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रायपुर । स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने नये साल से सरकारी अस्पतालों में अहम बदलाव करने जा रहे हैं, जिससे दूर-दूराज से आने वाले मरीजों को बहुत फायदा होगा. जानकारी के मुताबिक अब अस्पतालों में पूरे दिन ओपीडी खुली रहेगी. पहले सुबह से दोपहर 2 बजे तक ही अपोडी खुली रहती थी. इससे दूर से पहुंचने वाले मरीजों को वापस लौटना पड़ा था या मजबूरी में निजी अस्पताल का रूख करना पडऩा था. अब इन लोगों को परेशानी नहीं होगी. नये नियम के मुताबिक अब दो अलग-अलग पालियों में ओपीडी खुलेगी। विभाग की ओर से जारी निर्देश के मुताबिक जिला अस्पतालों में मार्च से अक्टूबर महीने से सुबह 9 से 1 बजे तक पहली पारी और शाम 5 से 7 बजे तक ओपीडी खुली रहेगी. वहीं नवंबर से फरवरी तक शाम की ओपीडी 4 से 6 बजे तक रहेगी। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र व उप स्वास्थ्य केंद्र में ओपीडी का समय सुबह 10 से शाम 5 बजे तक किया गया है. शहरी प्राथमिक स्वास्थय केंद्र में सुबह 10 से 2 बजे तक और शाम 5 से 8 बजे तक ओपीडी होगी. रविवार को या अन्य अवकाश के दिनों में जिला व सिविल अस्तपाल में 24 घंटे इमरजेंसी ओपीडी सेवा चालू रहेगी।


रायपुर । प्रदेश की 11 में से पांच लोकसभा सीटों से अब तक भाजपा और कांग्रेस ने महिला प्रत्याशियों को मैदान में नहीं उतारा है। वो पांच सीट रायपुर, महासमुंद, सरगुजा, राजनांदगांव और बस्तर है। बाकी आधा दर्जन लोकसभा सीटों की बात की जाए, तो महिला को टिकट देने में भाजपा के मुकाबले कांग्रेस आगे रही है।
यह बात अलग है कि कांग्रेस की टिकट से अब तक एक भी महिला सांसद नहीं बन पाई है। भाजपा ने महिला प्रत्याशी कम उतारे, लेकिन उसकी टिकट ने दो महिलाओं को संसद पहुंचाया। लोकसभा चुनाव को इतिहास जो भी रहा हो, लेकिन 2018 के लोकसभा चुनाव में दोनों राजनीतिक दलों में टिकट की दावेदारी करने वालों में महिलाएं पीछे नहीं हैं।
भाजपा और कांग्रेस की अलग-अलग बात की जाए, तो भाजपा ने रायपुर, महासमुंद, सरगुजा, राजनांदगांव, बस्तर के अलावा कांकेर और रायगढ़ लोकसभा सीट से भी अब तक महिला को प्रत्याशी नहीं बनाया है। वर्ष 1998 से 2014 तक हुए पांच लोकसभा चुनाव में भाजपा ने तीन महिलाओं को दो-दो बार टिकिट दिया।
इसमें कमला देवी पाटले, सरोज पांडेय और कस्र्णा शुक्ला शामिल हैं। पाटले जांजगीर-चांपा लोकसभा सीट से 2009 व 2014 में सांसद चुनी गईं। वहीं, पांडेय 2009 में दुर्ग से सांसद बनीं, लेकिन 2014 में उसी सीट से हार गई थीं। शुक्ला 2004 में जांजगीर-चांपा सीट से चुनाव जीती थीं।
2009 में भाजपा ने उन्हें कोरबा लोकसभा सीट से चुनाव लड़ाया था, जिसमें वो हार गई थीं। कांग्रेस ने वर्ष 1998 से 2014 तक हुए लोकसभा चुनाव में आठ महिलाओं को प्रत्याशी बनाया। इसमें केवल एक नेत्री फूलोदेवी नेताम ऐसी हैं, जिन्हें दो बार टिकट मिली। कांकेर लोकसभा सीट फूलोदेवी नेताम को 2009 और 2014 में चुनाव लड़ाया, दोनों बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
फूलोदेवी के पहले कांकेर लोकसभा सीट से 1999 में झबीला नेताम, 2004 में गंगा पोटाई ने चुनाव लड़ा था। रायगढ़ लोकसभा सीट से कांग्रेस ने 1999 में पुष्पादेवी सिंह और 2014 में आरती सिंह को प्रत्याशी बनाया था। बिलासपुर लोकसभा सीट से 1998 में कन्या कुमारी एलियस तन्या अनुरागी, 2009 में डॉ. रेणु जोगी ने कांग्रेस की टिकट से चुनाव लड़ा था। इसी सीट से भाजपा छोड़ने वाली पूर्व सांसद कस्र्णा शुक्ला को कांग्रेस ने 2014 में टिकट दिया था।
