panchayattantra24.-कवर्धा. 15 अगस्त को भारत अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है, जिसे भव्य बनाने के लिए तैयारियां शुरू हो गई हैं. इस बीच छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले से कुछ तस्वीर सामने आईं, जिसने सोचने पर मजबूर कर दिया है. ग्राम पंचायत राजाढार के आश्रित गांव बेलापानी में बैगा जनजाति के करीब 35 परिवार बारिश में दूषित पानी पीने को मजबूर हैं. ग्रामीणों का कहना है कि कई बार मांग के बावजूद स्वच्छ पानी की व्यवस्था नहीं मिल सका है. दक्षिण-एशियाईऔर प्रवासी
35 बैगा परिवारों के सामने साफ पानी का संकट
यह तस्वीरें कबीरधाम जिले के बेलापानी गांव की हैं, जहां बरसात के बीच नदी का मटमैला और दूषित पानी ही ग्रामीणों की प्यास बुझा रहा है. बैगा जनजाति के करीब 35 परिवारों के सामने पीने के साफ पानी का गंभीर संकट है. महिलाएं और बच्चे रोजाना इसी नदी से पानी भरकर घर लाते हैं. ग्रामीणों ने बताया कि कई बार गंदा पानी पीने से स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता है. बाढ़ आने से पानी की और ज्यादा समस्या होती है.
ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत और प्रशासन के अधिकारियों से हैंडपंप लगाने की मांग की. उन्होंने बताया कि वह उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा तक भी अपनी समस्या पहुंचा चुके हैं, लेकिन आज तक न हैंडपंप लगा और न ही कोई स्थायी पेयजल व्यवस्था की गई.
मौत हुई तो कौन जिम्मेदारी?
बेलापानी के ग्रामीणों ने कहा कि दूषित पानी पीने से किसी ग्रामीण की जान जाती है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा. उन्होंने मांग की है कि उन्हें सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि तत्काल हैंडपंप और सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था चाहिए. समय रहते पेयजल की व्यवस्था नहीं की गई तो स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं बढ़ सकती हैं.
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