
रायपुर । छछानपैरी गांव में तीन साल पहले हुई गोदावरी देवी की हत्या की फाइल अब हमेशा के लिए बंद होती दिखाई दे रही है। दरअसल हत्याकांड के एक मात्र चश्मदीद गवाह 81 वर्षीय आसाराम डहरिया की बुधवार की आधी रात निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। वे लंबे समय से बीमार थे।
हत्याकांड के समय पत्नी गोदावरी को बचाने के दौरान आसाराम पर भी जानलेवा हमला किया गया था, लेकिन वे संघर्ष करते हुए बच गए थे। कई महीने तक निजी अस्पताल में भर्ती रहने के बाद स्वस्थ होकर घर लौटे थे, लेकिन सिर में लगी चोट की वजह से उनकी याददाश्त कमजोर हो गई थी।
पुलिस को दिए गए बयान में आसाराम ने हमलावरों को देखने की जानकारी दी थी, परंतु नाम नहीं बता पाए। लिहाजा हत्याकांड का खुलासा अब तक नहीं हो पाया। 10-11 जून 2016 की दरम्यानी रात राजधानी से लगे सेजबहार थाना क्षेत्र के छछानपैरी गांव में कांग्रेस सरकार के मंत्री शिव डहरिया की मां गोदावरी देवी की निर्मम हत्या हुई थी।
पुलिस ने जांच के आधार पर शिव के भाई नरेंद्र डहरिया पर शुरू से हत्या करने का शक जताते हुए उसका पालीग्राफी टेस्ट तक कराया, लेकिन आरोप साबित करने लायक सबूत नहीं मिल पाया। इसके बाद से मामला ठंडे बस्ते में पड़ा रह गया।
छछानपैरी गांव के लोगों के जेहन में अभी भी हत्याकांड का खौफनाक मंजर ताजा है। गांव वालों का कहना है कि मंत्री डॉ. शिव डहरिया चाहें तो अपनी मां की हत्या की गुत्थी सुलझाने के लिए एसआइटी गठित करवाकर नए सिरे से जांच करवा सकते हैं, लेकिन अभी तक उनकी ओर से ऐसी कोई जानकारी सामने नहीं आई है। जबकि पूर्ववर्ती भाजपा सरकार से लगातार हत्याकांड की सीबीआइ जांच कराने की मांग वे कई बार करते रहे हैं।
हत्याकांड को दबाने पुलिस पर जांच की दिशा बदलने का आरोप
मंत्री डहरिया के छोटे भाई नरेंद्र ने पुलिस पर जांच की दिशा परिवार की तरफ मोड़कर केस को दबाने का आरोप लगाया था। नरेंद्र ने मां की हत्या की नए सिरे जांच कराने की आवाज कई अफसरों के सामने उठाई थी।
तत्कालीन आइजी दीपांशु काबरा से नरेंद्र ने भेंटकर जांच की मांग की थी, जिस पर आइजी तैयार हो गए थे और कवायद भी शुरू की थी। इसी बीच उनका तबादला हो गया। पिछले दिनों ही एसएसपी आरिफ शेख से नरेंद्र ने हत्याकांड में ससुराल पक्ष का हाथ होने का संदेह जताकर जांच की मांग की थी, परंतु केस की फाइल डंप पड़ी है।
