panchayattantra24.-बिलासपुर. हाईकोर्ट में डोंगरगढ़ के बहुचर्चित परिक्रमा पथ निर्माण मामले में सुनवाई हुई. कोर्ट ने कलेक्टर राजनांदगांव को पीड़ित याचिकाकर्ता के शिकायत पत्र पर सुनवाई का अवसर देते हुए परीक्षण कर निराकरण किए जाने का निर्देश जारी किया है. बता दें, कि याचिकाकर्ता की कृषि भूमि को अवैध रूप से अधिग्रहित करने के प्रस्ताव एवं प्रस्तुत शिकायत पत्र पर विभाग के द्वारा किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं किए जाने को लेकर मामला हाईकोर्ट पहुंचा है.
दरअसल, राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ के अंतर्गत बुधवारी पारा वार्ड नंबर 19 निवासी फहीम अख्तर ने अधिवक्ता अब्दुल वहाब खान के जरिए हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी कि, उसकी कृषि भूमि ग्राम छीरपानी पटवारी हल्का नंबर 29 खसरा नंबर 196/2 में स्थित है. कुछ दिन पूर्व जानकारी मिली कि, उसके उक्त खसरा नंबर की भूमि को प्रस्तावित डोंगरगढ़ परिक्रमा पथ निर्माण के लिए अधिग्रहित किए जाने कार्रवाई जारी है. जबकि याचिकाकर्ता ने इस संबंध में कोई लिखित या मौखिक सहमति नहीं दी थी. वर्तमान में याचिकाकर्ता की उक्त भूमि पर सड़क निर्माण की कार्रवाई किए जाने की तैयारी की जा रही है और याचिकाकर्ता को ज्ञापन जारी कर उसके उक्त कृषि भूमि को मनमाने अत्यधिक कम कीमत पर खरीदने के संबंध में शासन के द्वारा प्रस्ताव भी जारी कर दिया गया है. याचिकाकर्ता अपनी उक्त कृषि भूमि को बेचना नहीं चाहता और ना ही उसके बदले में किसी प्रकार का मुआवजा चाहता है.
याचिकाकर्ता ने आपत्ति करते हुए कलेक्टर जिला राजनांदगांव के समक्ष एक शिकायत पत्र भी दिया था, कि उक्त प्रस्तावित परिक्रमा पथ के लिए किसी भी प्रकार से निजी भूमि अधिग्रहित करने की कोई आवश्यकता ही नहीं है क्योंकि प्रस्तावित परिक्रमा पथ के आसपास ही पर्याप्त शासकीय एवं राजस्व भूमि उपलब्ध है, जिसके माध्यम से सड़क का निर्माण किया जा सकता है. स्वीकृत नक्शे के विरूद्ध निजी भूमि का चयन किया जाना अनुचित है. यदि सड़क निर्माण उपलब्ध राजस्व भूमि से किया जाता है तो शासन को भूमि अधिग्रहण एवं मुआवजा भुगतान में होने वाले अतिरिक्त व्यय से बचाया जा सकता है, साथ ही परिक्रमा पथ के लिए पूर्व से ही मार्ग बना हुआ है. नए मार्ग की कोई जरूरत भी नहीं है.
46 किसानों की निजी जमीन अधिग्रहण पर विवाद
लल्लूराम डॉट कॉम लगातार इस मामले को उठाता रहा है. बता दें कि डोंगरगढ़ की 55.45 करोड़ रुपये की परिक्रमा पथ परियोजना शुरुआत से ही विवादों में बनी हुई है. प्रशासन इसे धार्मिक पर्यटन और क्षेत्रीय विकास की महत्वाकांक्षी योजना बताकर 8 किलोमीटर लंबा फोरलेन मार्ग बना रहा है, जिसके लिए 46 किसानों की लगभग 6.386 हेक्टेयर निजी भूमि लेने और करीब 6.33 करोड़ रुपये मुआवजा देने का प्रस्ताव है. दूसरी ओर प्रभावित किसानों का आरोप है कि परियोजना के आसपास पर्याप्त शासकीय एवं राजस्व भूमि उपलब्ध होने के बावजूद निजी भूमि का चयन किया गया है. किसानों का कहना है कि उन्हें परियोजना का स्वीकृत रूट मैप, डीपीआर और भूमि चयन का तकनीकी आधार उपलब्ध नहीं कराया गया तथा उनकी आपत्तियों का संतोषजनक निराकरण भी नहीं हुआ. इसी बीच कांग्रेस भी खुलकर इस परियोजना के विरोध में उतर आई और मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर परिक्रमा पथ निरस्त करने, डोंगरगढ़ बाईपास निर्माण को प्राथमिकता देने, पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दे चुकी है. परियोजना को लेकर प्रशासन और विरोधी पक्ष के बीच विवाद लगातार गहराता जा रहा है.
Subscribe to Updates
Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.
