रायपुर। एक मां का दर्द महसूस कीजिए, जब उसे यह पता चलता है कि उसके लाल के पैर टेढ़े हैं। वह ठीक से चल नहीं पा रहा है। अगर इलाज नहीं मिला तो जिंदगी उसे उन्हीं टेढ़े पैरों के सहारे ही गुजारनी होगी। मगर जब यह मालूम होता है कि वह ठीक हो सकता है तो उसकी चिंता आधी हो जाती है। ऐसी सैकड़ों मां डॉ. भीमराव आंबेडकर अस्पताल में अपने बच्चों को हुई ‘फुट क्लब’ नामक बीमारी का इलाज करने के लिए दौड़ती हैं।
लेकिन विडंबना देखिए कि इन्हें पैरों को सीधे रखने के लिए बैंडेज, प्लास्टर साथ लाना होता है। अस्पताल में यह मेडिकल सामग्री है ही नहीं। जिस अस्पताल में बड़ी-बड़ी, जटिल से जटिल बीमारी का इलाज होता है, करोड़ों की मशीन हैं और करोड़ों के उपकरण इंप्लांट किए जाते हैं, मरीज ठीक होकर घर लौटता है, वहां 500 और 1000 रुपये के बैंडेज मांताओं को बाहर से खरीदकर लाने होते हैं।
हड्डीरोग विभाग की ओपीडी के पास प्लास्टर रूम के बाहर दो मां अपने फुट क्लब पीड़ित बच्चों के साथ मिलीं। ये बैंडेज, प्लास्टर खरीदकर लाई थीं। पुराने प्लास्टर्स को गीला करने में जुटी हुई थीं, ताकि नया प्लास्टर बंध सके। मां ही कम्पाउंडर बन जाती हैं, क्योंकि कम्पाउंडर इन्हें ऐसा करने के लिए कहते हैं। इनसे कम्पाउंडर से पूछा गया कि बैंडेज, प्लास्टर क्यों नहीं है तो कहने लगे कि इनकी सप्लाई नहीं हो रही है।
सुनिए मां का दर्द
निर्मला निर्मलकर, पिथौरा- निर्मला ने एक महीने पहले ही बेटे को जन्म दिया। प्यार से नाम रखा खिलेश, लेकिन नन्ही सी जान फुट क्लब बीमारी से ग्रसित है। पिथौरा के डॉक्टर ने आंबेडकर अस्पताल ले जाने की सलाह दी, जहां दूसरी बार वे बच्चों को लेकर पहुंचीं।
कहती हैं कि डॉक्टर हर 15-15 दिन में बुलाते हैं। हर बार बाहर से ही 500 रुपये का बैंडेज और प्लास्टर खरीदना पड़ता है। अस्पताल में कहते हैं कि आता नहीं है। अब बेटे को ठीक करना है तो इतना खर्च तो उठा सकते हैं।
चिनेश्वरी मानिकपुरी, नर्मदा पारा रायपुर- चिनेश्वरी के जुड़वा बच्चे हुए, जिनमें से एक को फुट क्लब बीमारी है। महेश आज दो साल का गया है, लेकिन उसके पैरों से प्लास्टर उतरता ही नहीं है।
चिनेश्वरी हर 15 दिन में अस्पताल पहुंचती हैं। खुद ही प्लास्टर को भीगोती हैं और फिर प्लास्टर रूम का स्टाफ मेहरबानी करके प्लास्टर काटता है। चिनेश्वरी कहती हैं कि हम तो थोड़े सक्षम हैं जैसे-तैसे खर्च काटकर बैंडेज, प्लास्टर खरीद लेते हैं कई तो खरीद भी नहीं पाते। उनके लिए व्यवस्था होनी चाहिए।
क्या है फुट क्लब बीमारी- फुट क्लब जन्मजात बीमारी है। हड्डी रोग विशेषज्ञों का कहना है कि इसका सटीक कारण आज दिनांक तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। सबके अलग-अलग मत है।
पहला- गर्भावस्था के समय गर्भस्था के समय शिशु की पोजिशन (जेस्चर) सही नहीं होने के कारण बधाों के पैर खराब हो जाते हैं।
दूसरा- आधुनिक खानपान भी है एक कारण।
तीसरा- गर्भवस्था के दौरान स्टेराइट्स का इस्तेमाल घातक करना।
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