panchayattantra24.-बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय द्वारा न्याय प्रणाली को अधिक प्रभावी, संवेदनशील और समयबद्ध बनाने के लिए किए जा रहे निरंतर एवं समन्वित प्रयासों का वर्ष 2025 में सकारात्मक परिणाम सामने आया है।
वर्ष भर में लंबित मामलों की संख्या में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई। न्यायालय की त्वरित, पारदर्शी और सुलभ न्याय के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता से यह परिणाम सामने आया। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा के नेतृत्व में मामलों के शीघ्र और प्रभावी निपटारे पर विशेष जोर दिया गया। न्याय में देरी, न्याय से वंचित करना है- के सिद्धांत को व्यवहार में उतारते हुए सुदृढ़ नीतिगत दिशा-निर्देश, सतत मॉनिटरिंग और न्याय वितरण से जुड़े सभी हितधारकों के साथ बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया गया। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी 2025 तक हाईकोर्ट में कुल 84,305 मामले लंबित थे। वर्ष 2025 के दौरान 55,416 नए मामले दर्ज हुए, जबकि 64,054 मामलों का निपटारा किया गया।
इसके परिणामस्वरूप वर्ष के अंत तक लंबित मामलों में शुद्ध रूप से 8,638 की कमी आई, जो लगभग 10.25 प्रतिशत की उल्लेखनीय गिरावट है। खास बात यह रही कि 2025 में निपटारे की दर, दर्ज मामलों की तुलना में 115.59 प्रतिशत रही। यानी नए मामलों से अधिक पुराने मामलों का सफलतापूर्वक निपटारा हुआ। इस उपलब्धि को मुख्य न्यायाधीश ने न्यायाधीशों की अटूट प्रतिबद्धता और न्यायिक अधिकारियों व न्यायालय कर्मियों के समर्पित प्रयासों का परिणाम बताया है। इन सामूहिक कोशिशों ने न केवल न्यायिक दक्षता बढ़ाई, बल्कि आम नागरिकों को शीघ्र और प्रभावी न्याय उपलब्ध कराने की दिशा में एक मजबूत और सार्थक कदम साबित हुई हैं।
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