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K.W.N.S.-क्या आपके घर में पैसे की तंगी है, क्या पैसा घर में रुक नहीं पाता है. पैसा आते ही उसके खर्च होने का रास्ता निकलता है. क्या किसी तरह से खींचतान कर घर की गाड़ी चलानी पड़ रही है, यदि इन सवालों का जवाब हां में है तो समस्या को दूर करने के लिए आज हम आपको कुछ ऐसी चीजों के बारे में बताएंगे, जिनको वास्तु शास्त्र में बताया गया है. इस लेख में हम ऐसे उपाय बताएंगे, जिनसे आपके घर में लक्ष्मी जी का वास हो जाएगा, उनकी कृपा बरसेगी तो आर्थिक तंगी से भी निजात मिल जाएगी. बस आपको कुछ चीजें घर में रखनी होंगी. इन चीजों को रखने से घर में सुख-समृद्धि और माता लक्ष्मी का वास हो जाएगा. सुख-समृद्धि और धन वैभव पाना हर किसी की चाहत संसार में हर व्यक्ति की चाहत होती है कि वह भी अमीर आदमी बन जाए. उसके पास सुख-समृद्धि और धन-वैभव हो. वह अपने मोहल्ले, शहर, प्रदेश या फिर दुनिया के अमीर लोगों में भले ही न शुमार हो, किंतु उसे किसी भी तरह निर्धनता का आभास न हो और पैसों के अभाव में कष्ट न हों. कोई भी आदमी गरीबी का मुंह नहीं देखना चाहता है, वह चाहता है कि बच्चों की मांग आने के पहले ही वह उन्हें पूरी कर दे. पत्नी के मन में दिन में किसी चीज का विचार आए और शाम को वही कीमती चीज बाजार खरीद कर ले आए और पत्नी को भेंट करे. माता-पिता को भी खुशहाल रखे. इस तरह घर में विराजित कर लें भगवान गणेश की प्रतिमा अगर आप को गरीबी से बचना है तो घर में इन चीजों को अवश्य ही रखना चाहिए, इनको रखने के बाद घर पर कभी भी और गरीबी नहीं आती है. सबसे पहली चीज है गणेश जी की मूर्ति. गणेश जी को विघ्नहर्ता भी कहा जाता है. घर में जब भी कोई नया कार्य शुरू किया जाता है तो सबसे पहले गणेश जी की पूजा की जाती है. गणेश जी को सारे विघ्नों को हरने वाला देव माना गया है. ऐसा कहा जाता है कि सर्वप्रथम गणेश वंदना करने से कभी भी कोई काम नहीं बिगड़ता है और उसमें फायदा ही फायदा होता है, इसलिए सभी को घर में कम से कम गणेश जी की एक मूर्ति रखनी चाहिए. इस मूर्ति को घर में विराजित करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि वह ऐसी जगह पर हो कि उनकी दृष्टि घर के मुख्य द्वार पर पड़े. ऐसा करने से घर में लक्ष्मी जी जल्दी आती हैं और घर में धन की कमी नहीं होती है. बप्पा को रिद्धि-सिद्धि का दाता माना गया है, घर से दरिद्रता दूर रहती है. हमेशा अन्न और धन के भंडार भरे रहते हैं.
