में जानकारी प्रदान करता है।

Share. WhatsApp Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Copy Link Telegram Email
Author Author
  • Website

Related Posts

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रावघाट – रायपुर एवं रायपुर – कुरूद यात्री रेल सेवाओं को दिखाई हरी झंडी

October 21, 2026

सत्य और धर्म की विजय का शाश्वत संदेश देता है विजयादशमी का पर्व – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

October 21, 2026

मुख्यमंत्री साय ऐतिहासिक रावणभाठा मैदान में आयोजित विजयादशमी उत्सव में हुए शामिल, प्रदेशवासियों को दी दशहरा पर्व की शुभकामनाएं

October 21, 2026
Advertisement
× Popup Image


RO No. 13728/1

Recent Posts

  • बिलासपुर संभाग के 850 श्रद्धालु विशेष ट्रेन से अयोध्या धाम रवाना
  • केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रावघाट – रायपुर एवं रायपुर – कुरूद यात्री रेल सेवाओं को दिखाई हरी झंडी
  • सत्य और धर्म की विजय का शाश्वत संदेश देता है विजयादशमी का पर्व – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
  • मुख्यमंत्री साय ऐतिहासिक रावणभाठा मैदान में आयोजित विजयादशमी उत्सव में हुए शामिल, प्रदेशवासियों को दी दशहरा पर्व की शुभकामनाएं
  • छत्तीसगढ़ की धरती पर पहली बार भारत-जिम्बाब्वे महिला टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट श्रृंखला का आयोजन

Recent Comments

No comments to show.

 

Panchayat Tantra 24

panchayattantra24.com एक ऐसा न्यूज बेबसाईट है, जिसके माध्यम से विभिन्न दैनिक समाचार पत्र एवं अन्य पत्रिका को समाचार एवं फोटो फीचर की सेवायें न्यूनतम शुल्क में प्रदान किया जाता है। साथ ही लिंक के द्वारा भी अन्य पाठकों को फेसबुक, व्हाट्सएप, यूट्यूब व अन्य संचार माध्यम से प्रतिदिन समय-समय पर न्यूज भेजा जाता है।

Email Us: panchayattantra24@gmail.com
Contact: +91 7000291426

Categories

  • Uncategorized
  • अंतरराष्ट्रीय
  • एंटरटेनमेंट
  • खेल
  • छत्तीसगढ़
  • दिल्ली
  • दुर्ग
  • धर्म आध्यात्म
  • बस्तर
  • बिज़नेस
  • बिलासपुर
  • मध्य प्रदेश
  • रायपुर
  • राष्ट्रीय
  • संपादकीय
  • सरगुजा

Contact Details

Owner and Editor
Kanya Kumari pandey

Mobile No.
7000291426

Address
Subhas Nagar Near Jal Vihar Colony Raipur Chhatisgarh

© 2026 Designed by RT Internet Services.
  • Home
  • Privacy Policy
  • Terms and Conditions
  • Contact Us

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.