Close Menu
Panchayat Tantra 24
  • Home
  • संपादकीय
    • रायपुर
    • दुर्ग
    • बस्तर
    • बिलासपुर
    • सरगुजा
  • राष्ट्रीय
    • दिल्ली
    • छत्तीसगढ़
    • मध्य प्रदेश
  • अंतरराष्ट्रीय
  • एंटरटेनमेंट
  • खेल
  • धर्म आध्यात्म
  • बिज़नेस
  • Contact Us

Subscribe to Updates

Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

What's Hot

नेउरगाँव खुर्द बना जनभागीदारी और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक, 10 लाख रुपये से बने भव्य शहीद स्मारक एवं भारत माता प्रतिमा का लोकार्पण

June 20, 2026

विद्यारंभ अभियान से मजबूत हो रही शिक्षा की नींव, लाखों नौनिहालों के स्कूल प्रवेश का बना उत्सव

June 20, 2026

पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने में वन अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका-राज्यपाल रमेन डेका

June 20, 2026
Facebook X (Twitter) Instagram
Saturday, June 20
  • Home
  • Privacy Policy
  • Terms and Conditions
  • Contact Us
Panchayat Tantra 24
  • Home
  • संपादकीय
    • रायपुर
    • दुर्ग
    • बस्तर
    • बिलासपुर
    • सरगुजा
  • राष्ट्रीय
    • दिल्ली
    • छत्तीसगढ़
    • मध्य प्रदेश
  • अंतरराष्ट्रीय
  • एंटरटेनमेंट
  • खेल
  • धर्म आध्यात्म
  • बिज़नेस
  • Contact Us
Panchayat Tantra 24
Home » ​ तकनीक और जन-समन्वय से बदला राजस्व सेवाओं का चेहरा,एक पुरानी समस्या का नया समाधान
रायपुर

​ तकनीक और जन-समन्वय से बदला राजस्व सेवाओं का चेहरा,एक पुरानी समस्या का नया समाधान

Author AuthorBy Author AuthorJune 20, 2026No Comments6 Mins Read
Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email
Share
WhatsApp Telegram Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email Copy Link

