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Home » खनिज उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा छत्तीसगढ़, अन्वेषण से एडवांस मैन्युफैक्चरिंग तक विकसित होगी पूरी वैल्यू चेन – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
छत्तीसगढ़

खनिज उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा छत्तीसगढ़, अन्वेषण से एडवांस मैन्युफैक्चरिंग तक विकसित होगी पूरी वैल्यू चेन – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

Author AuthorBy Author AuthorAugust 31, 2026No Comments14 Mins Read
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*क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल्स में आत्मनिर्भरता से मजबूत होगी भारत की आर्थिक और सामरिक शक्ति*

*छत्तीसगढ़ के 5 क्रिटिकल मिनरल ब्लॉक्स की हो रही नीलामी, मुख्यमंत्री ने निवेशकों से किया सक्रिय भागीदारी का आह्वान*

*मुख्यमंत्री साय ने ई-रेत संगवारी और टिन पोर्टल का किया शुभारंभ*

*सीएमडीसी का इंडियन ओवरसीज बैंक और पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के साथ एमओयू, वित्तीय सहयोग और कौशल विकास को मिलेगी गति*

Panchayattantra24.com – रायपुर l छत्तीसगढ़ में उपलब्ध समृद्ध खनिज संपदा और क्रिटिकल मिनरल्स की व्यापक संभावनाएं प्रदेश को विकास के नए क्षितिज पर ले जाने की क्षमता रखती हैं। हमारा लक्ष्य केवल धरती से खनिज निकालना नहीं, बल्कि अन्वेषण से उत्खनन, प्रसंस्करण से मूल्य संवर्धन और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग से रिसाइक्लिंग तक पूरी मिनरल वैल्यू चेन छत्तीसगढ़ में विकसित करना है। इससे प्रदेश में निवेश बढ़ेगा, नए उद्योग स्थापित होंगे और युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज नवा रायपुर स्थित मेफेयर लेक रिजॉर्ट में भारत सरकार के खान मंत्रालय द्वारा आयोजित क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल ब्लॉक्स की नीलामी की आठवीं किश्त के रोड शो को संबोधित करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल्स आने वाले समय में देश की आर्थिक प्रगति, तकनीकी आत्मनिर्भरता और सामरिक सुरक्षा के प्रमुख आधार होंगे। आज के तेजी से बदलते वैश्विक और तकनीकी परिदृश्य में इन खनिजों का महत्व बहुत आगे बढ़ चुका है। रक्षा उद्योग से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लीन एनर्जी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, डिजिटल टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक्स और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग तक आधुनिक अर्थव्यवस्था के लगभग हर उभरते क्षेत्र के लिए इन खनिजों की विश्वसनीय उपलब्धता आवश्यक है।

 

मुख्यमंत्री श्री साय ने ई-रेत संगवारी पोर्टल और टिन पोर्टल का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम (सीएमडीसी) द्वारा इंडियन ओवरसीज बैंक तथा पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के साथ महत्वपूर्ण एमओयू भी किए गए।

 

*विकसित भारत के लिए क्रिटिकल मिनरल्स में आत्मनिर्भरता आवश्यक*

 

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत तेजी से दुनिया की प्रमुख आर्थिक और तकनीकी शक्तियों में अपनी जगह बना रहा है। मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत और नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन के माध्यम से देश में क्रिटिकल मिनरल्स के अन्वेषण, प्रसंस्करण और इनसे जुड़े उन्नत उद्योगों के विकास को नई गति मिली है।

 

उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में दुनिया के सभी प्रमुख देश अपने रणनीतिक संसाधनों और उनकी सप्लाई चेन को सुरक्षित करने में जुटे हैं। ऐसे समय में भारत के लिए क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल्स की उपलब्धता में आत्मनिर्भर होना आर्थिक आवश्यकता के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

 

*रक्षा से एआई तक – नई अर्थव्यवस्था की आधारशिला हैं क्रिटिकल मिनरल्स*

 

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का रक्षा उद्योग तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ा है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय रक्षा क्षमताओं और स्वदेशी तकनीक की प्रभावशीलता को दुनिया ने देखा। आधुनिक रक्षा उपकरणों के निर्माण में अनेक स्ट्रेटेजिक मिनरल्स की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिए एक मजबूत और आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग के लिए इनकी सुरक्षित और निरंतर आपूर्ति जरूरी है।

