रायपुर । प्रदेश के छात्र हिंदी संख्याओं को भूल रहे हैं। वे न केवल हिंदी संख्या लिखने और पहचानने में अक्षम होते जा रहे हैं, बल्कि बड़े अंकों को हिंछी में उच्चारित भी नीं रक पा रहे। हिंदी कैलेंडर, पुरानी किताबों में दर्ज हिंदी अंकों को वे समझ भी नहीं पा रहे। विस्मृत हो रही हिंदी को देखते हुए इस सत्र से छात्रों को हिंदी के अंक अर्थात देवनागरी लिपि के अंक पढ़ाए जाने की तैयारी है।
देवनागरी लिपि से परिचय के साथ हिंदी अंक में जोड़ घटाना, गुणा भाग जैसे अभ्यास भी छात्रों को कराए जाएंगे। पहली से पांचवीं कक्षा तक के पाठ्यक्रम में देवनागरी अंक शामिल रहेंगे। गणित विषय में इससे संबंधित अध्याय जोड़ा गया है। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद इसके लिए पाठ्यपुस्तक निगम में भेजा जा चुका है। इन अध्यायों के जरिए रोचक तरीके से छात्रों को देवनागरी लिपि से परिचित कराया जा रहा है।
होगा फायदा
देवनागरी लिपि को शामिल किए जाने से छात्र छात्राओं की योग्यता बढ़ेगी। उन्हें नया सीखने को मिलेगा, जिससे उनका विकास होगा।
पी दयानंद, संचालक, एससीईआरटी
इसलिए फैसला
कुछेक सर्वे में ये बातें सामने आई कि छात्र केवल रोमन अंक ही लिखने और पढ़ पाने सक्षम है। हिंदी अंक न वे पढ़ पाते हैं और न ही लिख पाते हैं। हिंदी की बड़ी संख्याओं को भी छात्र स्पष्ट उच्चारित नहीं कर पा रहे हैं। तमाम स्थितियों को देखते हुए और छात्रों की क्षमता बढ़ाने के लिए देवनागरी लिपि को कोर्स में जगह दी गई है।
इससे जुड़े अभ्यास भी छात्रों को रकने होंगे, ताकि वे इसे अपने व्यावहारिक जीवन में भी उतार सकें। रोमन अंक भी साथ ही पढ़ाए जाएंगे। गौरतलब है कि मौजूदा शैक्षणिक सत्र से सिलेबस में कई अन्य बदलाव भी इससीईआरटी ने किए हैं। यह बदलाव भी उनमें से एक ही है।
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