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Home » जनता हमारे साथ है’ के नाम पर प्रदेशवासियों को संदेश – अध्यक्ष अमित जोगी
रायपुर

जनता हमारे साथ है’ के नाम पर प्रदेशवासियों को संदेश – अध्यक्ष अमित जोगी

adminBy adminApril 16, 2019No Comments8 Mins Read
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रायपुर । जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जे और जोगी परिवार की असली ताक़त नेता नहीं है बल्कि छत्तीसगढ़ की जनता का जोगी के प्रति दिली लगाव है. यह लगाव भावनात्मक है, सैद्धान्तिक है और वैचारिक है. जो लोग यह चाहते हैं कि छत्तीसगढ़ के निर्णय, छत्तीसगढ़वासियों छत्तीसगढ़ के माटी में ही करें, जो लोग हमारी ‘छत्तीसगढ़ प्रथम’ विचारधारा में आस्था रखते हैं. उन्हीं लोगों के कारण आज 82 साल के इतिहास में पहली बार छत्तीसगढ़ में मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय दल का गठन हो पाया है ।
अमित जोगी ने कहा कि लोकसभा चुनाव नहीं लड़ने का निर्णय हमने लिया. हम नहीं चाहते कि हमारे कारण ग़ैर-सांप्रदायिक ताक़तों का वोट बटे. हमारा पहला और अंतिम उद्देश्य प्रदेश की 11 सीटों में है भाजपा को परास्त करना है. 14 परसेंट वोट लेकर भी हमने यह कठिन फ़ैसला देशहित में लिया क्योंकि हमें मालूम है कि आज हमारा भारत वर्ष निर्णायक मोड़ से गुज़र रहा है. नफ़रत और साम्प्रदायिकता की ताक़तों को अगर परास्त करना है, तो सभी ग़ैर-सांप्रदायिक ताक़तों को एक होना पड़ेगा. कुछ लोगों ने इस निर्णय को बहाना बनाकर पार्टी छोड़ने का फ़ैसला किया, वे सत्ता-लोभी हैं ।
68 विधायकों का बहुमत लेकर जो इंडीयन नेशनल कांग्रेस के पक्ष में सत्ता का धुर्वाकर्षण बना है. उसकी चपेट में हमारे कई साथियों का आना स्वाभाविक है, लेकिन उनको ये बात समझनी पड़ेगी आज नहीं तो कल यह बात स्पष्ट हो जाएगी कि यह जो धुर्वाकर्षण है, ये इतना भयंकर है- एक “ब्लैक होल” की तरह है- कि जो कोई भी इसकी चपेट में आएगा उसका राजनीतिक अस्तित्व स्वयमेव समाप्त हो जाएगा. मैं दावे के साथ कहता हूँ कि जिन साथियों ने हमारा साथ छोड़ा है, तीन महीनों बाद, छ: महीने बाद, उनका क्या हश्र होने वाला है, ये पूरा छत्तीसगढ़ देखेगा. जो हमारे नहीं हो सके, वो किसी और के भी नहीं हो पाएंगे ।
हमें अपनी विचारधारा पर केन्द्रित रहकर नई सोच के लोगों को जोड़ना है. ऐसे लोग जिनकी पहली और आखिरी निष्ठा छत्तीसगढ़ महतारी के प्रति है. कई मुद्दे ऐसे हैं जिनको लेकर सभी राष्ट्रीय दलों ने हमारे प्रदेश के ढाई करोड़ वासियों के साथ कुठराघात किया है. ये मुद्दे किसी से छुपे नहीं है. चाहे वह पोलावरम बाँध निर्माण का मुद्दा हो, कन्हर नदी में बाँध के निर्माण का मुद्दा हो, नगरनार इस्पात संयंत्र के विनिवेश का मुद्दा हो, महानदी के जल बँटवारे का मुद्दा हो, कोयला खदानों की रॉयल्टी का मुद्दा हो या GST लागू करने का मुद्दा हो, इन सब मुद्दों में छत्तीसगढ़ के साथ लगातार कुठराघात हुआ है, अन्याय हुआ है, और अब छत्तीसगढ़ की जनता इस अन्याय को, इस छलावे को, ज़्यादा दिन नहीं बर्दास्त करने वाली ।
