panchayattantra24.-रायपुर। छत्तीसगढ़ के प्रमुख शैक्षणिक संस्थान दुर्गा महाविद्यालय में एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यहां 500 से अधिक छात्र-छात्राओं और महाविद्यालय के प्राध्यापकों ने संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 27 नवंबर को “अंतरराष्ट्रीय बाल विवाह निषेध दिवस” के रूप में मान्यता मिलने की ऐतिहासिक खुशी का जश्न मनाया। इस वैश्विक उपलब्धि ने भारत और छत्तीसगढ़ दोनों का मान पूरी दुनिया में बढ़ाया है।
कार्यक्रम की शुरुआत बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता का संदेश देते हुए विशेष पोस्टरों के विमोचन और प्रदर्शन के साथ हुई। इस दौरान वक्ताओं ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन’ (JRC) के निरंतर प्रयासों और उस लंबी संघर्ष यात्रा पर विस्तार से प्रकाश डाला, जिसके परिणामस्वूप आज इस सामाजिक कुप्रथा के खिलाफ भारत की मुहिम को वैश्विक स्तर पर स्वीकार किया गया है।
इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. प्रतिभा मुखर्जी साहूकार ने जेआरसी (JRC) के प्रयासों की भूरी-भूरी प्रशंसा की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि जेआरसी की कड़ी मेहनत और समर्पण का ही परिणाम है कि भारत की भूमि से शुरू हुआ यह अभियान आज पूरी दुनिया के लिए एक मार्गदर्शक बन चुका है। यह हम सभी भारतीयों के लिए बेहद गर्व का क्षण है कि राह भारत ने दिखाई और पूरी दुनिया ने उसे स्वीकार किया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन’ के राज्य समन्वयक विपिन ठाकुर ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए बाल विवाह के गंभीर दुष्परिणामों, इससे बचाव के कानूनी उपायों और बच्चों की सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह वैश्विक मान्यता विश्व पटल पर भारत को बाल अधिकारों की रक्षा के क्षेत्र में एक लीडर के रूप में स्थापित करती है। संरक्षण अधिकारी संजय निराला ने उपस्थित छात्रों को बाल विवाह के खिलाफ शपथ भी दिलाई।
कार्यक्रम में प्राचार्य डॉ. प्रतिभा मुखर्जी साहूकार, डॉ. सुनीता चंसोरिया, जिला बाल संरक्षण इकाई से गैर-संस्थागत संरक्षण अधिकारी संजय निराला, सामाजिक कार्यकर्ता गोरखनाथ पटेल और वरिष्ठ पत्रकार सरिता दुबे विशेष रूप से उपस्थित रहे। इनके साथ महाविद्यालय के सभी प्राध्यापक, अध्यापक और बड़ी संख्या में उत्साहित छात्र-छात्राएं मौजूद रहे, जिन्होंने इस ऐतिहासिक सफलता पर अपनी एकजुटता और खुशी का इजहार किया।
