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 panchayattantra24.-बस्तर। बस्तर सांसद महेश कश्यप ने दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात कर बस्तर दशहरा में शामिल होने न्योता दिया है। इस दौरान गृहमंत्री ने भी न्योता स्वीकार किया और कहा कि वे बस्तर दशहरा के मुरिया दरबार की रस्म में शामिल होने बस्तर जरूर आएंगे। दरअसल, पिछले करीब 618 साल से बस्तर दशहरा पर्व मनाया जा रहा है। खास बात है कि यह पर्व करीब 75 दिनों तक चलता है और यहां रावण का दहन नहीं होता है, बल्कि रथ की परिक्रमा करवाई जाती है। यही इसकी प्रसिद्धि की सबसे बड़ी वजह है। 
इसके साथ ही दशहरा समिति के सदस्यों ने छत्तीसगढ़ सरकार के मंत्री और अन्य सांसदों को भी न्योता दिया। रायपुर में CM विष्णुदेव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, अरुण साव, कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप, मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, जांजगीर-चांपा सांसद कमलेश जांगड़े, बिलासपुर विधायक अमर अग्रवाल, भाजपा प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय, भाजपा प्रदेश महामंत्री रामू रोहरा को विशेष आमंत्रण दिया है।
 

 

panchayattantra24.-बस्तर/दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल ही में आई बाढ़ और भूस्खलन से बुरी तरह प्रभावित उत्तर भारत के कई राज्यों का दौरा करने वाले हैं। इस दौरान वो बाढ़ प्रभावित राज्यों में स्थिति की समीक्षा करेंगे। पीएम मोदी का यह दौरा लगातार बारिश से हुई तबाही के बीच हो रहा है, जिसने सैकड़ों लोगों की जान ले ली है और बुनियादी ढांचे और कृषि को भारी नुकसान पहुंचाया है। हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पंजाब और हरियाणा में लगातार हो रही मानसूनी बारिश के कारण इस मौसम में 500 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि पिछले दो दिनों में भूस्खलन, अचानक बाढ़ और मकान ढहने से दर्जनों लोगों की जान चली गई है। राजमार्ग अवरुद्ध हैं, नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, फसलें नष्ट हो गई हैं और हजारों लोग फंसे हुए हैं क्योंकि यह क्षेत्र दशकों में सबसे खराब मौसम आपदाओं में से एक का सामना कर रहा है। हिमाचल प्रदेश सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में से एक बना हुआ है, जहां मानसून की शुरुआत से अब तक 360 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसडीएमए) के अनुसार, 1,087 सड़कें अभी भी अवरुद्ध हैं, जबकि 2,838 बिजली आपूर्ति लाइनें और 509 जल आपूर्ति योजनाएं बाधित हैं। 
 अनुमान के मुताबिक 3,979.52 करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान हुआ है, जिससे सार्वजनिक और निजी दोनों तरह के बुनियादी ढांचे प्रभावित हुए हैं। वहीं पंजाब में बाढ़ ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। राज्य के 23 जिलों के 1,900 से ज्यादा गांव जलमग्न हो गए हैं, जिसके परिणामस्वरूप 43 लोगों की मौत हो गई है। लगभग 1.71 लाख हेक्टेयर फसलें बर्बाद हो गई हैं, जिसके कारण राज्य सरकार ने इस संकट से निपटने के लिए केंद्र से विशेष वित्तीय पैकेज की मांग की है। जम्मू-कश्मीर में स्थिति में सुधार के संकेत दिख रहे हैं। कई दिनों की भारी बारिश के बाद झेलम नदी और अन्य जलाशयों का जलस्तर कम होने लगा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने अगले 24 घंटों में क्षेत्र में शुष्क मौसम रहने और केवल कुछ स्थानों पर हल्की बारिश होने का अनुमान लगाया है। उत्तराखंड और अन्य उत्तर भारतीय क्षेत्रों में भी भीषण बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं हुई हैं, जिससे व्यापक संपत्ति का नुकसान हुआ है और दैनिक जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। फिलहाल राहत कार्य जारी हैं। राज्य और केंद्रीय दोनों एजेंसियां बचाव कार्यों का समन्वय कर रही हैं और प्रभावित लोगों को आवश्यक सामग्री वितरित कर रही हैं।
 

