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Author: admin
कानपुर । भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह ने आज कानपुर में सभा को संबोधित किया। रमन सिंह ने कानपुर देहात में आयोजित शक्ति केंद्र सम्मेलन को संबोधित किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने रमन सिंह का जोरदार स्वागत किया। रमन सिंह ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि एक बार फिर से नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाना है ।
मल्टीमीडिया डेस्क। हिंदू धर्मशास्त्रों के अनुसार मानव जीवन को सोलह संस्कारों में पिरोया गया है। पहला संस्कार गर्भाधान संस्कार है जिसके जरिए मानव जीवन की प्रक्रिया प्रारंभ होती है। इसी तरह दूसरे संस्कारों को उम्र के हिसाब से पूरा करता हुआ मानव जीवन सोलहवे संस्कार यानी अंतिम संस्कार की ओर बढ़ता है और आत्मा के शरीर छोड़ने के साथ ही मानव जीवन का अंतिम संस्कार पूरा हो जाता है।
लेकिन इहलोक से परलोक में प्रस्थान करने के बाद भी इंसान को विधिपूर्वक अंतिम विदाई दी जाती है। इसमें सबसे प्रमुख है दाह संस्कार या नश्वर शरीर का पंचतत्व में विलिन होना। इसके शास्त्रों में नियम दिए गए हैं उन नियमों के अनुसार अग्निदाह करने पर मानव सभी तरह के मोहमाया और जीवन के जंजाल से मुक्त होकर श्रीहरी के चरणों में जगह पा जाता है।
गरुड़ पुराण के अनुसार मानव की मृत्यु किसी भी समय हो सकती है यह परमात्मा के हाथ में है, लेकिन उसका अंतिम संस्कार सिर्फ दिन के समय यानी सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक ही किया जा सकता है। दिन ढलने के बाद यानी रात में मृत्यु होने पर अंतिम संस्कार के लिए सूर्योदय का इंतजार करना चाहिए।
गरुड़ पुराण के अनुसार यदि अंतिम संस्कार सूर्यास्त के बाद किया जाता है तो मरने वाले को परलोक में कष्ट भोगने पड़ते और अगले जन्म में उसके अंगों में खराबी हो सकती है या कोई दोष हो सकता है। इसी कारण सूर्यास्त के बाद दाह संस्कार उचित नहीं माना गया है। मोक्ष के लिए और मृतात्मा की मुक्ति के लिए दिन में अंतिम संस्कार का विधान है।
धर्मशास्त्रों में कहा गया है कि दिन ढलने के साथ ही स्वर्ग के कपाट बंद हो जाते हैं और नर्क के खुल जाते हैं। इसलिए दिन में अंतिम संस्कार करने पर मृतात्मा को स्वर्ग की प्राप्ति होती है और रात के समय अंतिम संस्कार करने पर नर्क की प्राप्ति होती है।
शास्त्रों में यह भी विधान है कि सूर्यास्त के बाद यदि किसी का निधन होता है तो मृत शरीर को अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। क्योंकि मृत व्यक्ति की आत्मा वहीं पर भटकती रहती है और अपनों के नजदीक रहकर उनको देखती रहती है। यह भी कहा जाता है कि मृत्यु के बाद शरीर से आत्मा प्रस्थान कर जाती है और खाली शरीर में कोई बुरी आत्मा प्रवेश न कर ले इसलिए मृतक को रात को अकेला नहीं छोड़ा जाता है। और विधि अनुसार मृत शरीर को तुलसी के पौधे के पास रखने का भी प्रावधान है।
इस तरह से विधि-विधान से अंतिम संस्कार करने पर आत्मा परमात्मा में विलिन होकर देवलोक में स्थान पाती है।
शहडोल/रांची। इंडोर विश्व कप तीरंदाजी का स्वर्ण जीतने वाले जसपाल सिंह (22) व एनआईएस सर्टिफिकेट कोर्स 2018-19 के टाॅपर और राष्ट्रीय तीरंदाज सरस सोरेन (27) की आज सुबह शहडोल में सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। हादसा उस वक्त हुआ, जब दोनों की कार खड़े ट्रक में जा घुसी। हादसे में शरद की तो घटना स्थल पर ही मौत हो गई, जबकि जसपाल ने अस्पताल ले जाते वक्त दम तोड़ा। दोनों जमशेदपुर के रहने वाले हैं। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार के परखच्चे उड़ गए। दोनों वहां चल रहे जूनियर नेशनल तीरंदाजी प्रतियोगिता में जा रहे थे।
