
रायपुर । राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद अब मोतीलाल वोरा कांग्रेस अंतरिम राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे। नयी नियुक्ति तक मोतीलाल वोरा ही राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर कामकाज देखेंगे। छत्तीसगढ़ से मोतीलाल वोरा फिलहाल कांग्रेस पार्टी में सबसे वरीष्ठतम नेता हैं, ऐसे में राष्ट्रीय अध्यक्ष के हटने के बाद पार्टी के संविधान के मुताबिक पार्टी के सबसे वरीष्ठ सदस्य को अंतरिम अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी जाती है, इसी वजह से मोतीलाल वोरा को पार्टी ने अंतरिम राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी है। आपको बता दें कि मोतीलाल वोरा अभी छत्तीसगढ़ से राज्यसभा के सांसद हैं। उनका राजनीति में लंबा अनुभव रहा है, वो दो बार मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। पार्टी के सबसे पुराने और गांधी परिवार के सबसे करीबी नेता में मोतीलाल वोरा की गिनती होती है। वहीं लंबे समय तक वो पार्टी के कोषाध्यक्ष की भी जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।
इस्तीफे का औपचारिक ऐलान: 4 पन्नों का पत्र लिखकर कहा- हार के लिए मैं जिम्मेदार, पार्टी को बनाने के लिए कड़े फैसले जरूरी, राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद एक सप्ताह के भीतत सीडब्ल्यूसी की बैठक बुलायी जायेगी, जिसमें नये राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव किया जायेगा। पार्टी से कई लोगों के अंदर इस बात की उम्मीदें थे की राहुल गांधी को मना लिया जायेगा, लेकिन आखिरकार राहुल गांधी ने अपना इस्तीफा दे दिया और चार पन्नों का अपना त्यागपत्र ट्विटर पर भी पोस्ट कर दिया।
मोतीलाल वोरा को डॉ रमन सिंह ने दी बधाई: भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने कांग्रेस के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष मोतीलाल वोरा को शुभकामनाएं दी। डॉ रमन सिंह ने कहा कि कांग्रेस गांधी परिवार से मुक्त हुई है।
इससे पहले डॉ रमन सिंह ने भूपेश सरकार पर जमकर तंज कसा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सरकार वादाखिलाफी कर रही है. कांग्रेस पार्टी जनता से किये गए तमाम वादों पर फेल हुई है। किसानों से कर्जामाफी, युवकों को बेरोजगारी भत्ता देने का वादा, प्रदेश में शराबबंदी करने के दावे जैसे कई वादों से मुकरने पर सरकार से जनता निराश है।
डॉ रमन सिंह ने आगे कहा कि नगरीय निकाय व पंचायत चुनाव में जिस तरह भाजपा को एकतरफा जीत मिली थी, उसी तरह इन चुनावों में भी पूर्णबहुमत में कमल खिलेगा। कांग्रेस की सरकार आदिवासियों के नाम से वोट लेने वाली है। लेकिन आदिवासियों के प्रति कोई सहानभूति नहीं ह। उनकी महत्वपूर्ण योजनाओं में फेरबदल कर दिया गया है, जो विकास के कार्य और योजनाओं का लाभ भाजपा दे रही थी, वे सारे काम बंद हैं. कांग्रेस सिर्फ नारे लगाती है और आदिवासियों से वोट लेकर भूल जाती है। जिस तरह लोकसभा में कांग्रेस की हार हुई है उसके बाद तो कोई रास्ता ही नहीं बचता है राहुल के इस्तीफा के अलावा।