 

 
K.W.N.S.-वैसे तो भोजन में स्वाद को बढ़ाने और सेहत को तंदुरुस्त बनाए रखने के लिए पीले सरसों को हम जानते हैं। पर क्या आपको पता है, पीली सरसों के छोटे दाने जीवन में बड़े बदलाव भी ला सकते हैं। बता दें कि सरसों के ये दाने, खाने के अलावा हमें बुरी नजर से भी बचाते हैं। जी हां! आप सही सोच रहे हैं। यह घर में फैल रही नेगेटिविटी को यूं चुटकियों में दूर कर देते हैं। आइए आज हम आपको बताते हैं सरसों से जुड़ी वस्तु उपायों के बारे में… पीली सरसों के उपाय वास्तु शास्त्र में वास्तु में पीली सरसों के खूब उपाय बताए गए हैं। माना जाता है कि घर में आई सारी परेशानियों को सरसों के टोटके से झटपट दूर भगाया जा सकता है। घर के माहौल, कलह-कलेश, आर्थिक संकट, व्यवसाय में गिरावट आदि चीजों से छुटकारा दिलाने में सरसों एक बेहतर और कारगर उपाय बताया जाता है। 
आपको बता दें कि तंत्र शास्त्र में भी सरसों का बेहद महत्व है। इस छोटे से सरसों के दाने घर से नेगेटिव पावर को दूर भगाती हैं। पीली सरसों के टोटके कुछ इस प्रकार हैं अगर आपको लग रहा है कि आपके घरों में भूत-प्रेत जैसी बुरी शक्ति का साया है तो ऐसे में कपूर के साथ सरसों को जलाएं। पूरे घर में उसे लेकर घूम आएं। ऐसा करने से घरों से नेगेटिव एनर्जी दूर होती हैं। साथ ही सुख-शांति घरों में बरकरार रहती हैं। अगर आप किसी नए घर में शिफ्ट होने जा रहे हैं तो प्रवेश से पहले घर के सारे कोनों में पीली सरसों का छिड़काव करें। ऐसा करने से घर में सकारात्मकता का प्रवाह होता है। आने वाले जीवन में समस्याएं कम होंगी। रविवार के दिन कांच की एक कटोरी में पीली सरसों भरकर घर के ईशान कोण (North-East) की दिशा में रख दें। इससे घर में सुख, शांति, सम्मृद्धि आदि बरकरार रहेगी। घर में लगातार झगड़े हो रहे हों या फिर आपको लग रहा हो कि किसी बुरे साए का असर है तो ऐसे में पीली सरसों को घरों में जलाएं।
 घर की रक्षा के लिए सरसों की एक पोटली बना कर इसे पूजन स्थल पर रख दें। मान्यता है कि भगवान के समक्ष ये रखने से घरों में खुशियों का संचार होता है। इसके अलावा पीले कपड़े में सरसों के दाने बांध कर घर के मेन गेट पर व्यवस्थित करें। इससे घर में चल रहे पितृ-दोष से छुटकारा मिलता है। साथ ही बुरी नजरों से बचाता है। फैक्ट्री या कार्य स्थल पर सरसों को जलाकर दिखाने से बाधित कार्य अपनेआप ठीक हो जाते हैं। ठप पड़ी फैक्ट्री वापस से चलने लगती है। घर के पूर्व या उत्तर दिशा में पीली सरसों को अवश्य रखें। यह परिवार में सुरक्षा कवच की तरह काम करती है। घरों से नेगेटिविटी को दूर करने में सक्षम होती है। घर का कोई सदस्य अगर लंबे समय से बीमार या परेशान चल रहा हो तो इसके लिए हाथ में सरसों लेकर उसके ऊपर से सात बार उल्टा घुमा दें। ऐसा करने से जातक को राहत मिलेगी। 
चांदी की एक डिबिया में घर के पूजन स्थल पर जरूर रखें। ऐसा करने से घरों में सकारात्मकता का संचार होता है। सप्ताह में कम से कम एक एक दिन घर के छत पर या खेतों में सरसों का छिड़काव करें। इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। साथ ही आपके काम में आ रहे विघ्न भी दूर होते हैं। घर के मुख्य गेट पर प्रति रविवार को सरसों को छिड़कने से घर में चल रही पैसों की किल्लत, परिवार में तनाव, मानसिक तनाव आदि दिक्कतों से बचा जा सकता है। दरअसल ये सारे वास्तुशास्त्र के द्वारा बताए गए पीली सरसों के उपाय हैं। जिसे अपनाने से घरों में शांति बरकरार रहती है। साथ ही यह नेगेटिव पावर के प्रवेश को रोकती है।
 

 
