दंतेवाड़ा । भूपेश सरकार में बस्तर से एकमात्र आदिवासी मंत्री कवासी लखमा की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर की गई सियासी टिप्पणी सुर्खियों में है. लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार में जुटे कवासी ने एक सभा में मोदी पर हमला बोलते हुए कहा है कि बैलाडीला की खदान बस्तर की है, यह मोदी के बाप की नहीं है. दरअसल बैलाडीला में अडानी ग्रुप को माइनिंग लीज दी गई है, जिसका बस्तर में खासा विरोध दर्ज कराया जा रहा है ।
यह पहला मौका नहीं है कि जब कवासी ने बैलाडीला में अडानी ग्रुप को दी गई माइनिंग लीज का विरोध किया हो. इससे पहले भी विधानसभा के बजट सत्र के दौरान लखमा ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा था कि बस्तर में अडानी को घुसने नहीं देंगे. उन्होंने कहा था कि कांग्रेस सरकार उद्योग विरोधी नहीं है, लेकिन गरीब, आदिवासियों का नुकसान कर हम किसी उद्योग को लगाने नहीं देंगे. चुनाव प्रचार के दौरान भी कवासी अक्सर अडानी को दी गई माइनिंग लीज का मुद्दा उठा रहे हैं.
नशे में दिन-रात डूबे हैं कवासी- रामविचार नेताम
बीजेपी से राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ बीजेपी नेता रामविचार नेताम ने कवासी लखमा के बयान पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा है कि वह जिस विभाग में काम कर रहे हैं, उस विभाग के नशे में दिन रात डूबे हुए हैं. देश के प्रधानमंत्री के खिलाफ इस तरह बयानबाजी बेहद निंदनीय है. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को यह संज्ञान लेना चाहिए और अपने मातहत मंत्री कवासी लखमा को कम से कम समझाइश दी जानी चाहिए कि मंत्रीपद की गरिमा का ध्यान रखें. उन्हें यह हिदायत दी जानी चाहिए कि भाषा कैसी होनी चाहिए. अगर उन्हें इस गरिमा का ध्यान नहीं है, तो ऐसे मंत्री को बर्खास्त कर दिया जाना चाहिए. मैं कवासी लखमा के बयान की घोर निंदा करता हूं. नरेंद्र मोदी की छवि वैश्विक नेतृत्व वाली है. ऐसे नेतृत्व के बारे में बात करना अपने आप में बहुत शर्मनाक है ।
इधर नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने भी मंत्री कवासी लखमा के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि- मंत्री की भाषा शिष्ट होनी चाहिए. सम्मानजनक होनी चाहिए. इससे पहले भी जो सरकारें काम करती रहीं और माइनिंग लीज का आबंटन करती रहीं, तो क्या वह कांग्रेस नेता के बाप की थी. यह देश की संपत्ति है, जनता की संपत्ति है ।
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