​जब फाइलें नहीं, बल्कि जनता के द्वार खुद चलकर पहुंचा प्रशासन

panchayattantra24.-रायपुर। प्रशासनिक व्यवस्था में किसी भू-स्वामी की मृत्यु के पश्चात उनके वारिसों के नाम जमीन ट्रांसफर करने यानी ‘फौती नामांतरण’ (Mutation) को एक बेहद जटिल प्रक्रिया माना जाता रहा है। ग्रामीण अंचलों में जानकारी के अभाव, बिचौलियों के जाल और लंबी कागजी औपचारिकता के कारण ये मामले दशकों तक अदालतों में लटके रहते हैं। इससे न केवल पारिवारिक विवाद बढ़ते हैं, बल्कि कृषि क्षेत्र का विकास भी प्रभावित होता है।
​इस पारंपरिक ढर्रे को पूरी तरह बदलते हुए छत्तीसगढ़ के जनजातीय बहुल जिले बस्तर ने सुशासन का एक ऐसा ‘सक्रिय मॉडल’ (Proactive Model) प्रस्तुत किया है, जो राज्य के अन्य जिलों के लिए एक मार्गदर्शक केस स्टडी बन सकता है।
​’सक्रिय अभियान’: एक क्रांतिकारी प्रशासनिक सोच
​आमतौर पर राजस्व विभाग में यह परंपरा रही है कि जब पीड़ित परिवार आवेदन लेकर दफ्तर पहुंचता है, तब प्रक्रिया शुरू होती है। बस्तर जिला प्रशासन ने इस ‘रिएक्टिव’ (प्रतिक्रियात्मक) रवैये को बदलकर ‘प्रोएक्टिव’ (सक्रिय) रुख अपनाया। प्रशासन ने तय किया कि वह खुद चलकर जनता के दरवाजे तक जाएगा।
​इस विशेष अभियान के तहत मात्र चार महीनों के भीतर 12 जून 2026 तक संकलित आंकड़ों के अनुसार जिले के 611 गांवों से डेटा जुटाकर, लंबित फौती नामांतरण प्रकरणों का शत-प्रतिशत निराकरण कर भूमि अभिलेखों (Land Records) को अपडेट कर दिया गया है।
​प्रशासनिक तंत्र की रीढ़: जब ‘त्रिमूर्ति’ ने संभाला मोर्चा
​इस ‘प्रोएक्टिव गवर्नेंस मॉडल’ की सफलता केवल फाइलों या डिजिटल पोर्टल तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसका असली श्रेय जमीनी स्तर पर काम करने वाली प्रशासनिक कड़ियों (ग्रासरूट ब्यूरोक्रेसी) के उस अनूठे तालमेल को जाता है, जिसने सेवा की पूरी परिभाषा ही बदल दी।
​इस पूरे अभियान को एक सुव्यवस्थित पिरामिड की तरह संचालित किया गया। इसके शीर्ष पर तहसीलदार और नायब तहसीलदार मार्गदर्शक की भूमिका में थे, जो हर हफ्ते कड़ाई से मॉनिटरिंग कर रहे थे और विधिक प्रक्रियाओं को समय-सीमा के भीतर अमली जामा पहनाकर अंतिम आदेश पारित कर रहे थे। इस शीर्ष नेतृत्व के ठीक नीचे, मैदानी अमले की ‘त्रिमूर्ति’ ने इस अभियान को संभाला।
​ डेटा का प्राथमिक स्रोत ग्राम सचिव ने अपने ‘जन्म एवं मृत्यु पंजीयक’ के दायित्व का निर्वहन करते हुए पिछले 04 वर्षों में मृत हुए 17,405 व्यक्तियों की एक अचूक सूची (Line List) तैयार की। जिन मामलों में मृत्यु प्रमाण पत्र लंबित थे, वहां उन्होंने परिवारों को ये प्रमाणपत्र सुलभ कराए और जहां देरी हुई थी, वहां तहसीलदार से ‘विलम्ब पंजीयन’ की विशेष अनुमति दिलाकर नए प्रमाण पत्र जारी करवाए।
​ तकनीकी और विधिक सेतु के रूप में सचिव से सूची प्राप्त होते ही पटवारी ने छत्तीसगढ़ के डिजिटल लैंड रिकॉर्ड पोर्टल ‘भुइयां’ पर उसका मिलान किया। इससे तत्काल 8,651 ऐसे मृत व्यक्तियों की पहचान हुई जिनके नाम पर जमीन दर्ज थी। इसके बाद, पटवारी ने स्वयं आगे बढ़कर वारिसों से संपर्क कर आवेदन लिए तथा उनके विधिक उत्तराधिकार को तय करने वाला ‘वंश वृक्ष’ तैयार किया।
​ पारदर्शिता की जमीनी कसावट के लिए ग्रामीण भारत की सबसे पारंपरिक कड़ी कोटवार ने सोशल ऑडिट (सामाजिक सत्यापन) का जिम्मा संभाला। उन्होंने गांव-गांव जाकर मृतकों की सूची और पटवारी द्वारा तैयार किए गए वारिसों के ‘वंश वृक्ष’ का भौतिक सत्यापन किया। उनके इस जमीनी ज्ञान के कारण किसी भी प्रकार के फर्जीवाड़े या अपात्र दावों की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो गई।
बस्तर की तहसीलों में सुशासन का ‘सेचुरेशन’