K.W.N.S.-चमत्कारिक मंत्रों का जाप ज्योतिष। हिंदू धर्म में सप्ताह का हर दिन किसी न किसी देवी देवता की पूजा आराधना को समर्पित किया गया है वही बुधवार का दिन भगवान श्री गणेश की पूजा के लिए खास होता है इस दिन गणपति की पूजा विधिवत की जाती है और उपवास भी रखा जाता है मान्यता है कि बुधवार का दिन गणेश पूजा का सबसे उत्तम दिन है अगर आप श्री गणेश को जल्द प्रसन्न कर उनका आशीर्वाद पाना चाहते हैं तो कुछ खास मंत्रों का जाप आप कर सकते हैं इन मंत्रों के जाप से भगवान जल्द प्रसन्न होकर अपने भक्तों के सारे संकट दूर करते हैं और जीवन में सुख समृद्धि व शांति प्रदान करते हैं तो आज हम आपके लिए लेकर आए है श्री गणेश भगवान के कुछ चमत्कारिक मंत्र, तो आइए जानते हैं। 
बुधवार के दिन श्री गणेश के प्रभावशाली मंत्रों का जाप करने और भगवान को मोदक व दूर्बा का भोग लगाने से वे जल्दी प्रसन्न होते हैं और अपनी कृपा भक्तों पर करते हैं जिससे जीवन में कोई समस्या नहीं रहती है और खूब तरक्की भी होती है। अगर आप किसी समस्या से घिरे हुए है और इससे बाहर आना चाहते हैं तो आप बुधवार के दिन ॐ गं गणपतये नमः इस मंत्र का जाप कम से कम सात बुधवार तक करें इससे जीवन में आने वाली सारी बाधाएं दूर हो जाएंगी और जल्द ही इसका असर आपको दिखने लगेगा। भगवान श्री गणेश का श्गणपूज्यो वक्रतुण्ड एकदंष्ट्री त्रियम्बकरू। नीलग्रीवो लम्बोदरो विकटो विघ्रराजक रू।। धूम्रवर्णों भालचन्द्रो दशमस्तु विनायकरू। गणपर्तिहस्तिमुखो द्वादशारे यजेद्गणम।। ये मंत्र भी बहुत ही प्रभावशाली है अगर किसी जातक की कुंडली में ग्रह दोष है तो हर बुधवार कम से कम 21 बार आप इस मंत्र का जाप करें ऐसा करने से ग्रह दोषों से छुटकारा मिल जाएगा। 
वही किसी भी शुभ काम की शुरुआत करने से पहले भगवान श्री गणेश के इस मंत्र वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभण् निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ का कम से कम 11 बार जाप करने से कार्य बिना किसी बाधा के पूरा हो जाता है और उसमें सफलता भी हासिल होती है। अगर आप आर्थिक तंगी झेल रहे हैं और इससे छुटकारा पाना चाहते हैं तो ऐसे में आप हर बुधवार के दिन श्री गणेश के त्रयीमयायाखिलबुद्धिदात्रे बुद्धिप्रदीपाय सुराधिपायण् नित्याय सत्याय च नित्यबुद्धि नित्यं निरीहाय नमोस्तु नित्यम् मंत्र का जाप कर सकते हैं इससे आपको आर्थिक तंगी से छुटकारा मिल जाएगा और घर में बरकत भी होने लगेगी।
 

 
