panchayattantra24.-रायपुर। माँ और शिशु के बेहतर स्वास्थ्य तथा कुपोषण की रोकथाम के उद्देश्य से विश्व स्तनपान सप्ताह के अंतर्गत बीजापुर के सांस्कृतिक भवन में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। महिला एवं बाल विकास विभाग और स्वास्थ्य विभाग ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत यह कार्यक्रम संयुक्त रूप से आयोजित किया। इसमें जिले के विभिन्न क्षेत्रों से लगभग 280 माताओं और गर्भवती महिलाओं ने भाग लिया।
जन्म के पहले घंटे में स्तनपान सबसे जरूरी
कार्यक्रम में बीजापुर के बीएमओ डॉ. चेलापति राव और डॉ. पटेल ने माताओं को स्तनपान के महत्व की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शिशु के जन्म के पहले एक घंटे के भीतर माँ का पहला गाढ़ा पीला दूध (कोलोस्ट्रम) अवश्य पिलाना चाहिए। यह शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और उसे कई संक्रमणों से बचाता है। उन्होंने यह भी बताया कि जन्म से छह माह तक शिशु को केवल माँ का दूध ही दिया जाना चाहिए। इस दौरान पानी, घुट्टी या अन्य खाद्य पदार्थ देने की जरूरत नहीं होती। छह माह के बाद पूरक आहार शुरू किया जा सकता है, लेकिन स्तनपान जारी रखना चाहिए।
माँ और बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद
विशेषज्ञों ने बताया कि स्तनपान से शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास में मदद मिलती है। इससे संक्रमण का खतरा कम होता है और बच्चा स्वस्थ रहता है। वहीं माँ के लिए भी स्तनपान प्रसव के बाद स्वास्थ्य सुधार में लाभकारी होता है। माताओं को शिशु को सही तरीके से स्तनपान कराने की जानकारी दी गई और जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं से सलाह लेने के लिए प्रेरित किया गया।
पौष्टिक आहार पर दिया गया जोर
कार्यक्रम में गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं को संतुलित और पौष्टिक भोजन लेने की सलाह दी गई। हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, मौसमी फल, दूध और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों को भोजन में शामिल करने पर जोर दिया गया। साथ ही चिकित्सकीय सलाह के अनुसार आयरन-फोलिक एसिड की गोलियों का नियमित सेवन करने की भी जानकारी दी गई।
माताओं ने पूछे सवाल, साझा किए अनुभवं
कार्यक्रम के दौरान माताओं ने स्तनपान से जुड़े कई सवाल पूछे और अपने अनुभव साझा किए। एक गर्भवती महिला ने कहा कि अब उन्हें समझ आया है कि माँ का दूध बच्चे के स्वस्थ भविष्य की सबसे मजबूत नींव है और यह संदेश हर परिवार तक पहुंचना चाहिए।
स्वस्थ बचपन और सुरक्षित मातृत्व की दिशा में प्रयास
विश्व स्तनपान सप्ताह के तहत आयोजित इस कार्यक्रम शिशु मृत्यु दर में कमी लाने, कुपोषण रोकने और सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। महिला एवं बाल विकास विभाग और स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य है कि जिले की हर माँ तक स्तनपान और पोषण से जुड़ी सही जानकारी पहुंचे, ताकि हर बच्चे को जीवन की शुरुआत से ही बेहतर पोषण और स्वस्थ भविष्य मिल सके।
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