प्रतियोगिता में इनका तीरंदाजी इक्वीपमेंट का स्टॉल लगा था। जसपाल ने पिछले साल थाइलैंड में विश्व इंडोर तीरंदाजी चैंपियनशिप में गोल्ड जीता था, जबकि शरद ने दो महीने पहले ही एनआईएस सर्टिफिकेट कोर्स में टॉप किया था। रांची के एक्सपोर्ट क्लब से दोनों खिलाड़ी तीरंदाजी के नेशनल प्लेयर बने थे। जसपाल अपने माता पिता के इकलौते बेटे थे, जबकि सरस तीन भाइयों में दूसरे नंबर पर थे। घटना की जानकारी मिलते ही झारखंड तीरंदाजी संघ के अध्यक्ष अर्जुन मुंडा ने तत्काल भोपाल संपर्क कर दोनों की खबर ली और अस्पताल ले जाने की व्यवस्था कराई। उन्होंने तीरंदाजी संघ को आवश्यक निर्देश दिया तथा वहां से दोनों का शव जमशेदपुर लाने की व्यवस्था करने को कहा।
अर्जुन मुंडा ने दोनों के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि दो प्रतिभावान तीरंदाजों का निधन राज्य के लिए बहुत बड़ा झटका है। दुख की इस घड़ी में झारखंड तीरंदाजी संघ उनके परिवार के साथ खड़ा है।
इस वजह से हुआ हादसा
देर रात हुई दुर्घटना नेशनल हाईवे पर पार्क एक ट्रक के कारण हुई। ट्रक किनारे पर खड़ा हुआ था, जिसकी पार्किंग लाइट नहीं जल रही थी। इसी वजह से दोनों खिलाड़ियों की कार उसके पिछले हिस्से में जाकर घुस गई। हादसे में कार के परखच्चे उड़ गए थे।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने लोकसभा सीट जीताने की जिम्मेदारी अपने मंत्रियों को सौंप दी है। मंत्रियों के बीच जिलों का बंटवारा इस तरह से किया कि हर मंत्री को एक-एक लोकसभा सीट जिताने की जिम्मेदारी दी जा सके। मुख्यमंत्री ने सभी मंत्रियों से कहा है कि वे लोकसभा चुनाव को देखते हुए अपने-अपने लोकसभा सीटों पर तत्काल फोकस करना शुरू कर दें। राज्य में मुख्यमंत्री को छोड़कर 11 मंत्री हैं और इतनी ही लोकसभा की सीटें।
सरगुजा संभाग के पांच में से तीन जिलों का प्रभार मंत्री टीएस सिंहदेव को देकर सरगुजा लोकसभा सीट के लिए उनकी जिम्मेदारी तय की गई है। इसी संभाग से डॉ. प्रेमसाय सिंह भी मंत्री हैं। उन्हें भी एक लोकसभा सीट देनी थी, तो मुख्यमंत्री ने उन्हें जांजगीर-चांपा जिले का प्रभारी बना दिया।
मंत्री ताम्रध्वज साहू दुर्ग लोकसभा सीट के सांसद थे। मंत्री बनने के बाद उन्होंने सांसद पद से इस्तीफा दिया है। अब दुर्ग लोकसभा सीट साहू के हवाले कर दिया गया है। मंत्री मोहम्मद अकबर कवर्धा के साथ ही राजनांदगांव जिले का भी प्रभारी बनाकर राजनांदगांव लोकसभा सीट का जिम्मा दिया है।
दुर्ग संभाग से तीसरे मंत्री रविंद्र चौबे को बिलासपुर व मुंगेली जिले का प्रभारी बनाया, ताकि बिलासपुर लोकसभा सीट का दायित्व उन्हें दिया जा सके। दुर्ग संभाग के ही चौथे मंत्री गुरु स्र्द्र कुमार को भी रायपुर संभाग के जिलों का प्रभार देना पड़ा है। उन्हें रायपुर संभाग के तीन जिले महासमुंद, गरियाबंद, धमतरी का प्रभारी बनाया है, जिसमें महासमुंद लोकसभा सीट भी है।
दुर्ग संभाग की पांचवीं मंत्री अनिला भेंड़िया हैं। उन्हें दुर्ग संभाग के एक जिले बालोद और बस्तर संभाग के एक जिले कांकेर का प्रभारी बनाया है। इन दो जिलों में एक कांकेर लोकसभा सीट है। कवासी लखमा बस्तर संभाग के पांच जिलों के साथ बस्तर लोकसभा सीट की जिम्मेदारी दी गई है।