K.W.N.S.-घर को आकर्षक बनाने और हरियाली के लिए लोग घर घरों और गार्डन में तरह – तरह के पेड़ – पौधे लगाते हैं, ताकि खूबसूरती और भी अधिक बढ़ जाये। कुछ इनडोर प्लांट्स होते हैं, जिन्हे लोग घर के भीतर लगाते हैं। जबकि कुछ आउटडोर प्लांट्स होते हैं, जो बालकनी या आंगन में लगाते हैं। पौधे लगाने से घर का वातावरण भी शुद्ध होता है और हरियाली होती है। वास्तु की मानें तो हमें अपने घर में किसी भी पौधे को लगाने से पहले अच्छे से सोच विचार कर लेना चाहिए। क्योंकि कुछ पौधे ऐसे होते हैं, जो परिवार की खुशियों को बर्बाद कर देते हैं, इतना ही नहीं इन पौधों को लगाने से आपकी तरक्की भी रुक सकती है और अचानक से आपके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ सकता है। बात करें मेहंदी के पौधे की तो वास्तु में मेहंदी के पौधे को अशुभ बताया गया है। वैसे तो मेहंदी का इस्तेमाल कई तीज-त्योहार और शादी के मौका पर किया जाता है। सुहागन स्त्री को सुहाग के सामान में मेहंदी भी दी जाती है। शादी के समय मेहन्दी का अलग से फंक्शन भी रखा जाता है। कई उत्सव में भी मेहंदी का विशेष महत्व होता है। वास्तु की मानें तो इस पौधे को हमें घर में लगाने से बचाना चाहिए। माना जाता है कि मेहंदी के पौधे में नकारात्मक शक्तियों का वास होता है। ऐसा माना जाता है कि मेहंदी के पौधे पर बुरी आत्माओं की छाया जल्दी पड़ती है। ऐसे में मेहंदी भूलकर भी घर में पौधा नहीं लगाना चाहिए। वास्तु के अनुसार, नकारात्मक ऊर्जा घर की सुख-शांति में बाधा उत्पन्न करती है।मेहंदी की खुशबू के कारण इस के पौधे पर बुरी आत्माओं का वास होता है। अगर आपके घर में भी यह पौधा मौजूद है तो इसे जल्द से जल्द हटा दें।
 

प्रथम पूज्‍य भगवान श्रीगणेश की आराधना का दस दिनी उत्‍सव जारी है। यह भारत और दुनिया भर में हिंदुओं द्वारा मनाया जाने वाला एक भव्य त्योहार है। इस दौरान विशाल गणेश की मूर्तियों को गलियों में स्थापित किया जाता है, और नई गणेश प्रतिमाओं को घर लाया जाता है। गणेश जी की विशेष पूजा की जाती है और उन्‍हें कई व्यंजनों का भोग लगाया जाता है। आइये आपको बताते हैं कि इस गणेशोत्‍सव पर गणेश जी को किन व्‍यंजनों का भोग लगाएं।
1. मोदक
मोदक या स्टीम्ड पकौड़ी गणेश जी के सबसे पसंदीदा व्यंजनों में से एक है। उनकी लगभग सभी मूर्तियों को मोदक का कटोरा पकड़े हुए या अपनी सूंड से लिप्त होने के रूप में चित्रित किया गया है। मोदक के लिए गणेश का ऐसा प्रेम है। मोदक वास्तव में गणेश चतुर्थी पर हर घर में तैयार किया जाने वाला अनिवार्य नुस्खा है। वे चावल के आटे के केक हैं जिनमें मीठे या नमकीन भरने के साथ पूर्णता के लिए उबले हुए हैं और गणेश को उनके जन्मदिन पर चढ़ाने के लिए एकदम सही भोजन हैं। बेशक, जन्मदिन के लड़के को अपना पसंदीदा देने से ज्यादा आकर्षक क्या है?
2. पूरन पोली
पूरन पोली एक स्वादिष्ट मिठाई है जिसे गणेश चतुर्थी पर गणपति को भोग लगाया जाता है। पूरन पोली गेहूं के आटे से बनी रोटी या चपटी रोटी होती है जिसमें गुड़ और नारियल की स्टफिंग भरी जाती है। यह एक स्वादिष्ट नाश्ता है और गणेश को अर्पित करने के लिए महाराष्ट्र में व्यापक रूप से तैयार किया जाता है।
3. लड्डू
लड्डू एक बार फिर गणेशजी को प्रिय व्यंजन है। वे बेसन, रवा, या घी और चीनी के साथ मिश्रित किसी भी सूखे मेवे से बने मीठे गोले हैं। गणेश चतुर्थी पर गणपति को लड्डू व्यापक रूप से पसंद किए जाते हैं और भक्तों को वितरित किए जाते हैं जो उनके जन्मदिन पर सार्वजनिक स्टालों और गणेश मंदिरों में जाते हैं।
4. पेड़ा
पेड़ा एक दूध की मिठाई है जिसे गणेश पूजा के दौरान परोसा जाता है। वे दूध, चीनी, आटा, इलायची और नट्स से बने होते हैं जो स्वादिष्ट होते हैं और गणेश चतुर्थी पर पकवान बनाने में आसान होते हैं।
