रायपुर । लोकसभा चुनाव की आचार संहिता हटते ही प्रदेश सरकार पर भारी दबाव रहेगा। एक तरफ, तो उस पर अपने बड़ी योजनाओं को धरातल पर उतारने की चुनौती रहेगी और दूसरी तरफ किसान से लेकर दूसरे दूसरे वर्ग और संगठनों की फिर से सरकार पर निगाह टिक जाएगी। सरकार ने किसानों को बोनस राशि तो दे दी है, लेकिन उन्हें बैंकों से कर्जमाफ का सर्टिफिकेट नहीं मिल पाया है। किसान सर्टिफिकेट चाहेंगे।
पुलिस से लेकर शिक्षाकर्मी, अनियमित कर्मचारी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता समेत दूसरे संगठन अपनी मांगों को लेकर फिर से सड़क पर उतर सकते हैं। इसका कारण यह है कि इसी साल नवंबर-दिसंबर में नगरीय निकायों का चुनाव होना है, उसके पहले हर कोई चाहेगा कि उसकी मांग पर सरकार मुहर लगा दे।
छत्तीसगढ़ का खजाना खाली होने को है। कांग्रेस सरकार का कहना है कि जब उसे सत्ता की चाबी मिली तो पूर्ववर्ती भाजपा सरकार 50 हजार करोड़ का कर्ज छोड़कर गई थी। इसके बाद जब कांग्रेस सत्ता में आई, तो उसने किसानों का कर्जमाफ, बोनस और धान का मूल्य 1750 स्र्पये से बढ़ाकर 25 सौ स्र्पये देने के लिए प्रतिभूतियां गिरवी रखकर लोन लेना पड़ा। तीन माह में कांग्रेस सरकार ने 10 हजार 400 करोड़ स्र्पये का कर्ज ले लिया है।
यह केवल प्रतिभूतियों वाला कर्ज है। विभागीय कर्ज की बात की जाए, तो वह अलग है। जैसे कि प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के लिए 900 करोड़ कर्ज लेने की तैयारी चल रही है। सरकार के कर्ज लेने पर विपक्ष भाजपा बार-बार हमला कर रही है।
विपक्ष का कहना है कि आर्थिक कुप्रबंधन का नतीजा है, जिसकी वजह से कांग्रेस सरकार को शुस्र्आत में ही ताबड़तोड़ कर्ज लेना पड़ा है। आरोप-प्रत्यारोप तो चलता रहेगा, लेकिन सच्चाई यह है कि आर्थिक संकट से जूझ रही सरकार अब तक आय के दूसरे स्त्रोत भी नहीं तलाश पाई है, जिससे कर्ज चुकाते हुए खजाने को फिर से भरा जा सके।
योजना लागू करने की चुनौती रहेगी
– नरवा, गस्र्वा, घुरवा, बाड़ी- यह मुख्यमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट है, जिसका मॉडल आरंग विधानसभा क्षेत्र के बैहार गांव में बनाया गया है। इस योजना के तहत हर गांव की आर्थिक स्थिति सुधारने का लक्ष्य रखा गया है।
– सर्वजन स्वास्थ्य का अधिकार- दुर्ग के एक अस्पताल से मॉडल प्रोजेक्ट शुरू हुआ है। इस व्यवस्था के माध्यम से हर नागरिक को न केवल इलाज, बल्कि मेडिकल जांच की सुविधा भी मुफ्त में दी जाएगी।
– 35 किलो चावल- आचार संहिता हटने के बाद पहले की तरह न केवल गरीब, बल्कि सामान वर्ग के परिवार को भी प्रतिमाह 35 किलो चावल देने की घोषणा की गई है। पहले तो हर परिवार का नया कार्ड बनाया जाएगा।
मांगों को पूरा करना आसान नहीं
अनियमित कर्मचारी- विधानसभा चुनाव के पहले से संविदा, दैनिक वेतन भोगी और प्लेसमेंट एजेंसी के कर्मचारी नियमितीकरण और समान वेतन-समान काम की मांग कर रहे हैं।
शिक्षाकर्मी- शिक्षाकर्मी नियमितीकरण की लंबे समय से मांग कर रहे हैं। अब बाकी खाली पदों पर नियमित शिक्षकों की भर्ती की मांग भी हो रही है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका रोजी के आधार पर भुगतान के बजाए मासिक भुगतान की मांग कर रहे हैं।
चिटफंड घोटाले के शिकार-चिटफंड कंपनियों में एक करोड़ लोगों के 5000 करोड़ स्र्पये डूब गए हैं, सरकार ने पैसा वापस दिलाने का वादा किया है।
पुलिस कर्मी-पुलिस कर्मियों को साप्ताहिक अवकाश देने की घोषणा हो चुकी है, लेकिन व्यवस्था लागू नहीं हो पाई है। भत्ता बढ़ाने की भी मांग लंबित है।
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