रायपुर। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के लिए इस हफ्ते अगर कोई नाम तय नहीं हो पाया तो लोकसभा चुनाव तक मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ही संगठन की कमान भी संभाले रहेंगे। पार्टी के अंदरखाने इस बात की चर्चा तेज हो गई है। इसकी वजह यह भी है कि अभी तक पार्टी हाईकमान ने प्रदेश अध्यक्ष बदलने को लेकर स्थानीय नेताओं को कोई संकेत भी नहीं दिया है।
सोमवार को कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी और प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया के दिल्ली लौटने के बाद प्रदेश अध्यक्ष के पद पर नए नाम की घोषणा होने की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। राहुल ने मुख्यमंत्री बघेल को फोन करके किसान आभार रैली के सफल आयोजन पर बधाई दी।
उन्होंने और पुनिया ने मुख्यमंत्री या किसी भी वरिष्ठ नेता से प्रदेश अध्यक्ष पर नई नियुक्ति को लेकर चर्चा ही नहीं की। लोकसभा चुनाव को अब समय कम है, इसलिए पार्टी के उच्च सूत्रों का कहना है कि तीन-चार दिन में हाईकमान कोई फैसला ले सकता है।
हाईकमान इस उलझन में है कि प्रदेश अध्यक्ष बदल दिया गया तो नया अध्यक्ष चुनाव के समय जिम्मेदारी का निर्वहन सही तरीके से कर पाएगा या नहीं? कांग्रेस ने बघेल के नेतृत्व में विधानसभा चुनाव लड़ा तो उम्मीद से ज्यादा सीटों पर जीत मिली है।
इस कारण हाईकमान को सोचना पड़ रहा है। दूसरी तरफ, यह भी विचार हो रहा है कि बघेल मुख्यमंत्री के साथ पीसीसी अध्यक्ष की भूमिका निभा पाएंगे या नहीं? इधर, राहुल ने बघेल की जिम्मेदारी बढ़ाने का फैसला लिया है।
वे बघेल को अपने साथ बिहार, ओडिशा समेत दूसरे राज्यों में ले जाना चाहते हैं, ताकि वहां कांग्रेसजनों को बघेल बंपर जीत का फॉर्मूला, घोषणापत्र बनाने और सरकार बनने पर वादों को जल्द पूरा करने की नीति बता सकें। बघेल के लिए दिक्कत यह भी है कि अगले महीने से विधानसभा का बजट सत्र शुरू होने वाला है, वित्त मंत्री भी खुद हैं, इसलिए सत्र के दौरान उन्हें विधानसभा में ही रहना होगा। इन सब चीजों को देखते हुए बघेल खुद राहुल से कई बार पीसीसी अध्यक्ष पर नई नियुक्ति की अपील कर चुके हैं।
मध्यप्रदेश में भी पीसीसी अध्यक्ष ही सीएम जिस तरह से बघेल पीसीसी अध्यक्ष के साथ मुख्यमंत्री बना दिए गए हैं, उसी तरह से मध्यप्रदेश में कमलनाथ पीसीसी अध्यक्ष के साथ मुख्यमंत्री का पद भी संभाल रहे हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि दोनों राज्यों में स्थिति अलग है।
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में 90 में से 68 सीटें जीती हैं, जबकि मध्यप्रदेश में 230 विधानसभा सीटों में से कांग्रेस के कब्जे में 114 और भाजपा के कब्जे में 109 है। केवल पांच सीटों का अंतर है। इसलिए, पार्टी के उच्च सूत्रों का कहना है कि पहले मध्यप्रदेश के पीसीसी अध्यक्ष पर फैसला हो सकता है
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