5. फूला हुआ चावल
फूला हुआ चावल या पोरी, जैसा कि तमिल में कहा जाता है, अक्सर गणेश चतुर्थी पूजा के दौरान गणेश को चढ़ाया जाता है। मुरमुरे को चढ़ाने के पीछे भी एक पौराणिक कथा है। एक बार स्वर्ग में धन के संरक्षक कुबेर ने गणेश को भोज के लिए आमंत्रित किया। शिव ने उन्हें चेतावनी दी कि गणेश एक हिंसक भक्षक हैं; हालाँकि, कुबेर गणेश और शिव को अपने धन और धन का घमंड करना चाहते थे। जब गणेश भोज में पहुंचे, तो उन्होंने मिनटों में सभी व्यंजन समाप्त कर दिए और और मांगे। कुबेर ने असहाय महसूस किया और मदद के लिए शिव से संपर्क किया। शिव ने उन्हें उत्तर दिया कि कोई भी भगवान को गर्व से प्रभावित नहीं कर सकता है और उन्हें गणेश को प्यार और भक्ति के साथ एक मुट्ठी भर चावल देने के लिए कहा। गणेशजी ने उनकी भूख मिटाई और कुबेर को आशीर्वाद दिया। इसलिए, गणेश चतुर्थी पर गणेश को उनके आशीर्वाद के लिए फूला हुआ चावल अर्पित करना एक पारंपरिक प्रथा है।
6. केले
हालांकि गणेश के लिए कई पसंदीदा व्यंजन हैं, केले के लिए हाथी के सिर वाले भगवान का प्यार कोई आश्चर्य नहीं है। गणेश चतुर्थी पर गणेश को फूल और तने के साथ केले के पत्तों से बनी एक माला चढ़ाने का भी रिवाज है।
7. झुनका
झुनका एक महाराष्ट्र-विशेष व्यंजन है जो गणेश के लिए तैयार किया जाता है। यह एक मसालेदार सब्जी है जिसे अक्सर गेहूं की रोटी और प्याज के साथ परोसा जाता है, गणपति को उनके जन्मदिन पर पेश किए जाने वाले सभी मीठे व्यंजनों में से।
8. श्रीखंड
श्रीखंड तना हुआ दही से बना एक स्वादिष्ट मीठा व्यंजन है, जो महाराष्ट्र और गुजरात में लोकप्रिय रूप से तैयार किया जाता है। मेवा और किशमिश के ऊपर डालने पर यह स्वादिष्ट लगता है। आने वाली गणेश चतुर्थी पर इस खास रेसिपी को ट्राई करें।
9. मेदु वड़ा
मेदु वड़ा गणेश चतुर्थी पर दक्षिण भारतीय घरों में तैयार किया जाने वाला एक लोकप्रिय व्यंजन है। उड़द की दाल, प्याज, काली मिर्च और नमक से बना वड़ा गणपति को दिया जाने वाला एक स्वस्थ और स्वादिष्ट भोजन है।
10. पायसाम
पायसम या खीर दक्षिण भारत में गणेश के लिए तैयार की जाने वाली एक और मिठाई है। यह दूध, चावल, चीनी, नारियल और इलायची से बना गणेश जी का पसंदीदा त्योहार है। पायसम एक स्वादिष्ट व्यंजन है जिसे आप गणेश चतुर्थी 2020 पर प्रयोग कर सकते हैं और नई शुरुआत के भगवान को अर्पित कर सकते हैं। आप फलों, दालों, गाजर, कद्दू आदि के साथ इस व्यंजन के प्रकार तैयार करने का भी प्रयास कर सकते हैं।

 K.W.N.S.-विराट नगर में कौरव सेना के सामने मत्स्य नरेश के युवराज उत्तर के साथ अर्जुन के आने पर सभी चौंक गए. आचार्य द्रोण ने स्थितियों को समझने के लिए कहा तो युद्ध को आतुर कर्ण ने कुछ ऐसा बोल दिया, जिससे कौरव सेना की फूट उजागर होने लगी तो पितामह भीष्म ने समझाया कि युद्ध काल में आपस की फूट नहीं होना चाहिए. इसी बीच दुर्योधन ने पांडवों के 12 वर्ष वनवास और एक वर्ष का अज्ञातवास पूरा होने में संदेह व्यक्त किया. इस पर आचार्य द्रोण ने दुर्योधन से कहा कि तुम्हारा ऐसा संदेह करना व्यर्थ है, क्योंकि कार्यकाल पूरा हुए बिना अर्जुन कभी भी हमारे सामने नहीं आता. दुर्योधन ने इस बारे में कई बार शंका की है, इसलिए भीष्म जी ही सही बात बता सकते हैं। 
