
रायपुर। नान घोटाले में डॉ. रमन सिंह पर लग रहे आरोपों के बीच नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा कि डॉ. रमन के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने पीडीएस के माध्यम से जिस तरह के ऐतिहासिक कार्य किये उस पर हमें गर्व है. यहां की चावल वितरण योजना को न केवल संयुक्त राष्ट्र संघ की विभिन्न एजेंसियों से अपितु दुनिया भर से सराहना मिली है. एक मामले में तो स्वयं सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ का मॉडल समूचे देश में लागू करने को तब की केंद्र सरकार को कहा था. आज़ादी के पचास वर्ष के बाद तब छत्तीसगढ़ जैसे प्रदेशों की यह हालत करके रखी थी कांग्रेस ने कि भोजन जैसी मूलभूत योजना को लागू करना पड़ा था. उससे पहले कांग्रेसी शासन में आंत्रशोध, डायरिया और भूख से मृत्यु होना आम बात थी. यह भाजपा शासन की ही उपलब्धि थी कि लगातार भूख की ख़बरों के लिए बदनाम रहे प्रदेश में एक भी भूख का मामला दर्ज नहीं हुआ. प्रदेश के आदिवासी जन अपने मुखिया डा. रमन सिंह जी को ‘चाउर वाले बाबाÓ कहने लगे. खाद्य सुरक्षा का छत्तीसगढ़ का नया क़ानून बना जिसमें भोजन का अधिकार यहां लोगों को मिला और फिर उसे समूचे देश में लागू किया गया. जहां तक नान घोटाले का सवाल है, तो आप सब जानते हैं कि उस मामले में डा. रमन सिंह जी की सरकार ने ही तब हो रही अनियमितता को संज्ञान में लेकर अभियुक्तों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था. एक ऐसा आदतन अपराधी, जो दो बार में पांच वर्ष से अधिक समय तक जेल होकर आया हो, उससे हलफऩामा दिला कर उसके आधार पर राजनीति करना कांग्रेस का चरित्र ही दिखा रहा है।इसी तरह एक अन्य अभियुक्त के ही आवेदन पर एसआइटी गठित कर देना बिल्कुल ग़ैर क़ानूनी है।पीडीएस योजना लागू करते समय भाजपा सरकार की प्राथमिकता यही थी कि सभी पात्रों तक भोजन की पहुँच हो. बाद में अनियमितता की जानकारी होने पर तब भाजपा सरकार ने अवैध कार्ड निरस्त किये थे. सबसे गौर करने वाली बात यह है कि इस निरस्तीकरण का सबसे ज्यादा विरोध कांग्रेस ने ही किया था, जो आज ज्यादा राशन कार्ड होने की बात पर राजनीति कर रही है. अभी इस मामले की सुनवाई उच्च न्यायालय और जिला न्यायालय में भी चल रहा है. ऐसे समय में मुख्य अभियुक्त से इस तरह का बयान दिलाने का सीधा अर्थ यही है कि निहित स्वार्थी तत्व इस मामले में न्यायायिक प्रक्रिया को प्रभावित करना चाहते हैं. हाल के कुछ घटनाक्रमों पर गौर कीजिये तो मामलों के मुख्य अभियुक्तों से ही हलफनामा दिलवा कर उसे भाजपा को बदनाम करने के लिए उपयोग किया जा रहा है. आप मंतूराम प्रकरण को देखें और इस प्रकरण को भी. दोनों में मुख्य अभियुक्त का ही इस्तेमाल भाजपा के खिलाफ किया जा रहा है.इन तमाम हलफनामों का कोई भी विधिक औचित्य नहीं है, बस केवल अपनी नाकामी ढंकने और भाजपा को बदनाम करने ऐसे-ऐसे कृत्य किये जा रहे हैं. हालांकि मामला न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण केस के मेरिट पर कुछ टिप्पणी करना ठीक नहीं है. अगर सच में कांग्रेस हाल के इन दोनों हलफनामे पर भरोसा करती है तो भाजपा फिर यह चुनौती देती है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल स्वयं शपथ पत्र देकर इन हलफनामों को प्रमाणित करें, फिर उसे न्यायालय में प्रस्तुत करें. आप मंतूराम प्रकरण देखें, ऐन दंतेवाडा नामांकन के दिन स्व. भीमा मंडावी की हत्या की जांच कर रहे अग्निहोत्री आयोग ने प्रोसिडिंग को डिस्क्लोज करके संदेहियों को क्लीन चिट दे दिया था. और आप अब इस प्रकरण को देखें. इन सभी मामले में यह साबित हो रहा है कि चुकि दंतेवाडा उपचुनाव में कांग्रेस के पास बताने…