पिछले विधानसभा चुनावों में हमें अपने चुनाव चिंह को जनता तक पहुँचाने के लिए बहुत कम समय मिला. संसाधनों का भी अभाव था. ऊपर से हम पर आरोप लग रहे थे कि हम फलां पार्टी की ‘बी टीम’ है. लोकसभा न लड़के हमने इन सब आरोपों को सिरे से ख़ारिज किया है और एक नई बुनियाद कायम करी है. आने वाले स्थानीय चुनावों में, नगरीय निकाय चुनावों में, जिला पंचायत चुनावों में, जनपद चुनावों में, पंचायत चुनाव में, हम अपने अधिकृत चिन्ह “हल चलाता किसान”-जो छत्तीसगढ़ के किसानों का गौरव का प्रतीक बन चुका है- से हर वॉर्ड में चुनाव लड़ने जा रहे है. भले ही विधानसभा में हमारा कब्ज़ा न हो लेकिन मैं विश्वास के साथ कहता हूँ कि हम प्रत्येक पंचायतों में, जनपद में, जिला पंचायत में, नगर पंचायत में, नगर पालिकाओं में, नगर निगम में, अपनी सरकार बनायेंगे और राज्य सरकार और केंद्र सरकार को मजबूर करेंगे ये जो संस्थाएं है इनको पूर्ण रूप से ऑटोनामस करें, पूर्ण रूप से आर्थिक रूप से स्वतंत्र करें ताकि वे स्थानीय समस्याओं को देखते हुए अपने फ़ैसले ख़ुद ले सके ।
हमारे शपथ पत्र की नक़ल करके सरकार तो कांग्रेस पार्टी ने बना ली. पर नक़ल करने में भी अक्ल की ज़रूरत है. पहले 90 दिनों में 9 बार कर्ज़ा लेना पड़ा है. आज राजकोष ख़ाली हो चुका है. सरकार के पास अपनी घोषणाएँ पूरी करने की न तो नियत है और न ही नीति है और ये बात छत्तीसगढ़ का हर एक व्यक्ति समझ चूका है. 2018 में जो विधानसभा चुनाव के नतीजे आये थे, वो अपवाद थे. हमको अगर छत्तीसगढ़ को अपने पाँव पर खड़े करना है, तो दिल्ली से निर्णायक लड़ाई लड़नी पड़ेगी. राष्ट्रीय दल यह समझते हैं कि छत्तीसगढ़ के लोग बड़ी आसानी से कुचले जा सकते है. आँध्रप्रदेश के लिए पोलावरम बाँध बनेगा और छत्तीसगढ़ के कोंटा और सुकमा के लोग जल समाधि ले लेंगे, यह अब संभव नहीं है. उत्तर प्रदेश में कन्हर नदी में बांध बन जायेगा, सोनभद्र में पानी बरसेगा और सनावल के लोग जल समाधि ले लेंगे, यह भी संभव नहीं है. नगरनार इस्पात संयंत्र की नीलामी हो जाएगी, अडानी और अम्बानी हमारे पूर्वजों द्वारा संरक्षित कोयले का खनन करेंगे और एक रुपया भी छत्तीसगढ़ को नहीं देंगे, ये भी संभव नहीं है. महानदी का सारा पानी का उपयोग उड़ीसा करेगा और छत्तीसगढ़ के किसान लगातार अकाल की मार झेलते रहेंगे, ये भी अब संभव नहीं है. इन सभी मुद्दों पर राष्ट्रीय पार्टियों ने मौन धारण किया हुआ है. आख़िर क्यों? जवाब स्पष्ट है कि अगर ओडिशा और उत्तर प्रदेश और झारखंड और मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच चुनाव करना है तो दूसरे राज्यों को महत्व दिया जाएगा और छत्तीसगढ़ को कुचला जायेगा ।