भीष्म बोले, पांडवों के अज्ञातवास को 13 साल से अधिक समय हो गया 
इतना बोलकर द्रोणाचार्य शांत हो गए तो भीष्म ने उनकी बात का उत्तर देते हुए कहा कि कला, काष्ठा, मुहूर्त, दिन, पक्ष, मास और ऋतुओं से मिलकर कालचक्र बने हुए हैं. उन्होंने कहा कि यही कालचक्र की ठीक से गणना की जाए तो पांडवों के वनवास का समय तेरह वर्ष से पांच महीने और बारह दिन अधिक हो गया है. पांडवों ने जो जो प्रतिज्ञाएं की थी, उनका ठीक तरीके से पालन किया है. इस समय इस अवधि का अच्छी तरह से निश्चय कर ही अर्जुन हम लोगों के सामने आया है. पांचों पांडव बहुत ही धर्मात्मा तथा धर्म और अर्थ के जानकार हैं. भीष्म ने आगे कहा कि जिस दल के नेता युधिष्ठिर हों वह धर्म के विषय में कोई चूक कैसे कर सकते हैं. पांडव लोग बिना किसी भय के प्रतीत होते हैं, उन्होंने बहुत ही दुष्कर कार्य पूरा कर लिया है, इसलिए वह राज्य को भी किसी नीति विरुद्ध उपाय से नहीं लेना चाहेंगे। 
पांडव मृत्यु को गले लगा सकते हैं असत्य को नहीं 
भीष्म ने पांडवों के बारे में कहा कि अपने पराक्रम से राज्य लेने में तो वह वनवास के समय भी सक्षम थे, किंतु धर्म के नियमों में बंधे होने के कारण वह क्षात्रधर्म से विचलित नहीं हुए, इसलिए जो ऐसा कहेगा कि अर्जुन मिथ्याचारी है, उसे मुंह की खानी पड़ेगी. पांडव मृत्यु को गले लगा लेंगे, किंतु असत्य कभी नहीं अपनाएंगे. अब समय नहीं है, अर्जुन आगे बढ़ते हुए सामने ही आ गया है, इसलिए दुर्योधन धर्म उचित या युद्धोचित कोई भी काम तुरंत करो। 
 

 
K.W.N.S.-अगर आपको भी पौधे लगाने का शौक है और आपके घर में विभिन्न पौधे मौजूद हैं। तो आपको बता दें कि इनमें से कुछ ऐसे भी पौधे हो सकते हैं जिन्हें लगा कर आप बर्बाद हो सकते हैं। वास्तु में कुछ पेड़ – पौधों को बेहद ही अशुभ बताया गया है। कहते हैं ये पौधे आपकी अच्छी जिंदगी को तबाह कर सकते हैं। इन पौधे के आगमन से ही परिवार के बीच तनाव पैदा हो जाता है। इसलिए ऐसे पौधों को हमें घर में लगाने से बचाना चाहिए। लेकिन कई बार अनजाने में कुछ लोग ऐसे ही पौधों को अपने घर में खूबसूरती को बढ़ाने के लिए लगा लेते हैं, जिसका पछतावा उन्हें बाद में होता है। तो आईये आपको बताते हैं इन पौधों के बारे में। मेहंदी का पौधा बहुत से लोग मेहंदी का उपयोग करने के लिए इसके पौधे को घर में लगाते हैं। लेकिन शायद आपको यह बात नहीं पता होगी कि मेहंदी की खुशबू के कारण इस के पौधे पर बुरी आत्माओं का वास होता है। अगर आपके घर में भी यह पौधा मौजूद है तो इसे जल्द से जल्द हटा दें। नींबू का पौधा नींबू का पौधा लोग अक्सर अपने घरों में लगाते हैं, लेकीन आपको बता दें कि इस पौधे को लगाने से घर में कलह कलेश होता रहता है। इस पौधे के कारण घर में हमेशा तनाव का माहौल बना रहता है। इसलिए अगर आप ने भी इस पौधे को लगा रखा है तो जल्द से जल्द इसे निकाल फेंके। बबूल का पेड़ बबूल का पेड़ औषधीय रूप से बेहद फायदेमंद होता है और इसका प्रयोग बहुत सी जगहों पर किया जाता है। लेकिन वास्तु शास्त्र की मानें तो बबूल का पेड़ घर में लगाना खतरनाक साबित हो सकता