पिछले वर्ष करीब सात करोड़ रुपए के धान को चूहों द्वारा नुकसान पहुंचने के आरोप सामने आए थे। अब एक बार फिर बड़े पैमाने पर धान की कमी सामने आने के बाद व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
panchayattantra24.-कवर्धा। एक तरफ जहां नए सीजन की धान खरीदी की तैयारी चल रही है, वहीं बीते सीजन में की गई धान खरीदी का ही हिसाब गड़बड़ाया हुआ है. जिले में धान खरीदी सीजन 2025-26 के आंकड़ों में उपार्जन केंद्रों से लेकर संग्रहण केंद्रों तक धान के उठाव और मिलान में हजारों मीट्रिक टन की कमी सामने आई है।
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, उपार्जन केंद्रों में करीब 11 करोड़ 93 लाख रुपये और संग्रहण केंद्रों में लगभग 5 करोड़ 70 लाख रुपये मूल्य के धान का अंतर सामने आया है। दोनों को जोड़ें तो यह आंकड़ा 17 करोड़ 63 लाख रुपये से अधिक पहुंचता है। सवाल यह है कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में धान कहां गया? क्या यह महज सूखत है या फिर कहीं गड़बड़ी भी हुई है? खास बात यह है कि आठ समितियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद धान की कमी की भरपाई अब तक नहीं हो पाई है।
कवर्धा जिले में धान खरीदी सीजन 2025-26 के दौरान 108 उपार्जन केंद्रों में कुल 6 लाख 37 हजार 235 मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई। लेकिन खरीदी के बाद जब धान के उठाव और उपलब्ध स्टॉक का मिलान हुआ, तो आंकड़ों में बड़ा अंतर सामने आया। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, 6 लाख 33 हजार 392 मीट्रिक टन धान का ही मिलान हो पाया। इस तरह करीब 3 हजार 848 मीट्रिक टन धान की कमी दर्ज की गई।
बताया जा रहा है कि जिले के 52 उपार्जन केंद्रों में धान की कमी सामने आई, जबकि शेष 56 केंद्रों में कमी शून्य दर्ज की गई। इस मामले में खाद्य विभाग और विपणन विभाग ने समितियों पर सख्ती बरती। आठ समितियों के खिलाफ थानों में प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई। इसके बावजूद कमी की पूरी भरपाई नहीं हो सकी है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जिम्मेदारों पर कार्रवाई के बाद भी नुकसान की वसूली आखिर कब होगी?
धान की कमी का मामला सिर्फ उपार्जन केंद्रों तक सीमित नहीं है। जिले के बाजार चारभाठा और बघर्रा स्थित दोनों संग्रहण केंद्र भी सवालों के घेरे में हैं। जानकारी के मुताबिक, इस सीजन में उपार्जन केंद्रों से उठाव के बाद यहां करीब 6 लाख 20 हजार क्विंटल धान संग्रहित किया गया था। अंतिम उठाव और स्टॉक मिलान के दौरान करीब 18 हजार 400 क्विंटल धान की कमी सामने आई। इसकी अनुमानित कीमत लगभग 5 करोड़ 70 लाख रुपये बताई जा रही है।
समितियों को मिलने वाले कमीशन से होगी कटौती
कबीरधाम जिला विपणन अधिकारी किशोर चंद्रा ने बताया कि धान की जो कमी पाई गई है, उसकी भरपाई संबंधित समितियों को मिलने वाले कमीशन से कटौती करके की जाएगी। इसके लिए खाद्य विभाग लगातार कार्यवाही कर रही है।
