panchayattantra24.-रायपुर। बस्तर जिले के दुर्गम और सुदूर वनांचल क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की दिशा में जिला प्रशासन ने आज एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। लोहंडीगुड़ा विकास खंड के अंतिम छोर पर स्थित ग्राम मालेवाही में आयोजित विशेष स्वास्थ्य शिविर ने न केवल ग्रामीणों को बीमारियों से राहत दी, बल्कि विकास और विश्वास की एक नई इबारत भी लिखी। कलेक्टर आकाश छिकारा के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीम दुर्गम रास्तों और भौगोलिक चुनौतियों को पार कर मालेवाही पहुँची, जहाँ डिजिटल तकनीक के माध्यम से ग्रामीणों का उच्च स्तरीय परीक्षण किया गया।
इस शिविर का सबसे प्रभावशाली पहलू पोर्टेबल डिजिटल एक्सरे मशीन का उपयोग रहा, जिसने घने जंगलों के बीच भी आधुनिक लैब जैसा अनुभव प्रदान किया। जहाँ पूर्व में एक एक्सरे के लिए ग्रामीणों को कई घंटों का सफर तय कर जिला अस्पताल जाना पड़ता था, वहीं इस सुविधा ने मौके पर ही फेफड़ों के संक्रमण और अन्य जटिलताओं की सटीक पहचान को संभव बना दिया। विशेष रूप से प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत आधुनिक तकनीक के मशीन ने संदिग्ध मरीजों की त्वरित स्क्रीनिंग की, जिससे उपचार की प्रक्रिया में लगने वाले समय को काफी कम कर दिया गया है। यह तकनीक न केवल समय बचाती है, बल्कि रेडियोलॉजी की गुणवत्ता को भी वैश्विक मानकों के अनुरूप सुदूर गाँवों तक पहुँचा रही है।
चिकित्सा दल ने न केवल रोगों का उपचार किया, बल्कि स्थानीय बोली में ग्रामीणों को स्वच्छता और पोषण के प्रति जागरूक भी किया। शिविर के दौरान गंभीर रोगों की स्क्रीनिंग के साथ-साथ मौसमी बीमारियों की दवाइयों का निःशुल्क वितरण किया गया और गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों के स्वास्थ्य की विशेष जाँच की गई।
ग्रामीण परिवेश में तकनीक के इस समावेश को देखकर स्थानीय निवासियों में भारी उत्साह देखा गया। बुजुर्गों और ग्रामीणों का कहना था कि गाँव में ही डॉक्टर और बड़ी मशीनों के पहुँचने से उन्हें मानसिक और आर्थिक राहत मिली है। प्रशासन का यह समन्वित प्रयास स्वस्थ बस्तर के संकल्प को धरातल पर उतारने की दिशा में एक सशक्त कदम है, जो दर्शाता है कि तकनीक और सेवा भावना के संगम से विकास की धारा अब अंतिम व्यक्ति तक पहुँच रही है।
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