 

panchayattantra24.-बस्तर। 29 गांवों के लिए इस बार आजादी का पर्व बहुत खास है। कभी नक्सलियों के कब्जे में रहे इस गांव के लोगों को अब नक्सलवाद से आजादी मिल गई है। देश की आजादी के बाद पहला ऐसा मौका है, जब आज इन गांवों में शान से तिरंगा फहराया गया। इससे पहले तक नक्सली यहां काला झंडा फहराते थे। 
दरअसल, सुकमा, बीजापुर और नारायणपुर जिले के 29 ऐसे गांव हैं, जहां नक्सलवाद चरम पर था। यहां लोकतंत्र नहीं बल्कि नक्सलियों का गनतंत्र हावी था। सालभर के अंदर सुरक्षा बलों का कैंप खोला गया। फोर्स अंदरूनी इलाके में घुसी। नक्सलियों का एनकाउंटर कर उन्हें खदेड़ा गया। कैंप स्थापित होने के बाद आज पहली बार आजादी का जश्न मनाया गया। फोर्स की मौजूदगी के बीच पहली बार इन इलाकों के ग्रामीण हाथों में तिरंगा पकड़ें। भारत माता की जय-जयकार कर आजादी का जश्न मनाया। वहीं बस्तर के संभागीय मुख्यालय जगदलपुर के लाल बाग मैदान में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, दंतेवाड़ा में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और जगदलपुर MLA किरण सिंहदेव ने ध्वजारोहण किया।
 बीजापुर जिले के 11, नारायणपुर के 11 और सुकमा के 7 गांव में आजादी का पर्व मनाया गया। बीजापुर जिले का पुजारी कांकेर जो नक्सलियों का सबसे सेफ जोन माना जाता था, फोर्स अब यहां तक भी पहुंच चुकी है। वहीं कोंडापल्ली और जिडपल्ली जैसे गांव में भी नक्सल दहशत थोड़ी कम हुई है।
 

 
 panchayattantra24.-बस्तर। जगदलपुर में कांग्रेसियों ने रायपुर-जगदलपुर-ओडिशा NH-30 पर चक्का जाम कर दिया है। नेशनल हाइवे पर सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ता बैठ गए हैं। ED की कार्रवाई के खिलाफ इनका प्रदर्शन है।भाजपा की केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की जा रही है। इस मार्ग से चलने वाली वाहनों के पहिए फिलहाल थम गए हैं। तेलीबांधा चौक में भारी फोर्स तैनात कांग्रेस की आर्थिक नाकेबंदी के लिए कांग्रेसी और पुलिस का जमावड़ा होने लगा है। वीआईपी रोड चौक पर कांग्रेस का प्रदर्शन होगा।प्रदर्शन स्थल पर भारी पुलिस बल की तैनाती हो रही हैं। 
जहां स्टॉपर, बैरिकेट्स लाए जा रहे हैं। महिला पुलिस कर्मियों की भी प्रदर्शन स्थल पर ड्यूटी लगा दी गई है। प्रदर्शन स्थल पर एडिशनल एसपी और सीएसपी रैंक जैसे अधिकारी भी मौजूद हैं। कांग्रेस ने केवल बड़े मालवाहकों को रोकने का फैसला किया है। छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंड्रस्टीज ने आर्थिक नाकेबंदी का समर्थन नहीं किया है, चैंबर ऑफ कॉमर्स के महामंत्री अजय भसीन ने वीडियो जारी कर कहा, आर्थिक नाकेबंदी से विकास में अवरोध:, रोजमर्रा के व्यापार में बुरा असर पड़ता है।
 

