
रायपुर । रेलवे क्रासिंग में फंसने वाले लोगों के लिए रेलवे ने राजधानी की सबसे पुरानी सरस्वतीनगर रेलवे क्रासिंग पर अंडरब्रिज बनाने के बजाय रेलवे ने यहां से पटरी के दोनों ओर दो सड़कें निकालकर इन्हें आमानाका अंडरब्रिज से जोडऩे का फैसला कर लिया है। दोनों सड़कें तीन-तीन सौ मीटर से कुछ ज्यादा लंबाई की रहेंगी। हर 5 मिनट में लगभग 10 मिनट तक बंद रहने वाली इस क्रासिंग से कोटा और आसपास के लोग पिछले 5 दशक से परेशान हैं क्योंकि रविवि और इंजीनियरिंग कालेज (अब एनआईटी) के अधिकांश छात्र कोटा और आसपास ही रहते हैं। रेलवे के सर्वे के मुताबिक 24 घंटे में इसे एक लाख से ज्यादा लोग पार कर रहे हैं और हर व्यक्ति आते या जाते समय एक न एक बार इस क्रासिंग के बंद रहने से 10-15 मिनट तक जाम में फंस रहा है। दोनों सड़कों का निर्माण दो महीने के भीतर शुरू किया जाएगा क्योंकि रेलवे के प्रस्ताव को हाल में शासन ने मंजूर भी कर लिया है। रेलवे ने पहले यहां अंडरब्रिज फाइनल किया था, लेकिन आमानाका अंडरब्रिज यहां से बमुश्किल 400 मीटर दूर है, इसलिए रेलवे ने अब यहां से अंडरब्रिज तक पटरी के दोनों ओर सड़कें बनाने का फैसला किया है। ये सड़कें वन-वे की तरह चलेंगी। रेलवे अफसरों ने बताया कि लगभग 30-30 फीट चौड़ाई वाली इन सड़कों के लिए सर्वे कर लिया गया है। पटरी के किनारे रेलवे की जमीन पर ही दोनों सड़कें बन जाएंगी। इनका टेंडर इसी महीने जारी होने की संभावना है।
रोजाना 20 हजार से अधिक विद्यार्थी पार करते हैं क्रॉसिंग
इस रेलवे क्रॉसिंग का महत्व इसलिए भी अधिक है, क्योंकि इसके दूसरे ओर शिक्षण संस्थान हैं। यह फाटक एनआईटी कैंपस के बाउंड्रीवाल से लगा हुआ है। रविवि, साइंस कॉलेज, संस्कृत कॉलेज समेत कई स्कूल भी इसी क्षेत्र में है। यहां पढऩे वाले 20 हजार से अधिक विद्यार्थी रोजाना इस क्रॉसिंग को पार करते हैं। खमतराई के बाद दूसरी भीड़भरी और हर छठवें मिनट में बंद होने वाली सरस्वती नगर क्रासिंग पर अंडरब्रिज अब नहीं बनेगा।
दो दर्जन कॉलोनियां जुड़ जाएंगी
सरस्वती नगर क्रॉसिंग के ट्रैफिक को डायवर्ट करने के लिए पटरी के दोनों तरफ सड़क बनेगी। इनसे कोटा, मोहबा बाजार, हीरापुर और कबीरनगर सहित दो दर्जन कालोनियों ही नहीं, जीई रोड से गुढिय़ारी-कोटा रोज जाने वालों को भी आसान रास्ता मिलेगा। रेलवे दोनों ही सड़कें अपने खर्च पर बनाने की तैयारी कर रहा है। यही नहीं, ट्रैक को फैंसिंग से घेर दिया जाएगा, ताकि हादसे की आशंका न हो। जिन हिस्से में सड़क बननी है, वहां अतिक्रमण भी हटाने होंगे। पटरी के एक तरफ तो जमीन खाली है, लेकिन दूसरी ओर बरसों पुराने कब्जे हैं। यहां डेढ़ सौ से ज्यादा कच्चे-पक्के मकान बने हुए हैं। सड़क बनाने से पहले नगर-निगम को यहां के लोगों की शिफ्टिंग करनी होगी। हालांकि रेलवे प्रशासन ने कब्जेधारियों को नोटिस जारी कर जगह से हटने का निर्देश दे दिया है, लेकिन बरसात के कारण प्रशासन ने कार्रवाई रोकी हुई है।
300 ट्रेनों का आवागमन रोज : सरस्वतीनगर क्रासिंग मुंबई-हावड़ा मेन लाइन पर है। इससे 155 एक्सप्रेस-पैसेंजर ट्रेनें तथा लगभग डेढ़ सौ मालगाडिय़ां (कुल लगभग 300) 24 घंटे में गुजर रही हैं। ट्रैफिक प्रेशर केकारण रेल प्रशासन ने यहां स्वचालित सिग्नल लगाए हैं, जो ट्रेन गुजरने के दस सेकेंड के बीच ही खुल जाता है। लेकिन जंबो मालगाडिय़ों के कारण फाटक 15-15 मिनट भी बंद रहता है। इसलिए दिन में कई बार जाम लग रहा है।
कचना में भी ओवरब्रिज मंजूर : राजधानी में खमतराई, कचना और सरस्वती नगर में ही रेलवे क्रॉसिंग पर ट्रैफिक चल रहा है। बाकी सारे फाटक पिछले पांच साल में बंद कर दिए गए हैं। सरस्वती नगर से आमानाका तक एप्रोच रोड बनने के बाद यह क्रासिंग भी स्थायी तौर पर बंद हो जाएगी। इसके बाद दो ही क्रासिंग बचेंगी। इनमें से खमतराई में फोरलेन अंडरब्रिज का प्रोजेक्ट फाइनल है, लेकिन कंपनी ने काम रोक दिया है। कचना में भी ओवरब्रिज प्रस्तावित है।
