रायपुर । लोकसभा चुनाव परिणाम आते ही छत्तीसगढ़ में पूर्ववर्ती सरकार के काले कारनामों को धड़ाधड़ उजागर करने वाली है। कांग्रेस भवन के राजनीतिक हलकों में यह सुगबुगाहट पिछले एक सप्ताह से कांग्रेसियों में गोपनीय चर्चा में सामने आई है। कांग्रेसी नेता तो यहां तक कह रहे है कि रमनसिंह ने जो जो बैक डेट में फाइल साइन किए उसकी भी जानकारी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को हो गई है।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शपथ ग्रहण करने साथ ही तत्कालीन मुख्य सचिव अजय सिंह को तलब किया और चुनाव परिणाम आने के सात दिनों के अंतराल में तत्कालीन मुख्यमंत्री डा. रमनसिंह ने जिन महत्वपूर्ण फाइलों को बैक डेट में हस्ताक्षर किए उसकी जानकारी मंगाने के साथ मुख्य सचिव अजय सिंह से सारे विभागीय फाइल भी निकलवाई है। सूत्र बताते है कि भूपेश सरकार सत्ता परिवर्तन के बाद तत्कालीन रमन सिंह सरकार ने अपने काले कारनामों को दबाने के लिए शपथ ग्रहण से पहले सभी महत्वपूर्ण फाइलों में बैक डेट में हस्ताक्षर किए है। जिसे सत्ता संभालने के बाद भूपेश बघेल ने चिन्हाकिंत कर लिया है। कांग्रेसियों का तो यहां तक कहना है कि यदि भूपेश बघेल उन फाइलों के मुद्दे को लेकर लोकसभा चुनाव में मोर्चा खोल देते तो रमनसिंह सहित कई तत्कालीन मंत्रियों को लेने के देने पड़ सकते थे।
भूपेश बघेल ने बड़ी सोच और राजनीतिक सुचिता का परिचय दिया
लेकिन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बड़ी सोच और राजनीतिक सुचिता का परिचय देते हुए उन फाइलों को अध्ययन के लिए अपने पास रख लिया। अब 23 तारीख को चुनाव परिणाम आने वाले है। राजनीतिक दौड़धूप से निवृत्त होने के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तत्कालीन सरकार के काले कारनामें को रोज उजागर करने वाली है। मुख्यमंत्री बघेल ने राजनीतिक सूझबूझ का परिचय देते हुए इसे लोकसभा चुनाव में आसानी से भुना सकते थे, लेकिन भूपेश बघेल न्याय संगत कार्रवाई पर विश्वास रखते है, इसलिए उन्होंने उन सभी पुराने विभागीय घोटाले जिन पर बैक डेट पर रमनसिंह के हस्ताक्षर हुए भंड़ाफोड़ कर सकते थे, जिससे भाजपा की रही सही लुटिया भी डूब सकती थी। लेकिन वे दोहरी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष होने के कारण लोकसभा चुनाव में व्यस्त हो गए। समयाभाव के चलते जल्दबाजी कोई काम नहीं करना चाहते थे। उम्मीदवारों के क्षेत्र में प्रचार की जिम्मेदारी की भी भूपेश बघेल पर थी। लोकसभा चुनाव संपन्न होते ही राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी संरक्षक सोनिया गांधी के चुनाव क्षेत्र में व्यस्त हो गए । लगातार राष्ट्रीय अध्यक्ष और राष्ट्रीय महासचिव के साथ यूपी, उडि़सा, झारखंड, मध्यप्रदेश में प्रचार और समर्थन हासिल करने में व्यस्त रहे। इस कारण इन सभी घोटालों उजागर नहीं किया। राजीव भवन में तगड़ी घुसपैठ करने वाले नेताओं की मानें तो 15 मई को मुख्यमंत्री जैसे ही प्रवास से लौटेंगे, पुराने सबी फाइलों का अध्ययन करेंगे और 23 मई को चुनाव परिणाम आने के बाद धड़ाधड़ उन मामलों को उजागर कर जनता के सामने भाजपा सरकार के 15 साल के काम काज का लेखा जोखा रखेंगे जिसमें उन्होंने सत्ता जाने के बाद भी मोह नहीं चोड़ पाए और पुराने डेट में पेंडिंग पड़े फाइलों को सीएम हाउस में बैठकर निपटाते रहे और बहाना बना दिया कि अभी बंगला तैयार नहीं हुआ है इसलिए कुछ दिन आर सीएम हाउस में रहेंगे।