दोनों दलों की नेत्रियों में टिकट की आस
भाजपा और कांग्रेस, दोनों दलों के आला नेता चाहे विधानसभा चुनाव हो या फिर, लोकसभा, नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव, सभी में महिलाओं को प्राथमिकता के साथ टिकट देने की बात कहते हैं। अभी विधानसभा चुनाव हुआ, तो भाजपा ने 10, तो कांग्रेस ने 12 महिलाओं को टिकट दिया था।
दोनों राजनीतिक दलों की जिन वरिष्ठ नेत्रियों या पूर्व विधायकों को विधानसभा चुनाव लड़ने का मौका नहीं मिला, अब वो लोकसभा चुनाव में टिकट मिलने की उम्मीद लगाए बैठीं हैं। दोनों दलों से दावेदारी कर रही नेत्रियों को उम्मीद है कि दो से तीन सीटों पर महिला प्रत्याशी उतारे जा सकते हैं।
कांकेर सीट से लगातार चार बार महिला प्रत्याशी
एकमात्र कांकेर लोकसभा सीट ऐसी है, जहां से कांग्रेस पिछले चार चुनाव में महिला प्रत्याशी उतार रही है। हालांकि, हर बार पार्टी को यह सीट गंवानी भी पड़ी है।
कांग्रेस ने हर चुनाव में महिलाओं को दिया टिकट
चुनाव-भाजपा-कांग्रेस
1998-0-1
1999-0-2
2004-1-1
2009-3-2
2014-2-3
भाजपा ने छह, कांग्रेस ने पांच सीटों से रखा दूर
सीट-भाजपा-कांग्रेस
सरगुजा-0-0
रायगढ़-0-2
जांजगीर-3-0
कोरबा-1-0
बिलासपुर-0-3
राजनांदगांव-0-0
दुर्ग-2-0
रायपुर-0-0
महासमुंद-0-0
बस्तर-0-0
कांकेर-0-4

भिलाई । दिनदहाड़े गोली चलाकर 9 लाख रुपए की लूट कांड को अंजाम देने वाले 3 शातिर बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया गया है. पुलिस टीम ने 10 दिनों के भीतर ही इस लूटकांड का पर्दाफाश करने में सफलता हासिल की है ।
पुलिस टीम को प्रोत्साहित करने 2 लाख रुपए इनाम देने की भी घोषणा की गई है. गिरफ्तार तीनों शातिर बदमाश लूट की कई वारदातों को अंजाम दे चुके हैं. आरोपियों से सघन पूछताछ में कई लूटकांड का खुलासा होने के दावे किये जा रहे हैं. रायपुर में हुए सराफा व्यापारी से लूट मामले में भी इन आरोपियों की संलिप्तता होने की जानकारी मिल रही है।
बता दें कि विगत 5 मार्च को दोपहर 2 बजे कृष्णा कॉमर्शियल कम्पनी के कैशियर आशीष वर्मा को पीछे से धक्का देकर मोटर साइकिल से गिराकर तीन अज्ञात व्यक्तियों ने पिस्टल से धमकाते हुए तीन राउंड फायर कर उसके पास रखे बैग को लूटकर भाग गए. बैग में 9 लाख 19 हजार रुपए, चेक बुक तथा अन्य कागजात थे. मामले में थाना छावनी में धारा 394 भादवि, 25-27 आर्म्स एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया था ।
घटना की गंभीरता को देखते हुए आईजी हिमांशु गुप्ता और डीआईजी रतनलाल डांगी के निर्देशन में उप पुलिस अधीक्षक (क्राइम) प्रवीर चंद्र तिवारी, सीएसपी छावनी विश्वास चन्द्रकार, सीएसपी भिलाई नगर अजीत यादव, एसडीओपी राजीव शर्मा के साथ पाटन, छावनी, सुपेला, नेवई, वैशाली नगर थाना प्रभारियों के साथ अन्य 50 पुलिस कर्मियों की टीम बनाकर जांच शुरू की गई ।
जांच के दौरान घटना में प्रयुक्त वाहन को केंद्र बिंदु बनाकर शहर में लगे विभिन्न सीसीटीवी के जरिए ट्रेक किया गया. इसके बाद मुखबिर से मिली सूचना पर घटना से जुड़े लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई ।