नारायणपुर जिले के 14 शिक्षकविहीन स्कूलों को मिले शिक्षक, बच्चों को मिलेगी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा
panchayattantra24.com-नारायणपुर। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए लागू की गई युक्तियुक्तकरण नीति का सकारात्मक असर अब अबुझमाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्रों में भी दिखाई देने लगा है। नारायणपुर और ओरछा विकासखंड के सुदूर और पहुँचविहीन गांवों में वर्षों से शिक्षकविहीन चल रहे विद्यालयों में अब योग्य शिक्षकों की नियुक्ति हो चुकी है। इससे इन क्षेत्रों में शिक्षा की तस्वीर तेजी से बदल रही है और विद्यार्थियों को गुणवत्तायुक्त शिक्षा की सौगात मिल रही है।
132 शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण, शिक्षा में आया संतुलन
जिला शिक्षा अधिकारी रमेश कुमार निषाद ने बताया कि जिले में कुल 132 शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण किया गया है। इसमें 1 व्याख्याता, 49 शिक्षक, 10 प्रधानपाठक और 72 सहायक शिक्षक शामिल हैं। जिले के 14 प्राथमिक शालाएं जो पूरी तरह शिक्षकविहीन थीं, अब उनमें शिक्षकों की नई पदस्थापना की गई है। साथ ही 108 एकल शिक्षक प्राथमिक शालाएं और 5 माध्यमिक शालाएं भी अब शिक्षकों की उपलब्धता से लाभान्वित हो चुकी हैं।
दूरस्थ इलाकों के स्कूलों को मिली नई ऊर्जा
ग्राम जड्डा, धोबिनपारा, ईकरभट्टी, मोहनार, कस्तुरमेटा, गट्टाकाल, हिरंगई, नेलांगुर, ताड़ोबेडा, पुसालामा और पदमेटा जैसे दुर्गम क्षेत्रों के स्कूलों में अब शिक्षक पदस्थ हो चुके हैं। साथ ही जबगुंडा, थुलथुली, रेकावाया, लंका, काकवाड़ा, पुंगारपाल, हितवाड़ा जैसे कई उच्च प्राथमिक विद्यालयों को भी युक्तियुक्तकरण के अंतर्गत शिक्षक उपलब्ध कराए गए हैं। इससे इन स्कूलों में शैक्षणिक गतिविधियों को गति मिली है और बच्चों की उपस्थिति में सुधार देखा जा रहा है।
शिक्षकों और पालकों को मिली राहत
पूर्व में शिक्षकविहीन स्कूलों में अन्य विद्यालयों के शिक्षकों को अतिरिक्त भार लेकर पढ़ाना पड़ता था। इससे न केवल अध्यापन प्रभावित होता था, बल्कि पालक भी अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित रहते थे। अब नई पदस्थापना से शिक्षकों पर से बोझ कम हुआ है और पालकों में भी संतोष का वातावरण है।
सशक्त हो रही है शिक्षा व्यवस्था
शासन की युक्तियुक्तकरण नीति ने यह सिद्ध किया है कि सही योजना, निष्पक्ष क्रियान्वयन और दूरदर्शिता के साथ अगर काम किया जाए, तो सबसे कठिन क्षेत्रों में भी शिक्षा की रोशनी पहुँचाई जा सकती है। नारायणपुर जिले के उदाहरण से स्पष्ट है कि अब अबुझमाड़ जैसे चुनौतीपूर्ण इलाकों में भी शिक्षा के क्षेत्र में ठोस बदलाव संभव है।

panchayattantra24.com-सुकमा। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में सुरक्षाबलों ने नक्सलियों की एक बड़ी साजिश को नाकाम करते हुए बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री बरामद किया है। सुकमा पुलिस अधीक्षक किरण चौहान ने बताया कि नक्सलियों ने कोंटा थाना क्षेत्र के पीलावाया के जंगल में जमीन के अंदर प्लास्टिक के ड्रम में विस्फोटक छिपा रखा था, जिसका उद्देश्य सुरक्षाबलों पर बड़ा हमला करना था।
सुकमा डीआरजी टीम, विशेष आसूचना शाखा सुकमा और 218वीं वाहिनी सीआरपीएफ की संयुक्त कार्रवाई में पीलावाया के जंगल में सर्चिंग के दौरान विस्फोटक सामग्री बरामद की गई। उन्होंने बताया कि सुकमा जिले में चलाए जा रहे नक्सल उन्मूलन अभियान का एक हिस्सा है, भेजी इलाके से सर्चिग पर निकले सीआरपीएफ और डीआरजी के जवानों न अभियान के दाैरान विस्फोटक सामग्री बरामद किया है।
 