GST प्रणाली लागू कर दी गयी है. गब्बर सिंह टैक्स का हमारे प्रदेश में क्या प्रभाव पड़ रहा है, अभी तक लोगों को समझ में नहीं आ रहा है. GST टैक्स उपभोग पर लगता है, उत्पादन पर नहीं है, लेकिन छत्तीसगढ़ की जो अर्थव्यवस्था है वो 70% उत्पादन आधारित है. आज हमें हमारे अपार संसाधनों का- न कोयला का, न लोहे का, न सोने का, न हीरे का, न क्लीनकर का, न सीमेंट का, न बिजली का, न वनोपज का- राज्य को राजस्व मिलेगा. सीधे-सीधे 25 हज़ार करोड़ रुपया सालाना का नुक़सान होगा. हमारे ग्रामीण अर्थव्यवस्था बुरी तरह चरमरा जायेगी. राजकोष ख़ाली हो जायेगा. ऐसे में हम मौन धारण करके नई बैठेंगे. समस्या की जो जड़ है, वहाँ तक हम को पहुँचना पड़ेगा. अगर कांग्रेस और भाजपा के नेता वास्तव में छत्तीसगढ़ का लाभ चाहते हैं, हित चाहते हैं, तो उन्हें अपने ही पार्टी के दिल्ली के नेताओं के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद करनी होगी. लेकिन उनमे यह हिम्मत नहीं है ।
देश में 29 राज्य है. कोई तो कारण होगा कि उनमें से 26 राज्यों में क्षेत्रीय पार्टियां अपनी सरकार बना चुकी है. केवल मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ अपवाद है. यह अपवाद ज़्यादा दिनों तक नहीं रहेगा. छत्तीसगढ़ में अब लोग जाग रहे है. दो महीने में हमारी पार्टी को अगर 14% वोट मिला है, हमारे सात विधायक आज विधानसभा में बैठे है, तो स्पष्ट रूप से दिख रहा कि छत्तीसगढ़ की जनता अपनी क्षेत्रीयता को अहमियत देने लगी है. पहले उनको विश्वास नहीं था कि कोई क्षेत्रीय पार्टी स्थापित हो सकती है. पहले उनको विश्वास नहीं था कि छत्तीसगढ़ की राजनीति त्रिकोणीय हो सकती है. लेकिन हमने यह करके दिखा दिया और अब इस विश्वास के बलबूते हम आगे क़दम उठाने जा रहे है ।
हमें नेताओं की जरुरत नहीं हैं, जितने भी नेता आज छत्तीसगढ़ में उछलकूद कर रहे हैं, 90 पर्सेंट ऐसे नेता जोगी परिवार की पैदाईश है और जोगी परिवार को नेता बनाना आता है. क्योंकि जोगी परिवार का सीधा-सीधा लगाव छत्तीसगढ़ की जनता से है. जोगी परिवार को तमाम मुश्किलों के बावजूद लगातार छत्तीसगढ़ महतारी का आशीर्वाद मिलता रहा है और इसीलिए तमाम कोशिशों के बावजूद हमें कोई फसा नहीं पाया. हम पर कोई आरोप सिद्ध नहीं कर पाया है और यही हमारी असली ताकत है। इस पूंजी को हमें पिरोह के रखना है. हम जनता के बीच जाएंगे हम उनके गाँव जाएंगे, हम एक-एक वार्ड जायंगे, एक-एक पंच का चुनाव हम लड़ेंगे, अपने स्वार्थ के लिए नहीं छतीसगढ़ को अगर बचाना है, छतीसगढ़ को अगर बढाना है, छत्तीसगढ़ का अगर भविष्य बनाना है, तो क्षेत्रीय पार्टी के अलावा और कोई विकल्प नहीं है ।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का जो क्षेत्रीयवाद है- नरवा, घुरवा, गरवा, बारी- ये फ़र्ज़ी क्षेत्रीयवाद है. आज भी भूपेश बघेल को अगर कोई फ़ैसला लेना होता है, तो दिल्ली जाना पड़ता है. अगर रमन सिंह को कोई फ़ैसला लेना होता है, तो दिल्ली जाना पड़ता है. लेकिन जोगी की एक ऐसी पार्टी है जिसको फ़ैसल लेने दिल्ली नहीं जाना पड़ेगा. हमारी पार्टी का आलाकमान हमारी प्रदेश की जनता है और उनके लिए हर हद तक लड़ाई लड़ने के लिए हम तैयार है ।
नेता हमारे साथ रहे न रहे, जनता हमारे साथ है. इसमें कोई संदह नहीं होना चाहिए कि भविष्य हमारा है ।

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