
रायपुर। राजधानी में भाजपा शासन काल में बने स्काईवॉक को लेकर हुई मैराथन बैठक में भी कोई समाधान सामने नहीं आया । स्काई वाक को लेकर समिति से लेकर मनोनीत सदस्य घंटों माथाफोड़ी करते रहे लेकिन हल तक नहीं पहुंच पाए। कई दौर के सुझाव और बैठकों के बाद अब स्काई वाक पर फैसला एक और बैठक के लिए टाल दिया गया है। जिस तरह से स्काई वाक पर फैसले की रफ्तार चल रही है, लगता नहीं है कि इस पर फिलहाल कोई फैसला होने वाला है। रायपुर के सीनियर विधायक सत्यनारायण शर्मा की अध्यक्षता में स्काई वाक पर बनी हाईपावर कमेटी की एक बैठक हुई। बैठक में तमाम लोगों से सुझाव के साथ-साथ अलग-अलग लोगों और जगहों से आयी रिपोर्ट को रखा गया। बैठक में तमाम लोगों से सुझाव के बाद इस बात का फैसला लिया गया कि अब एक और बैठक अगले सप्ताह बुलायी जायेगी, जिसमें तमाम सुझावोँ और संभावनाओं के बाद निष्कर्ष पर पहुंचा जायेगा। 22 अगस्त को बैठक बुलाया गयी है, इस बैठक में सिर्फ जनप्रतिनिधि और राजनीतिक दल के ही लोग मौजूद रहेंगे। आपको बता दें कि स्काई वाक की उपयोगिता को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे। सरकार ने स्काई वाक का भविष्य तय करने के लिए लोगों से सुझाव मंगाये थे और फिर एक कमेटी गठित कर स्काई वाक पर फैसले का निर्णय लिया था। बैठक में रायपुर उत्तर के विधायक कुलदीप जुनेजा, रायपुर पश्चिम के विधायक विकास उपाध्याय और नगर निगम रायपुर के महापौर प्रमोद दुबे, पूर्व महापौर किरणमयी नायक सहित विषय विशेषज्ञ, इंजीनियर और बुद्धजीवी वर्ग उपस्थित रहेे। बैठक में जनप्रतिनिधियो और उपस्थित सदस्यों ने अपने विचार और सुझाव समिति के समक्ष रखे, जिनमें स्काई वॉक के स्ट्रक्चर पर संभावित विभिन्न विकल्पों पर आवश्यक सुझाव भी दिए गए। समिति के अध्यक्ष सत्यनारायण शर्मा ने कहा कि इसकी आगामी बैठक इसी माह के 22 अगस्त को आयोजित होगी। इसके लिए सभी सदस्यों को चर्चा के अनुसार तैयारी के साथ उपस्थित होने के लिए कहा गया है। उल्लेखनीय है कि राजधानी रायपुर में निर्माणाधीन स्काई वॉक की उपयोगिता अथवा अन्य वैकल्पिक उपयोग के संबंध चर्चा के लिए राज्य शासन द्वारा वरिष्ठ विधायक सत्यनारायण शर्मा की अध्यक्षता में 22 सदस्यीय सामान्य सुझाव समिति गठित की गई है। इसी प्रकार मुख्य सचिव सुनील कुजुर की अध्यक्षता में 25 सदस्यीय तकनीकी सुझाव समिति का भी गठन किया गया है।
महाराष्ट्र मेट्रो के आला अफसरों के बयान से स्काईवॉक प्रोजेक्ट में आया नया मोड़
स्काईवॉक पर चूंकि लगभग 38 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं इसलिए इसे तोडऩे के मूड में कोई नहीं है, लेकिन महाराष्ट्र मेट्रो के आला अफसरों ने ये कहकर मामले में नया मोड़ ला दिया है कि इसके पिलर ऐसे हैं कि इस पर कोई निर्माण संभव ही नहीं है। शासन को स्थानीय तौर पर ये सुझाव आए हैं कि स्काईवॉक तोडऩे के बजाय इसका दूसरा इस्तेमाल किया जाना चाहिए, जैसे अतिरिक्त पिलर लगाकर हल्का फ्लाईओवर बनाया जा सकता है। लेकिन सुझाव समिति की बैठक में शामिल होने आए महाराष्ट्र मेट्रो के अफसरों ने दो-टूक कह दिया कि अगर फ्लाईओवर बनाना है तो सड़क से स्काईवॉक के ऊपर तक नए पिलर खड़े करने होंगे। उस पर ही कोई प्रोजेक्ट लाया जा सकता है। बैठक में महाराष्ट्र मेट्रो के कार्यकारी निदेशक एनके सिन्हा व जीएम डॉ. एमपी रामनिवास शामिल हुए। यह टीम अभी नासिक में नियो मेट्रो बना रही है। अफसरों ने कहा कि स्काई वॉक के पिलरों की ताकत इतनी है कि उस पर केवल वॉकिंग ओवरब्रिज ही बन सकता है। इसकी ऊंचाई 10 मीटर है। अब एक ही संभावना है कि सड़क पर नए पिलर डालकर उन्हें स्काई वॉक के ऊपर ले जाया जाएगा। तभी फ्लाईओवर बन पाएगा। उन्होंने बैठक में साफ कह दिया कि इन पिलरों पर लाइट मेट्रो लाइन भी नहीं डाली जा सकती क्योंकि मौजूदा पिलर से नहीं सह सकते।