 

उन्होंने कहा कि इसी प्रकार एआई, सेमीकंडक्टर, बैटरी, क्लीन एनर्जी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, डिजिटल प्रौद्योगिकी और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग के लिए लिथियम, ग्रेफाइट, रेयर अर्थ एलिमेंट्स, वैनेडियम, निकेल और क्रोमियम जैसे खनिज अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। भविष्य की अर्थव्यवस्था में इनकी भूमिका लगातार बढ़ने वाली है।

 

*क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ के पास बड़ी संभावनाएं*

 

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख खनिज संपन्न राज्यों में है और अब क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में भी प्रदेश नई पहचान बनाने की ओर अग्रसर है। कटघोरा और बस्तर में लिथियम एवं दुर्लभ मृदा तत्व, बलरामपुर में ग्रेफाइट, वैनेडियम एवं गैलियम, बालोद में फास्फोराइट तथा महासमुंद में निकेल, क्रोमियम और ग्लाकोनाइट की संभावनाएं मौजूद हैं।

 

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल्स की नीलामी की आठवीं किश्त में देश के 7 राज्यों के 20 खनिज ब्लॉक्स शामिल हैं, जिनमें छत्तीसगढ़ के 5 ब्लॉक्स हैं।

 

मुख्यमंत्री ने निवेशकों से इन ब्लॉक्स की नीलामी में सक्रिय भागीदारी का आह्वान करते हुए कहा कि यह केवल खनिज ब्लॉक हासिल करने का अवसर नहीं है। यह अन्वेषण, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, नवाचार और नए उद्योगों के माध्यम से छत्तीसगढ़ तथा देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने का अवसर है। ये क्रिटिकल मिनरल ब्लॉक्स विकसित भारत के निर्माण की महत्वपूर्ण धुरी बन सकते हैं।

 

*पूरी मिनरल वैल्यू चेन छत्तीसगढ़ में विकसित करने पर जोर*

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की सोच खनिज उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है। हमारा प्रयास है कि खनिज आधारित उद्योगों की पूरी वैल्यू चेन प्रदेश में विकसित हो। अन्वेषण और उत्खनन के बाद खनिज बाहर भेजने के बजाय उनका प्रसंस्करण, वैल्यू एडिशन और उनसे संबंधित एडवांस मैन्युफैक्चरिंग प्रदेश में हो, ताकि प्राकृतिक संसाधनों का अधिकतम आर्थिक लाभ छत्तीसगढ़ और यहां के लोगों को मिले।

 

उन्होंने कहा कि नवा रायपुर में एआई आधारित डेटा सेंटर पार्क और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर तथा राजनांदगांव में इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। ऐसे आधुनिक उद्योगों में क्रिटिकल मिनरल्स की आवश्यकता होगी। खनिज संसाधनों की निकट उपलब्धता प्रदेश को इन उद्योगों के लिए स्वाभाविक प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त प्रदान करेगी।

 

*नई औद्योगिक नीति और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस से निवेश को प्रोत्साहन*

 

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार नए जमाने के उद्योगों को छत्तीसगढ़ की ओर आकर्षित करने के लिए निवेश अनुकूल वातावरण तैयार कर रही है। नई औद्योगिक नीति में उभरते और भविष्य की अर्थव्यवस्था से जुड़े क्षेत्रों के लिए अनेक प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम के माध्यम से कम एवं मध्यम जोखिम वाले उद्योगों के लिए आवश्यक औपचारिकताओं को सरल किया गया है। वन क्लिक सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 से विभिन्न अनुमतियों और एनओसी की प्रक्रिया भी सुगम हुई है।

 

उन्होंने कहा कि पूंजी निवेश सहायता, स्टांप शुल्क एवं विद्युत शुल्क में छूट, ब्याज अनुदान और रोजगार आधारित प्रोत्साहन सहित विभिन्न सुविधाएं निवेशकों को उपलब्ध कराई जा रही हैं। राज्य में खनिज संपदा, ऊर्जा, भूमि, कनेक्टिविटी और औद्योगिक अधोसंरचना की उपलब्धता क्रिटिकल मिनरल आधारित उद्योगों के लिए मजबूत इकोसिस्टम तैयार करती है।