मंत्री जयसिंह अग्रवाल कोरबा के विधायक हैं, इसलिए उन्हें कोरबा जिले का प्रभार देकर कोरबा लोकसभा सीट की भी जिम्मेदारी दे दी है। मंत्री उमेश पटेल रायगढ़ जिले के खरसिया विधानसभा सीट के विधायक हैं, तो उन्हें रायगढ़ लोकसभा सीट की जिम्मेदारी दी गई है। बघेल मंत्रिमंडल में रायपुर संभाग से डॉ. शिवकुमार डहरिया अकेले मंत्री हैं, इस कारण उन्हें रायपुर का प्रभारी बनाकर रायपुर लोकसभा सीट को संभालने के लिए कहा है।
रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मंगलवार को अपने मंत्रिमंडल के सभी 11 मंत्रियों में 27 जिलों का बंटवारा करके उन्हें प्रभारी बना दिया। मंत्री कवासी लखमा को सबसे ज्यादा बस्तर संभाग के सात में से छह जिलों का प्रभार दिया गया है।
वहीं, मंत्री टीएस सिंहदेव को सरगुजा संभाग के पांच में से तीन जिले सरगुजा, बलरामपुर व सूरजपुर की जिम्मेदारी दी गई है। बाकी दो जिले कोरिया व जशपुर दो मंत्रियों को अलग-अलग मिले हैं। मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया को रायपुर के साथ बलौदाबाजार-भाटापारा का प्रभारी बनाया गया है।
मुख्यमंत्री बघेल ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद किस मंत्री को कौन से जिले का प्रभारी बनाया, इस पर मंथन किया। शाम को सूची जारी की गई। मुख्यमंत्री ने ज्यादातर मंत्रियों को उनके ही जिले का प्रभार दिया और आसपास के जिले भी उन्हें दिए गए हैं। हालांकि, इस कवायद में सरगुजा और दुर्ग संभाग के तीन मंत्रियों डॉ. प्रेमसाय सिंह, रविंद्र चौबे और गुरु स्र्द्र कुमार को उनके क्षेत्र का जिला नहीं मिल पाया है।
मंत्री-जिला प्रभार
टीएस सिंहदेव-सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर
रविंद्र चौबे-बिलासपुर, मुंगेली
डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम-जांजगीर
डॉ. शिवकुमार डहरिया-रायपुर, बलौदाबाजार-भाटापारा
मोहम्मद अकबर-कवर्धा, राजनांदगांव
ताम्रध्वज साहू-दुर्ग, बेमेतरा
कवासी लखमा-बस्तर, नारायणपुर, बीजापुर, सुकमा, कोंडागांव, दंतेवाड़ा
जयसिंह अग्रवाल-कोरबा, कोरिया
उमेश पटेल-रायगढ़, जशपुर
गुस्र् स्र्द्र कुमार-महासमुंद, धमतरी, गरियाबंद
अनिला भेंड़िया-कांकेर, बालोद
बिलासपुर । सिम्स में आगजनी की घटना के बाद 18 साल से जमे सात डॉक्टरों का प्रदेश के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में तबादला कर दिया गया है। इनमें से छह एचओडी हैं। वहीं इनकी जगह एक प्राध्यापक व दो सहायक प्राध्यापक को भेजा गया है।
सिम्स में 22 जनवरी को आगजनी की घटना के बाद एनआइसीयू में गंभीर हालत में भर्ती नवजातों को हटना पड़ा था। बाद में इसमें से पांच की मौत हो गई। घटना में सिम्स की अव्यवस्था सबसे सामने आ गई। मंत्री से लेकर अधिकारियों के निरीक्षण में जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही को घटना का प्रमुख कारण माना गया। इसके बाद मंगलवार को चिकित्सा शिक्षा विभाग ने सिम्स के सात डॉक्टरों का तबादला आदेश जारी कर दिया। इसमें से चार सीनियर डॉक्टर सालों से यहां जमे हुए हैं। इनमें पास सिम्स के संचालन से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। इसमें माइक्रोबायोलाजी डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ. रमणेश मूर्ति, अस्पताल अधीक्षक डॉ. बीपी सिंह, मेडिसीन डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ. लखन सिंह और दंत रोग विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. भूपेंद्र कश्यप शामिल हैं।