अब पूर्व सीएस अजय सिंह पर कसेगा शिकंजा
सत्ता परिवर्तन के बाद तक अजय सिंह ही मुख्य सचिव रहे है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सबसे पहले अजय सिंह को ही तलब किया और राज्य के विभागीय ढांचे की जानकारी मांगी । जिसमें खास तौर पर भूपेश बघेल ने पेंडिंग फाइलों की सूची मांगी। तब पता चला कि कोई भी फाइल पेंडिंग नहीं है। तब मुख्यमंत्री को खटका कि कैसे पेंडिंग फाइल नहीं होगी। सत्ता परिवर्तन के एक सप्ताह तक मुख्यमंत्री पद के लिए दिल्ली दौड़ के चलते पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमनसिंह ने फायदा उठाते हुए सारे पेंडिंग फाइलों को बैक डेट पर हस्ताक्षर कर निपटा दिए। यह बात भूपेश बघेल को हजम नहीं हुआ, उन्होंने तत्काल सुनील कुजूर को मुख्य सचिव नियुक्त कर पुराने सारे फाइलों की स्टडी करने को कहा तब यह बात सामने आया कि पूर्व सीएस ने भी झूठ बोला कि कोई पेंडिंग फाइल नहीं है। दरअसल सारे पेंडिग फाउलों को बैक डेट में हस्ताक्षर कर डा. रमनसिंह ने निपटा दिया था। जिसमें सबसे ज्यादा वित्तीय घोटाले, राजस्व संबंधी जमीन के मामले, उद्योगों को एनओसी देने के मामले, बिल्डरों के जमीन कब्जा के मामले थे। नियुक्ति और प्रमोशन संबंधी फाइल थे। जिसमें अजय सिंह की पत्नी की नियुक्ति का मामला, सीएम के प्रमुख सचिव अमनसिंह की संविदा नियुक्ति का मामला, स्टेट गैरेज में मंत्रियों के लिए नई गाड़ी खरीदी का मामला शामिल है।
समुंद सिंह के पास समुंदर जैसा पैसा, सीएम के पास पहुंची फाइल
आबकारी विभाग से रिटायर्ड ओएसडी की तथाकथित नियुक्ति और उनके अधिकार को लेकर सरकार समीक्षा कर चुकी है। ओएसडी होने के बाद भी समुंद सिंह आबकारी मंत्री से भी पावरफुल थे, सारे निर्णय उनके ही मार्ग दर्शन में लिया जाता था, समुंद सिंह ही तय करता था, कि कौन सा ब्रांड कौन सी डिस्लरी से शराब बनवाना है और शराब खरीदना है। जिससे सरकार को अधिक से अधिक राजस्व मिल सके। इसके आड में समुंद सिंह मंत्री से लेकर अधिकारियों को रेवड़ी बांटा करता था।
रायपुर शहर के सहकारी बैंकों में हुए घोटाले के खुलेगे पोल
आरटीआई एक्टीविस्टों की टीम जल्द ही प्रदेश के सहकारी बैंकों में हुए घोटाले की पोल खोलने वाली है। जनता से रिश्ता को मिली जानकारी के अनुसार कर्ज माफी से लेकर कर्ज देने के मामले में किसानों के साथ बैंक अधिकारियों ने जो घोटाला किया है उसकी जानकारी एकत्रित की है। जिसका सिलसिले वार प्रकाशन किया जाएगा। आरटीआई एक्टीविस्ट अब्दुल वाहिद ने बताया कि फिल हाल अभी राजधानी के सहकारी बैंकों में हुए गड़बडिय़ों को उजागर किया जाएगा जिसमें कालर खड़े कर किसानों की कर्ज माफी, व्यवसायिक ऋण जो गरीबों को दिया गया उसकी वसूली की स्थिति में गड़बड़ी उजागर हुई है। सहकारी बैंक के स्वयंभू अध्यक्ष और प्रबंधकों ने अपने अधिकारों का किस तरह दुरूपयोग किया खुलासा किया जाएगा।