 

*खनिज राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि*

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य निर्माण के समय छत्तीसगढ़ का खनिज राजस्व लगभग 400 करोड़ रुपए था। ढाई वर्ष पहले यह लगभग 12 हजार करोड़ रुपए था, जो अब बढ़कर 16 हजार करोड़ रुपए से अधिक हो गया है।

 

उन्होंने कहा कि खनिज संपदा से प्राप्त राजस्व का उपयोग प्रदेश के विकास और जनकल्याण में किया जा रहा है। जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) के माध्यम से खनन प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के साथ स्थानीय लोगों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिए विभिन्न कार्य किए जा रहे हैं।

 

मुख्यमंत्री श्री साय ने उद्योग जगत और निवेशकों से छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा में भागीदार बनने का आह्वान करते हुए कहा कि आज पूरा देश छत्तीसगढ़ की ओर देख रहा है। प्रदेश प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है और तेजी से औद्योगिक एवं आर्थिक विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

 

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह रोड शो छत्तीसगढ़ में निवेश, तकनीकी सहयोग और नई साझेदारियों के लिए मजबूत आधार तैयार करेगा तथा प्रदेश को देश की क्रिटिकल मिनरल वैल्यू चेन के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।

 

*क्रिटिकल मिनरल्स में आत्मनिर्भरता देश की रणनीतिक आवश्यकता : केंद्रीय राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे*

 

केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल्स में आत्मनिर्भरता भारत की आर्थिक और रणनीतिक शक्ति के लिए अत्यंत आवश्यक है। लंबे समय तक देश अनेक महत्वपूर्ण खनिजों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहा, लेकिन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भर भारत के संकल्प के साथ इस दिशा में तेजी से काम हुआ है।

 

उन्होंने कहा कि क्रिटिकल मिनरल्स का उपयोग वाहनों, इनवर्टर और ई-रिक्शा से लेकर जहाजों तथा आधुनिक रक्षा उपकरणों तक में होता है। उन्होंने निवेशकों, युवाओं और स्टार्टअप्स से इस क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का लक्ष्य केवल खनिजों का दोहन नहीं, बल्कि सतत और जिम्मेदार खनन को बढ़ावा देना है, जिसमें पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों के हितों का विशेष ध्यान रखा जाए।

 

*खनन के साथ सुनियोजित और टिकाऊ विकास भी जरूरी : केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू*

 

केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने कहा कि क्रिटिकल मिनरल्स की बढ़ती वैश्विक मांग के बीच छत्तीसगढ़ के पास अपनी समृद्ध खनिज संपदा और मजबूत औद्योगिक आधार के बल पर नई संभावनाओं को साकार करने का बड़ा अवसर है।

 

उन्होंने कहा कि खनिज ब्लॉक्स की नीलामी की सफलता केवल उनके आवंटन से नहीं मापी जानी चाहिए। इसका वास्तविक प्रभाव अन्वेषण, निवेश, प्रोसेसिंग सुविधाओं की स्थापना, तकनीकी विकास, वैल्यू एडिशन और रोजगार सृजन के रूप में दिखाई देना चाहिए। खनन और औद्योगिक निवेश के साथ आवास, परिवहन, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसी नागरिक सुविधाओं का सुनियोजित विकास भी जरूरी है। इसके लिए सरकार और उद्योग जगत के बीच मजबूत साझेदारी आवश्यक है।

 

*निवेशकों को हर स्तर पर मिलेगा हैंडहोल्डिंग सपोर्ट : मुख्य सचिव श्री विकास शील*

 

मुख्य सचिव श्री विकास शील ने कहा कि राज्य सरकार खनिज क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने के साथ पूरी वैल्यू चेन विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बेहतर बनाने के लिए 43 सेवाओं को रिस्क रेटेड अप्रोच के तहत अधिसूचित किया गया है। लो और मीडियम रिस्क गतिविधियों के लिए सेल्फ डिक्लेरेशन तथा हाई रिस्क गतिविधियों के लिए आवश्यक अनुमति की व्यवस्था की जा रही है।

 

