
रायपुर । जो कभी राज्य का चीफ मिनिस्टर रहा हो, उसके फोन पर किसी मरीज को एंबुलेंस तक न मिल पाए तो यह हैरान करने वाली बात है न! कल रात ऐसा ही हुआ। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के दो घंटे तक चिरौरी करने पर भी बीमार युवती को 108 की सुविधा नहीं मिल सकी। जोगी रात 9.30 से 11.30 बजे तक फोन लगाते रह गए। थक-हारकर उन्होंने प्रायवेट गाड़ी की व्यवस्था कर युवती को अस्पताल भिजवाया ।
दरअसल, जोगी के विधानसभा इलाके मरवाही की बीमार युवती को एंबुलेंस से गौरेला सेनेटोरियम अस्पताल भेजने के लिए उन्होंने रात में कई बार 108 को फोन लगाया। 108 से उन्हें कहा गया, एंबुलेंस रिपेयरिंग के लिए बिलासपुर आया हुआ है। आप 102 से बात कर लें। जोगी ने जब 102 को फोन लगाया तो उन्हें सलाह दी गई, आप 108 से बात करें। जब उन्होंने बताया कि 108 गाड़ी रिपेयरिंग में गई है तो जवाब मिला, 108 वालों के कहे बिना वे एंबुलेंस नहीं भेज सकते। उन्होंने फिर 108 को फोन लगाकर कहा कि 102 को बोल दें कि वे अपना एंबुलेंस भेज दें। लेकिन, उसने एक्स सीएम के आग्रह को अनसूना कर दिया। जोगी ने उसका नाम पूछा तो उसने यह कहते हुए नाम बताने से इंकार कर दिया कि उसे उच्चाधिकारियों ने अपना नाम बताने से मना किया है। इसके बाद उसने जोगी के फोन को रिकार्डेड मैसेज के मोड पर डाल दिया। जोगी ने इसके बाद बिलासपुर के डीएचएमओ से बात की। मगर इसके बाद भी कोई फायदा नहीं हुआ। जोगी ने आज सुबह इस घटना को लेकर ट्वीट किया कि प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति कितनी दयनीय है। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री को पत्र भी लिखकर अपनी पीड़ा व्यक्त की कि जीवन में मुझे पहली बार किसी ने दो घंटे तक इंतजार कराने के बाद बात नहीं की और रिकार्डेड फोन सुनाया गया। अभी तक फोन पर उन्हें दो घंटे तक किसी ने इंतजार नहीं कराया। दिल्ली में जब भी चाहें, प्रधानमंत्री से भी आधे घंटे के भीतर उनकी बात हो गई। लेकिन, छत्तीसगढ़ में पूर्व मुख्यमंत्री को दो घंटे के बाद भी न कोई बात करता है और न ही वाहन भेजता है ।