panchayattantra24.com-नारायणपुर। छत्तीसगढ़ में एक ओर नक्सलवाद के खिलाफ अभियान जारी है, वहीं दूसरी ओर उनके पुनर्वास की नीति को लगातार बेहतर बनाया जा रहा है।इस बीच शुक्रवार को 22 नक्सलियों ने पुलिस अधीक्षक के समक्ष आत्मसमर्पण किया। इनमें 8 महिला नक्सली भी शामिल हैं। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों पर 37 लाख 50 हजार रुपए का इनाम घोषित था। ये सभी अबूझमाड़ क्षेत्र में सक्रीय थे।
जानकारी के मुताबिक, पुलिस के लगातार दबाव, मुठभेड़ों में बड़े नक्सली नेताओं के मारे जाने और विकास की मुख्यधारा से जुड़ने के लिए 22 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। इनमें 8 महिला नक्सली शामिल हैं। सरेंडर करने वाले सभी नक्सली आमदई, नेलनार और कुतुल एरिया कमेटी में सक्रिय थे। लंबे समय से संगठन में रहकर आईईडी प्लांट, पुलिस मूवमेंट ट्रेस, जनताना सरकार के विस्तार करने जैसे गतिविधियों में शामिल थे। बता दें कि इस वर्ष अब तक 110 नक्सली सरेंडर कर चुके हैं।
 

प्रशासन की पहुंच बढ़ी -165 ग्राम पंचायतों में हुआ सर्वे
panchayattantra24.com-बीजापुर। मोर आवास मोर अधिकार योजना के तहत् राज्य के बीजापुर जिले में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अब तक जिले में 30 हजार से अधिक परिवार आवास प्लस सर्वे में शामिल हो चुके हैं। जिससे उन्हें स्थाई आवास की दिशा में एक नई आश मिली है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशानुरूप सभी पात्र परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का विशेष प्रयास किया जा रहा है। वर्ष 2018 में तैयार की गई आवास प्लस की सूची में छूटे हुए पात्र परिवारों को सर्वे में शामिल करने मोर दुवार – साय सरकार थीम पर प्रदेश भर में महाअभियान चलाया गया। जिले में कुल 30 हजार 186 परिवार इस सर्वे में शामिल हुए है। इस सर्वे की महत्वपूर्ण बात यह है कि 2018 में जहां 117 ग्राम पंचायतों में ही सर्वे किए गए थे, वहीं इस बार जिले में कुल 170 ग्राम पंचायतों में से 165 ग्राम पंचायतों में सर्वे कार्य पूर्ण किया गया है। पहुंच विहीन ग्राम पंचायतें जो दशकों से माओवाद प्रभावित क्षेत्र होने के कारण पूर्व में किये गए सर्वे में छूट गए थे। उन क्षेत्रों में भी जिला प्रशासन की ठोस रणनीति की बदौलत पहली बार वंचित परिवार का सर्वे कर पात्र परिवारों को शामिल करने में सफलता मिली है।
प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के जिला समन्वयक गंभीर सिंह परिहार ने बताया कि कलेक्टर संबित मिश्रा के मार्गदर्शन में जरूरत मंद वंचित परिवार तक पहुंचने आवास प्लस सर्वे 2.0 की कार्ययोजना बनाई गई। जिला प्रशासन की विशेष पहल पर निरंतर मॉनिटरिंग एवं नियमित समीक्षा से बड़ी संख्या में परिवार सर्वे में शामिल हुए हैं। मोर दुवार साय सरकार थीम पर प्रदेश भर में 15 अप्रैल से 30 अप्रैल तक सर्वेक्षण विशेष पखवाड़ा चलाये जाने का शासन स्तर से निर्णय था, सर्वे करने की अंतिम तिथि 15 मई निर्धारित थी। तय समय-सीमा में सर्वे से वंचित परिवारों को जोड़ने हेतु जिला स्तर से पत्र प्रेषित कर पुनः आवास प्लस ऐप को चालू करवाने हेतु राज्य शासन को पत्र प्रेषित किया। जिसे स्वीकार करते हुए भारत सरकार द्वारा 16 जून से 26 जून तक सर्वे तिथि को बढ़ाया गया।
जिला प्रशासन की सक्रियता और समर्पित कार्यप्रणाली के चलते यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सभी पात्र परिवारों को उनका हक मिल सके।
 