उन्होंने कहा कि औद्योगिक परियोजनाओं की समयबद्ध स्थापना के लिए रणनीतिक परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग, श्रम कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन और भूमि अधिग्रहण प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। खनन क्षेत्र में सर्वे, एनफोर्समेंट, परिवहन, रॉयल्टी भुगतान और नीलामी प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाया जा रहा है तथा भविष्य में ट्रांसपोर्ट सिस्टम को और अधिक तेज तथा पेपरलेस बनाने का लक्ष्य है।

 

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पर्यावरण, वन, भूमि अधिग्रहण एवं अन्य आवश्यक स्वीकृतियों में निवेशकों को सक्रिय हैंडहोल्डिंग सपोर्ट दे रही है। अब खनिज ब्लॉक्स की नीलामी लैंड शेड्यूलिंग के बाद की जा रही है, जिससे निवेशकों को भूमि, वन क्षेत्र एवं संबंधित प्रक्रियाओं की स्पष्ट जानकारी पहले ही उपलब्ध हो सके।

 

मुख्य सचिव ने निवेशकों से केवल खदानों में निवेश तक सीमित न रहते हुए पूरी मिनरल वैल्यू चेन और डाउनस्ट्रीम उद्योगों में निवेश करने का आग्रह किया। उन्होंने स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाने वाले नए बिजनेस मॉडल विकसित करने पर भी जोर दिया।

 

*देश में अब तक 56 क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल ब्लॉक्स की सफल नीलामी*

 

भारत सरकार के खान मंत्रालय के सचिव श्री केशव चंद्र ने कहा कि भारत के वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों की ओर तेजी से आगे बढ़ने के साथ क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल्स की विश्वसनीय आपूर्ति सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। ये खनिज इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, नवीकरणीय ऊर्जा, बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, रक्षा, एयरोस्पेस और उर्वरक सहित अनेक उन्नत उद्योगों के लिए जरूरी हैं।

 

उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार को क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल ब्लॉक्स की नीलामी का अधिकार मिलने के बाद अब तक 88 ब्लॉक्स की नीलामी प्रक्रिया शुरू की गई है, जिनमें 56 ब्लॉक्स की सफलतापूर्वक नीलामी हो चुकी है।

 

उन्होंने छत्तीसगढ़ की खनिज संभावनाओं की सराहना करते हुए कहा कि भारत के पहले लिथियम युक्त खनिज ब्लॉक की नीलामी छत्तीसगढ़ के कटघोरा लिथियम एवं रेयर अर्थ एलिमेंट ब्लॉक से हुई। आठवीं किश्त में 7 राज्यों के 20 खनिज ब्लॉक्स में से 5 छत्तीसगढ़ में हैं।

 

उन्होंने बताया कि नीलामी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, समयबद्ध और निवेशक अनुकूल बनाने के लिए माइलस्टोन आधारित अनुपालन, समयबद्ध स्वीकृतियों, यूनिफाइड माइनिंग पोर्टल और बीमा सिक्योरिटी बॉन्ड जैसे अनेक सुधार किए गए हैं। उन्होंने निवेशकों से इन अवसरों का लाभ उठाते हुए भारत के सुरक्षित और आत्मनिर्भर क्रिटिकल मिनरल इकोसिस्टम के निर्माण में भागीदार बनने का आग्रह किया।

 

*वैज्ञानिक अन्वेषण और पारदर्शी व्यवस्था पर राज्य का विशेष जोर : खनिज सचिव श्री पी. दयानंद*

 

खनिज विभाग के सचिव श्री पी. दयानंद ने कहा कि राज्य सरकार खनिज संपदा के सतत उपयोग, वैज्ञानिक अन्वेषण, पारदर्शी नीलामी और निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है।

 

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण सहित विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से वैज्ञानिक सर्वेक्षण, भू-आंकड़ों के संकलन और मैपिंग को मजबूत कर रही है। ऑनलाइन एवं पारदर्शी व्यवस्थाओं का विस्तार किया जा रहा है, ताकि संभावित खनिज क्षेत्रों को तेजी से उत्पादनशील खदानों में परिवर्तित किया जा सके। सरकार का लक्ष्य खनिज उत्खनन के साथ खनिज आधारित उद्योग, स्थानीय रोजगार, तकनीकी विकास और मूल्य संवर्धन को भी गति देना है।