​जिले की सभी 10 तहसीलों के कुल 639 गांवों में से 611 गांवों को इस मुहिम से जोड़कर पूरी पारदर्शिता के साथ काम किया गया। मैदानी अमले द्वारा चिन्हित किए गए कुल 8,651 आवश्यक मामलों में से रिकॉर्ड 8,241 मामलों में ऑनलाइन नामांतरण पंजी (MD सीरिज) के तहत विधिक प्रक्रिया इश्तेहार प्रकाशन व दावा-आपत्ति निराकरण पूर्ण कर आदेश पारित किए जा चुके हैं। अब पूरे जिले में महज 410 प्रकरण ही लंबित बचे हैं।
​बस्तर जिले के इस विशेष अभियान के तहत सभी 10 तहसीलों में बेहतरीन समन्वय और तत्परता देखने को मिली है। आंकड़ों के लिहाज से तोकापाल तहसील इस पूरी मुहिम में सबसे आगे रही, जहां जिले में सर्वाधिक 1,553 मामले चिन्हित किए गए और रिकॉर्ड 1,454 मामलों का सफलतापूर्वक निपटारा किया गया। वहीं बकावण्ड तहसील अपने 1,153 मामलों में से 1,142 को पूर्ण कर शत-प्रतिशत ‘सेचुरेशन’ (सौ फीसदी लक्ष्य) के बिल्कुल करीब पहुंच चुकी है, जहां अब केवल 11 मामले ही शेष हैं।
​प्रशासनिक दक्षता के मामले में बस्तर तहसील ने भी 1,000 से अधिक मामलों की दहलीज को पार करते हुए अपने 1,087 प्रकरणों में से 1,019 का निराकरण कर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की। जिला मुख्यालय से जुड़ी जगदलपुर तहसील का प्रदर्शन बेहद अनुकरणीय रहा, जिसने अपने 1,061 मामलों में से 1,057 को निपटा लिया है और वहां अब महज 4 प्रकरण लंबित हैं। इसी तरह, भानपुरी तहसील ने मैदानी स्तर पर तीव्र प्रगति दिखाते हुए 1,018 संवेदनशील मामलों में से 959 का कार्य पूर्ण कर लिया है।
​भौगोलिक और सामाजिक रूप से भिन्न अन्य क्षेत्रों में भी यह रफ्तार कायम रही। लोहण्डीगुड़ा तहसील अपने 805 मामलों में से 799 का निपटारा कर पूर्ण संतुष्टि की दहलीज पर खड़ी है, जहां सिर्फ 6 मामले बाकी हैं। करपावण्ड (565 में से 504 मामले) और नानगुर (544 में से 518 मामले) तहसीलों ने तय समय-सीमा के भीतर विधिक प्रक्रियाओं का त्वरित संपादन कर भू-अभिलेखों को अपडेट करने में सफलता पाई है।
​अंतिम छोर पर स्थित दुर्गम और अंदरूनी इलाकों से घिरे दरभा अंचल ने अपनी चुनौतियों के बावजूद सराहनीय प्रयास किया और 484 आवश्यक मामलों में से 452 का निपटारा सुनिश्चित किया। वहीं, सीमित संसाधनों के बीच बेहतरीन तालमेल का उदाहरण पेश करते हुए बास्तानार तहसील ने भी अपने 381 चिन्हित मामलों में से 337 भू-स्वामियों के रिकॉर्ड पूरी तरह दुरुस्त कर दिए हैं।
​बस्तर का यह प्रयोग केवल जमीन के कागजात दुरुस्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके दूरगामी सामाजिक और आर्थिक प्रभाव हैं। डिजिटल ट्रैकिंग (MD सीरिज) और स्वतः संज्ञान (Suo Motu) प्रक्रिया के कारण बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह समाप्त हो गई। समय-सीमा के भीतर आदेश पारित होने से आदिवासियों और किसानों को मानसिक व आर्थिक प्रताड़ना से मुक्ति मिली है। भूमि रिकॉर्ड अपडेट होने से अब ये नए भू-स्वामी किसान क्रेडिट कार्ड (KCC), कृषि सब्सिडी और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए तुरंत पात्र हो गए हैं।
​ ​इस अभियान की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि यदि प्रशासनिक नीतियां संवेदनशील और परिणाम-मूलक (Result-Oriented) हों, तो सबसे कठिन सुधार भी संभव हैं। प्रथम चरण 04 वर्ष के लंबित मामले की इस अभूर्वपूर्व सफलता के बाद, बस्तर जिला प्रशासन अब इसके आगामी चरण की ओर कदम बढ़ा चुका है, जिसके तहत पिछले 10 वर्षों के लंबित मामलों का शत-प्रतिशत सेचुरेशन करने का लक्ष्य रखा गया है।
​बस्तर का यह ‘प्रोएक्टिव गवर्नेंस मॉडल’ राज्य के उन सभी ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों के लिए एक प्रकाश स्तंभ है, जहां राजस्व सुधारों को अमली जामा पहनाना आज भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