प्रधानमंत्री आवास, उज्ज्वला और महतारी वंदन योजना से मिली नई दिशा
panchayattantra24.com-जशपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में शासन की योजनाओं का लाभ अब समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँच रहा है। जशपुर जिले के दुलदुला विकासखंड के ग्राम खटंगा के एक साधारण परिवार की कहानी इसका जीवंत उदाहरण है, जहाँ शासन की तीनों योजनाओं ने एक साथ उनकी ज़िंदगी को नई दिशा दी है।
हितग्राही सुरेश राम की पत्नी सुमित्रा बाई बताती हैं कि पहले हम कच्चे घर में रहते थे। बरसात हो या गर्मी, हमेशा डर बना रहता था। पानी टपकता था, दीवारें गिरने का डर और रात-बिरात साँप, बिच्छू का डर अलग से। लेकिन प्रधानमंत्री आवास योजना से मिला पक्का घर अब हमारे लिए एक नई दुनिया जैसा है। अब न डर है, न परेशानी, घर भी साफ-सुथरा है, और बच्चों को पढ़ने-लिखने का भी अच्छा माहौल मिल गया है।
सुमित्रा बाई आगे बताती हैं कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना से गैस सिलेंडर और चूल्हा मिलने से अब हम धुँआ से मुक्ति मिली और खाना बना पाते हैं। पहले जंगल से लकड़ी लाना पड़ता था और आग जलाना तब बहुत मुश्किल था। आँख में जलन होती थी एवं खाँसी और समय भी ज़्यादा लगता था। अब रसोई में आसानी से खाना बन जाता है। उन्होंने आगे बताया कि, मुझे मुख्यमंत्री महतारी वंदन योजना के तहत हर महीने 1000 रूपए मिलते हैं। उसी से हम तेल, नमक, साबुन जैसे ज़रूरी सामान खरीद लेते हैं। कभी बेटी को स्कूल के लिए कॉपी-किताब भी लेना हो, तो उसी से काम चल जाता है। उनकी बेटी कुमारी संगीता बताती है, जब कच्चा घर था, तब हम पढ़ाई भी ठीक से नहीं कर पाते थे। बरसात के दिन बहुत दिक्कत होती थी। अब जब पक्का घर मिला है, तो मन लगता है। हम अब बहुत खुश हैं।” परिवार ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का आभार जताया।
 

न कोविड वार्ड, न तैयारी, मरीज तड़पता रहा अस्पताल में
panchayattantra24.com-कांकेर। जिले में सोमवार रात इलाज के दौरान कोरोना मरीज की मौत हो गई। साल 2025 में कोरोना से मौत की जिले में यह पहली घटना है।
जानकारी के अनुसार, कोंडागांव जिले के फरसगांव निवासी 48 वर्षीय मरीज को पिछले सप्ताह कांकेर अस्पताल इलाज के लिए भर्ती कराया गया था। मरीज को लीवर से संबंधित गंभीर बीमारी थी, जिसका इलाज कांकेर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चल रहा था।
कोविड से संक्रमित मरीज की मौत के बाद इससे बचाव के तैयारियों की भी पोल खुल गई। कोरोना को लेकर देश भर में अलर्ट जारी किया गया है, लेकिन कांकेर जिले में कोरोना पॉजीटिव मरीजों के लिए वार्ड तक नहीं बनाया गया है।