इसके अलावा एनस्थीसिया डिपार्टमेंट की एचओडी डॉ. मधुमिता मूर्ति, रेडियोलॉजी डिपार्टमेंट की एचओडी डॉ. अर्चना सिंह और कम्युनिटी मेडिसिन डिपार्टमेंट की एचओडी डॉ. हेमलता ठाकुर का नाम शामिल है। इनके स्थान पर जगदलपुर मेडिकल कॉलेज के प्राध्यापक डॉ. अविनाश मेश्राम, रायपुर मेडिकल कॉलेज के सहायक प्राध्यापक डॉ. उल्लास गोन्नाडे और सहायक प्राध्यापक डॉ. रेखा बारापात्रे को सिम्स भेजा गया है।
कहां भेजे गए डॉक्टर
– डॉ. रमणेश मूर्ति अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज
– डॉ. मधुमिता मूर्ति अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज
– डॉ. बीपी सिंह जगदलपुर मेडिकल कॉलेज
– डॉ. अर्चना सिंह जगदलपुर मेडिकल कॉलेज
– डॉ. लखन सिंह अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज
– डॉ. हेमलता सिंह अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज
– डॉ. भूपेंद्र कश्यप जगदलपुर मेडिकल कॉलेज
ये भी है वजह
– व्यवस्था संभालने में जिम्मेदार अधिकारी नाकाम रहे।
– तमाम संसाधन के बाद भी लोगों का उपचार से वंचित होना।
– शासन को आए दिन सिम्स प्रबंधन की शिकायत मिल रही थी।
– सिम्स में गुटबाजी के कारण कामकाज प्रभावित होना।
– लापरवाह अधिकारी-कर्मचारियों पर कार्रवाई न करना।
– शिकायतों की जांच के नाम पर खानापूर्ति।
हाईकोर्ट के निर्देश का भी पालन नहीं किया गया।
प्रशासनिक कार्यों के साथ इलाज पर पड़ा असर
इस तबादले का सिम्स के प्रशासन के साथ चिकित्सकीय व्यवस्था पर असर पड़ेगा। ट्रांसफर सूची में शहर के कुछ वरिष्ठ डॉक्टरों का नाम शामिल है। इन्हें सालों का अनुभव है। इनके जाने से मेडिकल कॉलेज में अध्यापन कार्य और पैथोलाजी व माइक्रोबायोलाजी का काम प्रभावित होगा। वहीं डॉ. लखन सिंह के जाने का सीधा असर मरीजों पर पड़ेगा। अब मेडिसीन डिपार्टमेंट का पूरा जिम्मा डॉ. पंकज टेम्भुर्णीकर पर आएगा। दोनों डॉक्टर ओपीडी में हर दिन 300 से 400 मरीजों को देखते थे।
लोरमी। भाजपा नेता ने गुड़ फैक्टरी में पांच नाबालिग लड़की सहित 11 बैगा मजदूरों को बंधक बना लिया था। परिजन ने इसकी सूचना चिल्फी चौकी को दी। इस पर एसडीओपी तेजराम पटेल, नायब तहसीलदार मुकेश देवागंन, लेबर इंस्पेक्टर जीआर आर्मो मौके पर पहुंचे और सभी मजदूरों को मुक्त कराया। लोरमी क्षेत्र के ग्राम गोल्हापारा में शत्रुहन साहू गुड़ फैक्टरी चलाता है।
काम की अधिकता को देखते हुए उसने बिजराकछार पंचायत के पांच नाबालिग लड़कियों सहित 11 बैगा मजदूरों को काम कराने के लिए एक माह पहले लेकर आया था। उनसे प्रतिदिन बेतहाशा काम कराया जा रहा था। बैगा बच्चों से परिजन मिलने के लिए आते थे, लेकिन उन्हें मिलने नहीं देता था।
न तो देता था और न ही ढंग से भोजन देता था। लड़कियां काफी परेशान थीं। छुड़ाने के बाद उनका और बैगा श्रमिकों का स्वस्थ्य परीक्षण कराया गया। संचालक के खिलाफ लेबर इंस्पेक्टर आर्मों कार्रवाई कर रहे हैं।
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार पहली से पांचवीं तक सरकारी स्कूलों के बच्चों को अब न सिर्फ किताबें, बल्कि निजी स्कूलों की तर्ज पर सरकारी नोटबुक (कॉपियां) भी देगी। छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम के प्रॉफिट फंड से कार्पोरेट सोशल रिस्पांसबिलिटी के तौर पर 22 लाख बच्चों के लिए नोटबुक तैयार कराई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी स्कूल में ज्यादातर बीपीएल परिवार के बच्चे पढ़ते हैं। उनके लिए किताबें तो मुफ्त में मिल जाती हैं पर कॉपियां नहीं मिलतीं। ऐसे बच्चों के लिए यह योजना वरदान साबित होगी।