Share. WhatsApp Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Copy Link Telegram Email
Author Author
  • Website

Related Posts

नेउरगाँव खुर्द बना जनभागीदारी और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक, 10 लाख रुपये से बने भव्य शहीद स्मारक एवं भारत माता प्रतिमा का लोकार्पण

June 20, 2026

विद्यारंभ अभियान से मजबूत हो रही शिक्षा की नींव, लाखों नौनिहालों के स्कूल प्रवेश का बना उत्सव

June 20, 2026

पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने में वन अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका-राज्यपाल रमेन डेका

June 20, 2026
Advertisement
× Popup Image


RO No. 13728/1

Recent Posts

  • नेउरगाँव खुर्द बना जनभागीदारी और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक, 10 लाख रुपये से बने भव्य शहीद स्मारक एवं भारत माता प्रतिमा का लोकार्पण
  • विद्यारंभ अभियान से मजबूत हो रही शिक्षा की नींव, लाखों नौनिहालों के स्कूल प्रवेश का बना उत्सव
  • पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने में वन अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका-राज्यपाल रमेन डेका
  • राज्यपाल रमेन डेका ने लोकभवन में बेमेतरा जिले के ग्राम मरका के स्कूल के लिए डिजिटल बोर्ड प्रदान किया
  • पर्यावरण, जल संरक्षण और जनजागरूकता में रोटरी क्लबों की बढ़ेगी भूमिका, राज्यपाल रमेन डेका ने दिया सामाजिक अभियानों का आह्वान

Recent Comments

No comments to show.

 

Panchayat Tantra 24

panchayattantra24.com एक ऐसा न्यूज बेबसाईट है, जिसके माध्यम से विभिन्न दैनिक समाचार पत्र एवं अन्य पत्रिका को समाचार एवं फोटो फीचर की सेवायें न्यूनतम शुल्क में प्रदान किया जाता है। साथ ही लिंक के द्वारा भी अन्य पाठकों को फेसबुक, व्हाट्सएप, यूट्यूब व अन्य संचार माध्यम से प्रतिदिन समय-समय पर न्यूज भेजा जाता है।

Email Us: panchayattantra24@gmail.com
Contact: +91 7000291426

Categories

  • Uncategorized
  • अंतरराष्ट्रीय
  • एंटरटेनमेंट
  • खेल
  • छत्तीसगढ़
  • दिल्ली
  • दुर्ग
  • धर्म आध्यात्म
  • बस्तर
  • बिज़नेस
  • बिलासपुर
  • मध्य प्रदेश
  • रायपुर
  • राष्ट्रीय
  • संपादकीय
  • सरगुजा

Contact Details

Owner and Editor
Kanya Kumari pandey

Mobile No.
7000291426

Address
Subhas Nagar Near Jal Vihar Colony Raipur Chhatisgarh

© 2026 Designed by RT Internet Services.
  • Home
  • Privacy Policy
  • Terms and Conditions
  • Contact Us

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.