घटना में आरोपी देवी प्रसाद बसोर और मनीष बसोर की घटना में संलिप्तता पाई गई. साथ ही उत्तरप्रदेश के संजय वर्मा को भी हिरासत में लिया गया है. जिनके पास से घटना में प्रयुक्त दुपहिया वाहन, एक पिस्टल, 4 जिन्दा कारतूस, 7 देशी कट्टा, 5 जिन्दा कारतूस तथा लूटे गये राशि में से 2 लाख 20 हजार रुपए नगद राशि जब्त किया गया ।
6 को सुनवाई
नई दिल्ली, 29 अगस्त। भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में कथित नक्सली लिंक के आरोप में गिरफ्तार किए गए मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को सुप्रीम कोर्ट से फौरी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए कहा है कि आरोपियों को गिरफ्तार करने की बजाय हाउस अरेस्ट किया जाए। सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले की अगली सुनवाई 6 सितंबर को होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर टिप्पणी करते हुए कहाÓ असहमति का होना किसी भी लोकतंत्र के लिए सेफ्टी वॉल्व है। अगर असहमति की अनुमति नहीं होगी तो प्रेशर कूकर की तरह फट भी सकता है।Ó गौरतलब हो कि 28 अगस्त को पुणे पुलिस ने भीमा कोरेगांव हिंसा, नक्सलियों से संबंधों और गैर-कानूनी गतिविधियों के आरोपों में 5 लोगों को अरेस्ट किया है।
इनमें वरवरा राव, सुधा भारद्वाज, गौतम नवलखा, वेरनोन गोन्जाल्विस और अरुण फरेरा शामिल हैं। इन मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की तरफ से रोमिला थापर, प्रभात पटनायक, सतीश देशपांडे, माया दर्नाल और एक अन्य ने सुप्रीम कोर्ट ने अर्जी दाखिल की थी। इनकी तरफ से सीनियर ऐडवोकेट और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी कोर्ट में पेश हुए।
उधर, पुणे पुलिस ने दावा किया कि आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं। पुलिस ने आरोप लगाया कि आरोपियों के प्रतिबंधित सीपीआई माओवादी से संबंध हैं। पुलिस ने दावा किया कि ये बड़े नेताओं की हत्याओं की साजिश कर रहे थे। पुलिस ने सबूत के तौर पर हार्ड डिस्क, लैपटॉप इत्यादि कब्जे मे लेने का दावा किया है ।
अधिकारी ने कहा, लिखना और विचारधारा का प्रचार करना अलग है, लेकिन अगर आप नियमों से परे काम कर रहे हैं तो कार्रवाई की जानी चाहिए. अगर आप वित्तीय और सैन्य सहायता प्रदान करते हैं तो आप हिंसा की सहायता और समर्थन कर रहे है।
गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि यह साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं कि गिरफ्तार किए गए एक्टिविस्ट आतंकवादी संगठनों के साथ गठबंधन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। पुणे पुलिस द्वारा पांच मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मोदी सरकार, संघ पर पर हमला करते हुए कहा कि भारत में सिर्फ एक ही एनजीओ के लिए जगह है और उसका नाम आरएसएस है। राहुल ने तंज करते हुए लिखा कि सभी ऐक्टिविस्ट्स को जेल में डाल दो और जो विरोध करे उसे गोली मार दो।
इस पर बीजेपी और केंद्र सरकार की तरफ से राहुल पर हमला बोला गया। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री मंत्री किरेन रिजिजू ने इसके जवाब में ट्वीट करते हुए लिखा कि मनमोहन सरकार ने माओवादियों को आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा घोषित किया था। उन्होंने लिखा कि अब राहुल गांधी ‘माओवादी शुभचिंतकोंÓ को सपॉर्ट कर रहे हैं।