सीखने और सिखाने का पैमाना पहले ही तय
सरकारी स्कूलों में बच्चों के पढ़ने-पढ़ाने और सिखाने का पैमाना सरकार ने पहले ही फिक्स कर दिया है। इसके मुताबिक पहली के बच्चे को कम से कम गणित में 20 तक गिनती और जोड़, घटाने की प्रक्रिया आनी चाहिए। 20 तक गिनती के बीच में वह कौन बड़ी संख्या और कौन छोटी संख्या है, यह तय कर पा रहा है तो उसका लर्निंग आउटकम ठीक है। 01 से 20 तक गिनती सीखना पर्याप्त है। इसी तरह कक्षा दूसरी के बच्चे को 99 तक गिनती लिखना, पढ़ना आना चाहिए , साथ ही रुपए, सिक्के, शेप्स की जानकारी हो जाए तो उसे अधिक पढ़ाने की जरूरत नहीं होगी। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने कक्षा और उम्र के आधार पर बच्चों में लिखने, पढ़ने, समझने और बोलने की क्षमता को परखने का आधार तय कर दिया है। उसके हिसाब से ही नोटबुक बनाई जा रही है।
ये मिलेगा फायदा
नोटबुक इस तरह से डिजाइन की गई है कि इसमें शिक्षक किसी एक कक्षा के विभिन्न् लर्निंग आउटकम पर काम करने के बाद उन पर अलग-अलग तरीके से अभ्यास करा सकेंगे। यह सामग्री इस प्रकार से तैयार की गई है कि शिक्षक किसी एक कक्षा के विभिन्न् लर्निंग आउटकम पर कार्य करने के बाद उन पर अलग-अलग तरीकों से अभ्यास कराएंगे।
नोटबुक डिजाइन के लिए सौंप चुके हैं काम
नोटबुक बनाने के लिए समग्र शिक्षा विभाग के सहायक संचालक डॉ. एम सुधीश को काम दिया गया है। वे बच्चों के पढ़ने-पढ़ाने और सिखाने के पैमाने पर ही नोटबुक की डिजाइन कर रहे हैं। डॉ. सुधीश प्रदेश में शिक्षा गुणवत्ता अभियान के लिए हर साल माड्यूल तैयार कर रहे हैं। इसके आलावा नवाचार शिक्षा पर भी फोकस करते हुए गुणवत्ता के लिए काम कर रहे हैं।
राज्य सरकार बच्चों के हित में काम करने के लिए हर तरह से तैयार है। इसी कड़ी में हमने अब पाठ्यपुस्तक निगम के प्रॉफिट फंड को शिक्षा की गुणवत्ता में खर्च करने का निर्णय लिया है। इससे सरकारी स्कूलों के बच्चों को बेहतर डिजाइन और लर्निंग आउटकम की नोटबुक मिलेगी। – एस प्रकाश, संचालक लोक शिक्षण संचालक एवं एमडी पाठ्यपुस्तक निगम
मुंगेली। मुंगेली में कई पुलिस कर्मियों का तबदला किया गया है। मुंगेली एसपी पारुल माथुर ने पुलिस विभाग के अधिकारी- कर्मचारियों का थोक में तबादला किया है। इस तबादले में 4 उपनिरीक्षक,4 सहायक उपनिरीक्षक,14 प्रधान आरक्षक,व 52 आरक्षकों का तबादला किया गया है।

रायपुर । 1 और 2 मार्च से शुरु होने वाले छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं और 12वीं बोर्ड की परीक्षाओं को लेकर बड़ा फैसला लिया है। बोर्ड ने 10वीं-12वीं की उत्तर पुस्तिका में बदलाव करते हुए इस बार ओएमआर सिस्टम लागू करने का फैसला लिया है। किए गए बदलाव में सबसे बड़ी बात यह है कि अब परीक्षार्थियों को सप्लीमेंट्री कॉपी नहीं दी जाएगी, उन्हें ओएमआर शिट में दिए गए निर्धारित जगह में उत्तर लिखना होगा।
इस सिस्टम से परीक्षा किस तरह से दिलानी है इसके लिए माध्यमिक शिक्षा मंडल के सचिव प्रोफेसर वीके गोयल ने प्राचार्यों की बैठक ली और उन्हें आवश्यक दिशा निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि ओएमआर सिस्टम की कॉपियों में परीक्षार्थियों को अलग से कोई कॉपी नहीं दी जाएगी निर्धारित पेज पर ही परीक्षार्थी अपना उत्तर दे सकेंगे। उन्होंने राज्य के विभिन्न जिलों से आए प्राचार्य की जिज्ञासा भी शांत की। शिक्षा मंडल ने परीक्षा की तैयारियों शुरू कर दी है।