मल्टीमीडिया डेस्क। नौ शक्तियों के मिलन को ही नवरात्रि कहते हैं। ज्यादातर लोग चैत्र और शारदीय नवरात्रि के बारे में जानते हैं और उस दौरान पूजा व व्रत करते हैं। मगर, इसके अलावा दो गुप्त नवरात्रि भी साल में होती हैं, जिनमें खासतौर पर गुप्त सिद्धियां पाने के लिए पूजा-अर्चना की जाती है। माघ और आषाढ़ में मनाई जाने वाली इन दोनों गुप्त नवरात्रि में साधक विशेष साधना करते हैं। माना जाता है कि गुप्त नवरात्रि में पूजा अर्चना करने से अपार सफलता मिलती है।
गुप्त नवरात्रि की प्रमुख देवियां
आम तौर पर जहां नवरात्र में जहां नौ देवियों की विशेष पूजा का प्रावधान है, वहीं गुप्त नवरात्र में 10 महाविद्या की साधना की जाती है। गुप्त नवरात्र में पूजी जाने वाली 10 महाविद्याओं में मां काली, मां तारा देवी, मां त्रिपुर सुंदरी, मां भुवनेश्वरी, मां छिन्नमस्ता, मां त्रिपुर भैरवी, मां धूमावती, मां बगलामुखी, मां मातंगी और मां कमला देवी हैं। इस नवरात्र में में तंत्र और मंत्र दोनों के माध्यम से भगवती की पूजा की जाती है।
ऐसे करें शक्ति की साधना
गुप्त नवरात्र में मां भगवती की साधना गुप्त रूप से देर रात में की जाती है। तन और मन से पवित्र होकर माता की विधि-विधान से फल-फूल आदि चढ़ाने के बाद सरसों के तेल का दीपक जलाकर ॐ दुं दुर्गायै नमः मंत्र का जाप करें। आद्या शक्ति की इस साधना में लाल रंग के फूल, लाल सिंदूर और लाल रंग की चुनरी का प्रयोग करें। इससे जुड़ी साधना-आराधना को भी लोगों से गुप्त रखा जाता है। मान्यता है कि साधक जितने गुप्त तरीके से देवी की साधना करता है, उस पर भगवती की उतनी ही कृपा बरसती है।
इन मंत्रों का करें जाप
‘ऊं ऐं हीं क्लीं चामुण्डाये विच्चे नम:’
‘ऊं ऐं महाकालाये नम:’
‘ऊं हीं महालक्ष्मये नम:’
‘ऊं क्लीं महासरस्वतये नम:’
गुप्त नवरात्रि के दौरान न करें ये काम
इन दिनों में नाखून, बाल और दाढ़ी बनवाएं न बनवाएं।
कन्याओं को झूठा भोजन न दें। मांस-मदिरा से बचे।
झूठ नहीं बोलें और किसी का अपमान नहीं करें।
Subscribe to Updates
Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.
