
रायपुर । राजधानी रायपुर समेत प्रदेशभर में में ब्रॉडेड कंपनी के नाम पर नकली सामान खपाने का कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है। अकेले रायपुर में हर महीने करीब 50 लाख रुपये के इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण, कास्मेटिक, खाद्य सामग्री, कपड़े समेत अन्य सामान खपाया जा रहा है। दरअसल नामी कंपनियों के ट्रेडमार्क, स्टीकर का इस्तेमाल कर कारोबारी नकली सामान बेचने का गोरखधंधा रायपुर से लेकर पूरे प्रदेश में चला रहे हैं। पुलिस का दावा है कि हर माह 50 करो? से अधिक के नकली उत्पाद अकेले राजधानी में बेचा रहा है। शनिवार को मौदहापारा पुलिस ने रविभवन के हिंगलाज मोबाइल दुकान में छापा मारकर 262 नग नकली पावर बैंक जब्त कर दुकान संचालक समेत तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया था। कुछ महीने पहले क्राउन कंपनी का नकली स्टीकर लगाकर एलईडी टीवी समेत अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण बेचने के मामले में प्रियदर्शिनी नगर निवासी जगदीश किंगरानी की गिरफ्तारी की गई थी। उसकी दुकान से 14 नग नकली एलईडी टीवी जब्त की गई। इससे पहले भी कई कंपनियों का नकली सामान रायपुर में पकड़ा जा चुका है।
दिल्ली, मुंबई से पहुंचता है नकली सामान : रायपुर में सबसे अधिक मुंबई और दिल्ली के बाजार से नकली सामान को खरीदकर कारोबारी यहां पर ट्रेन से लेकर आते हैं। नकली सामान का बाजार तेजी से ही यहां बढ़ रहा है। इस कारोबार से जहां नामचीन कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, वहीं इनके उत्पादों की बिक्री में भारी गिरावट आई है।
ऑनलाइन साइट भी दे रही धोखा : नकली सामान बेचने के गोरखधंधे में अब ऑनलाइन शॉपिंग साइट भी शामिल हो गई है। ऑनलाइन खरीदारी करने वाले महेंद्र सिंह समेत अन्य खरीदारों का कहना है कि स्नैपडील, फ्लिपकार्ट, नापतौल, अमेजॉन समेत अन्य साइट पर आर्डर देने पर उन्हें नकली उत्पाद प्राप्त हुए हैं। कारोबारियों का दावा है कि ऑनलाइन खरीदारी में सबसे अधिक इलेक्ट्रॉनिक्स, कास्मेटिक, स्पोर्ट्स का सामान, कपड़े आदि नकली सप्लाई किए जा रहे हैं।
लंबे समय से खपा रहा था नकली टीवी
मौदहापारा थाना प्रभारी यदूमणि सिदार ने बताया कि नकली पावर बैंक से साथ पकड़े गए तीनों आरोपितों ने पूछताछ में मुंबई से नकली पावर बैंक लाकर यहां बेचने की जानकारी दी। मुंबई के उस कारोबारी का नाम-पता मिल गया है, जल्द ही टीम को मुंबई रवाना किया जाएगा।
ऐसे करें पहचान
ब्रांडेड कंपनियों के मिलते-जुलते नाम से अनेक नकली प्रोडेक्ट बाजार में बिक रहे हैं। पहली नजर में असली-नकली प्रोडेक्ट को पहचानना बड़ा ही मुश्किल होता है। नकली और असली प्रोडेक्ट में कुछ न कुछ ऐसा जरूर डिफरेंस होता है, जिससे वह पहचान में आ जाता है। जैसे-प्रोडेक्ट के नाम और स्पेलिंग में फर्क, बॉक्स पर डिटेल का अभाव, व्याकरण या मात्राओं की त्रुटि ही नहीं, उसकी डिजाइनिंग भी इस तरह से करते हैं कि पहली नजर में अच्छे-अच्छे गधाा खा जाते हैं। ग्राहक कोई भी उत्पाद खरीदते समय यदि होशियारी से सभी बातों पर ध्यान दें तो वे नकली सामान खरीदने से बच सकते हैं।