 

*ढाई वर्षों में 40 एक्सप्लोरेशन प्रोजेक्ट, 2,800 किलोमीटर से अधिक जियोलॉजिकल सर्वे*

 

खनिज विभाग के संचालक एवं सीएमडीसी के प्रबंध संचालक श्री रजत बंसल ने बताया कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देश पर प्रदेश में सतत खनन पद्धतियों के साथ खनिज संसाधनों के वैज्ञानिक अन्वेषण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। पिछले वित्तीय वर्ष में प्रदेश को लगभग 16 हजार 700 करोड़ रुपए का खनिज राजस्व प्राप्त हुआ, जो निर्धारित लक्ष्य का करीब 98 प्रतिशत है। खनिज राजस्व में वर्ष-दर-वर्ष लगभग 14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

 

उन्होंने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में राज्य में 40 एक्सप्लोरेशन प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं और 2,800 किलोमीटर से अधिक जियोलॉजिकल सर्वे पूरा किया गया है। प्रदेश में अब तक 65 खनिज ब्लॉक्स की नीलामी की गई है, जिनसे लगभग 4 लाख करोड़ रुपए के संभावित राजस्व की उम्मीद है।

 

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में लिथियम, ग्रेफाइट, वैनेडियम, गैलियम, गोल्ड, टंगस्टन, निकेल, क्रोमियम, कॉपर, लेड-जिंक और डायमंड सहित विभिन्न महत्वपूर्ण खनिजों की व्यापक संभावनाएं हैं। कटघोरा में लिथियम, बलरामपुर में ग्रेफाइट-वैनेडियम-गैलियम तथा बस्तर के टिन बेल्ट सहित विभिन्न क्षेत्रों में अन्वेषण एवं नीलामी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

 

खनिज ऑनलाइन 2.0, डीएमएफ 2.0 और ई-नीलामी जैसी डिजिटल व्यवस्थाओं के माध्यम से खनिज क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही मजबूत की गई है। खदानों और माइनर मिनरल्स की निगरानी के लिए ड्रोन सर्वे का भी उपयोग किया जा रहा है।

 

*ई-रेत संगवारी से पीएम आवास हितग्राहियों को सुविधा, टिन पोर्टल से आदिवासी परिवारों को मिलेगा उचित मूल्य*

 

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री साय ने ई-रेत संगवारी पोर्टल का शुभारंभ किया। इसके माध्यम से प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को रियायती दर पर रेत उपलब्ध कराने की व्यवस्था को अधिक सुगम और पारदर्शी बनाया जाएगा।

 

इसी प्रकार दंतेवाड़ा क्षेत्र में टिन से जुड़े आदिवासी समुदायों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने और व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से टिन पोर्टल शुरू किया गया है। इन डिजिटल पहलों से खनिज प्रशासन में तकनीक के उपयोग के साथ आम नागरिकों को सीधे लाभ पहुंचाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ा है।

 

*सीएमडीसी के दो महत्वपूर्ण एमओयू, कौशल विकास और वित्तीय सहयोग को मिलेगी गति*

 

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम और इंडियन ओवरसीज बैंक के बीच एमओयू किया गया। इसके साथ ही कोरन्डम कटिंग एवं पॉलिशिंग के प्रशिक्षण के लिए सीएमडीसी और पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के बीच भी एमओयू हुआ। इन समझौतों से खनिज क्षेत्र में वित्तीय सहयोग, कौशल विकास, मूल्य संवर्धन और निवेश की संभावनाओं को नई गति मिलेगी।

 

इस अवसर पर माइनर मिनरल्स पर प्रकाशित पुस्तक का विमोचन किया गया तथा तीन लाइमस्टोन माइनिंग लीज ब्लॉक्स के लिए एनआईटी जारी करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई गई।

 

कार्यक्रम में केंद्रीय खान मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री संदीप बसंत कदम सहित केंद्र एवं राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, खनिज क्षेत्र से जुड़े निवेशक, उद्योग प्रतिनिधि, विशेषज्ञ और विभिन्न स्टेकहोल्डर्स उपस्थित थे।

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