
रायपुर । भैंसथान की करोड़ों की विवादित जमीन अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद नगर निगम के स्वामित्व में आ चुकी है। जिस पर अब मल्टी काम्प्लेक्स बनना तय माना जा रहा है। हाईकोर्ट ने निगम के पक्ष में फैसला देकर पूर्व में नियुक्त कंस्ट्रक्शन कंपनी को बेदखल कर दिया है। आयुक्त शिव अनंत तायल के बताया कि इस जमीन के स्वामित्व को लेकर कई सालों से लगातार कोर्ट केस चल रहा था लेकिन अब कोर्ट के आदेश के अनुसार निगम के पास इस जमीन पर पूरा स्वामित्व हो गया है। वही इस अब इस जगह पर कमर्शियल काम्प्लेक्स बनाने की तैयारी में नगर निगम लगा हुआ हैं। 4 जून को बोर्ड की मीटिंग में आखिरी फैसला ले लिया गया है। शहर के रिहायशी पॉश इलाके समता कॉलोनी में बसे एक लाख स्क्वायर फीट पुराने भैंसथान को वर्षो पहले बड़े प्रोजेक्ट्स के चलते नगर निगम ने हटा दिया था। वही शासन प्रशासन कागजों पर ही प्रोजेक्ट्स निर्माण कर रही हकीकत में तो साल बीतने के साथ ही अब भी वह ज़मीन खाली पड़ी हुई हैं।
कमर्शियल काम्प्लेक्स से बढ़ेगा राजस्व : भैंसतान में नगर निगम अब इस पर कमर्शियल काम्प्लेक्स बनाने की तैयारी में लगा हुआ है निगम के राजस्व बढ़ोत्तरी में यह काम्प्लेसक्स सबसे बड़ा स्रोत बनेगा। निगम की यह राजधानी में सबसे बड़ा प्रोजेक्ट है जिसमें नगर निगम को सबसे अधिक लाभ होने वाला है। शहर के बीचोबीच होने के कारण ट्रांसपोर्ट के साथ आसपास रेलवे स्टेशन होने का फायदा इस काम्प्लेक्स को मिलना तय माना जा रहा है।
निगम की कवायद शुरू : भैंसथान को लेकर नगर निगम की कवायद तेज हो गई है। 4 जून को हुई बैठक में कॉमर्शियल काम्प्लेक्स बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिलने की खबर है। 2 हफ्ते बाद इस प्रोजेकेट को देखने के बाद इस पर स्वीकृति दे दी जाएगी। आखिर बार नगर निगम ने भैंसथान की जगह को निजी कंपनी सोम कंपनी को 32 करोड़ की लीज पर कमर्शियल बनाने के लिए दिया था ,पर कंपनी ने 10 करोड़ रूपए जमा तो कर दिए पर कमर्शियल काम्प्लेक्स की बीम तक नहीं डाली हैं। नगर निगम और कंपनी के बीच चल रहे विवाद में हाईकोर्ट ने निगम के हक़ में फैसला किया हैं। वही निगम ने भी अब पूरी तरह से भैंसथान पर कमर्शियल काम्प्लेक्स बनाने की तैयारी शुरू कर दी हैं।
अघोषित डम्पिंग यार्ड : निगम अपनी कागजी प्रक्रिया को पूरा करने में लगा हुआ है तो वही वर्तमान में वहां के रहवासी भैंसथान की खाली जगह को डंपिंग यार्ड समझकर वहां कचरे डाल रहे हैं क्योंकि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की गाड़ी वहां के इलाको में डोर टू डोर कचरा कलेक्ट नहीं कर पाती हैं, इसलिए लोग यहां कचरा डंप करते हैं और यही से गाड़ी कचरा कलेक्ट कर लेती हैं। इसके साथ ही शाम लगते ही वहां असामाजिक तत्वों का डेरा भी लगा रहता है जिससे वहां के आस-पास लोग परेशान रहते हैं।
सबसे पुराने मीडिया घराने के आंदोलन का क्या?
उक्त जमीन पर अर्से से एक मीडिया घराना ऑक्सीजोन बनाने को लेकर मुहिम छेड़ा हुआ था, अब जब उस मीडिया से संबंधित व्यक्ति की शासन में भी भागीदीरी है। तब ऐसा क्या हुआ कि पर्यावरण के लिए छोड़ी गई जमीन पर आक्सीजोन या उद्यान बनाने का कांसेप्ट बदलकर उसका व्यावसायिक इस्तेमाल करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इस जमीन का जब भी व्यावसायिक इस्तेमाल करने की बात आई तब-तब पिछले 25-30 सालों से उक्त मीडिया घराने ने विभिन्न सामाजिक तथा पर्यावरणवादी संगठनों को अपने पक्ष में जोड़कर कामर्शियल काम्प्लेक्स बनाने के खिलाफ समय-समय पर आंदोलन चलाया। कामर्शियल काम्प्लेक्स के प्रस्ताव पर समता कालोनी व क्षेत्र के निवासी चर्चा कर रहे हैं कि अब तो संबंधित मीडिया घराने से जुड़ा व्यक्ति सरकार में शामिल है। तब तो आसानी से उक्त जमीन पर आक्सीजोन या उद्यान बनाया जा सकता है। फिर इसके लिए पहल क्यों नहीं हो रहा… लोग इसे संदेह की नजर से देख रहे हैं।
स्मार्ट सिटी के तहत हम वहां के जगह पर कमर्शियल काम्प्लेक्स बनाने की तैयारी में जुटे हुए हैं वही इस काम्प्लेक्स के बनने से राजस्व बढ़ेगा और बेहतर काम हो पायेगा। इसके अलावा यहां के लोकैलिटी को देखते हुए यहां पहले गार्डन बनाने के प्रोजेक्ट्स थे पर अब यहाँ कमर्शियल काम्प्लेक्स पर काम किया जायेगा। बोर्ड मीटिंग में ही पुराने भैंसथान के जमीन का फैसला होगा।
– शिव अनंत तायल, निगम आयुक्त
