panchayattantra24.-रायपुर। आदिवासी बहुल नारायणपुर जिले में स्थापित पुनर्वास केंद्र, लाइवलीहुड कॉलेज नारायणपुर, आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए एक नई उम्मीद का केंद्र बन चुका है। यहां न केवल उन्हें सुरक्षा और आश्रय मिल रहा है, बल्कि उन्हें समाज से जोड़ने और आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल भी की जा रही हैं। जिन्होंने कभी बंदूक का रास्ता अपनाया था, लेकिन आज वही लोग मुख्यधारा में लौटकर सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन जीने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
इसी क्रम में प्रशासन द्वारा पुनर्वासित लोगों को शासकीय सेवाओं का लाभ दिलाने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। हाल ही में 8 पुनर्वासित लोगों को वोटर आईडी कार्ड बनाकर वितरित किए गए, जिससे वे लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बन सके। इसके अलावा 25 लोगों का ऑनलाइन पंजीयन किया गया और 40 लोगों के फॉर्म-6 भरवाए गए। यह पहल केवल दस्तावेज बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन्हें एक पहचान देने और समाज में बराबरी का अधिकार दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
कलेक्टर नम्रता जैन के पुनर्वास केंद्र के निरीक्षण के दौरान एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने इस बदलाव को और भी गहराई से दर्शाया। यहां मौजूद 40 पुनर्वासित आत्मसमर्पित नक्सलियों ने उनसे एक विशेष मांग रखी कि वे ट्रैक्टर चलाना सीखना चाहते थे, साथ ही ट्रैक्टर की मरम्मत और रखरखाव का प्रशिक्षण भी लेना चाहते थे। यह मांग इसलिए भी खास थी क्योंकि इनमें से कई लोग ऐसे थे, जिन्होंने अपने जीवन में कभी साइकिल तक नहीं चलाई थी।
कलेक्टर नम्रता जैन ने इस मांग को गंभीरता से लिया और बिना किसी देरी के तत्काल कार्रवाई करते हुए सोमवार से ही प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करवा दिया। अब ये सभी लोग नियमित रूप से प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं, जिसमें उन्हें ट्रैक्टर चलाने की बारीकियां, उसकी तकनीकी जानकारी, मरम्मत और रखरखाव के तरीके सिखाए जा रहे हैं।
यह प्रशिक्षण केवल एक कौशल विकास कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह उनके जीवन को नई दिशा देने का माध्यम बन रहा है। ट्रैक्टर चलाना सीखने के बाद वे खेती-किसानी, परिवहन या अन्य कार्यों के माध्यम से अपनी आजीविका कमा सकेंगे। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि वे आत्मसम्मान के साथ समाज में अपनी नई पहचान भी बना सकेंगे।
आज इन पुनर्वासित लोगों के जीवन में स्पष्ट बदलाव देखा जा सकता है। जहां पहले उनके जीवन में अस्थिरता और डर था, वहीं अब उनके चेहरों पर आत्मविश्वास, संतोष और भविष्य के प्रति उम्मीद दिखाई देती है। वे राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित हो रहे हैं और धीरे-धीरे एक सामान्य नागरिक की तरह जीवन जीने की ओर अग्रसर हैं।
नारायणपुर का यह पुनर्वास केंद्र अब केवल एक पुनर्वास स्थल नहीं रहा, बल्कि यह परिवर्तन, विश्वास और नई शुरुआत का प्रतीक बन गया है। यह साबित करता है कि यदि सही दिशा, अवसर और सहयोग मिले, तो कोई भी व्यक्ति अपने अतीत को पीछे छोड़कर एक उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़ सकता है।
Subscribe to Updates
Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.