है, क्योंकि इस पेड़ को लगाने के कारण घर में वाद-विवाद बढ़ता है। कपास का पौधा अगर आपने अपने घर के बाग में कपास का पौधा लगाकर रखा है तो इसे जल्द से जल्द बाहर निकाल दें। वास्तु शास्त्र के अनुसार यह कहा जाता है कि कपास का पौधा घर में नकारात्मकता लेकर आता है। कैक्टस का पौधा वास्तु शास्त्र के अनुसार व्यक्ति को कभी भी अपने घर में कांटेदार पौधे नहीं लगाने चाहिए। कांटेदार पौधों को घर में लगाने से लडाई झगडे और आपसी मतभेद होते हैं। इसलिए अगर आप के घर मे भी यह पौधा मौजूद है तो इसे बाहर निकाल दें।
 

K.W.N.S.-ऐसी मान्यता है कि काला रंग बुरी नज़र से बचाता है, इसलिए लोग काले रंग के कपड़े पहनते हैं, बच्चे को काला टीका व काजल लगाते हैं और काला धागा पैरों में बांधते हैं. पैर में बांधा जाने वाला काला धागा भी बुरी नज़र से बचाता है. हालांकि, कुछ लोग आजकल इसे फैशन व स्टाइल के लिए पैरों में बांध लेते हैं, लेकिन हम बचपन से ही बड़े-बुजुर्गों से सुनते आए हैं कि पैर में काला धागा बांधने से बुरी नज़र नहीं लगती है. पैर में काला धागा बच्चे से लेकर महिला और पुरुष सभी बांध सकते हैं. ज्योतिष शास्त्र में इस बात का जिक्र किया गया है कि किस तरह पैर में बंधा काला धागा नकारात्मक शक्तियोंं को दूर रखता है. दिल्ली के आचार्य गुरमीत सिंह जी से जानते हैं पैर में काला धागा बांधने का क्या है धार्मिक महत्व. राहु-केतु सहित शनि की महादशा से बचाता है काला धागा कुंडली में स्थित नवग्रहों में किसी भी ग्रह का प्रभाव कमजोर होने पर व्यक्ति के जीवन में परेशानियां शुरू हो जाती है. ज्योतिष के अनुसार, पैर में काला धागा बांधने से शनि की महादशा, साढ़े साती और ढैय्या का प्रभाव कम होता है. साथ ही कुंडली में शनि ग्रह को मजबूती मिलती है. इसके साथ ही कुंडली में राहु-केतु कमजोर होने पर भी ज्योतिष पैर में काला धागा बांधने की सलाह देते हैं. बुरी नज़र से बचाता है काला धागा नज़र लगने के बारे में हम अक्सर सुनते हैं. खासकर बच्चों को अक्सर नज़र लग जाती है. इसके साथ ही किसी के घर, व्यापार और खुशियों को भी बुरी नज़र लग जाती है. नज़र उतारने के कई उपायों के बारे में भी ज्योतिष में बताया गया है. नज़र उतारने के कई उपायों में से एक है काला धागा. पैर मे काला धागा पहनने से नज़र नहीं लगती. साथ ही व्यक्ति नकारात्मक शक्तियों के प्रभाव से भी दूर रहता है. पैर में काला धागा बांधने के नियम पैर में काला धागा बांधने के कुछ नियम होते हैं, जिसके अनुसार पुरुषों को अपने दाहिने पैर में काला धागा बांधना चाहिए. वहीं, महिलाओं को बाएं पैर में काला धागा बांधना चाहिए.
 

हरतालिका तीज को हिंदू समुदाय में सबसे पवित्र दिनों में से एक माना जाता है। यह हर साल हिंदू कैलेंडर माह भाद्रपद के शुक्ल पक्ष के तीसरे दिन पड़ता है। इस दिन लोग भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद लेने के लिए उनकी पूजा करते हैं। यह व्रत विवाहित और अविवाहित महिलाएं करती हैं। अविवाहित महिलाएं मनचाहा वर पाने के लिए व्रत रखती हैं और विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं। ऐसा माना जाता है कि देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए उपवास रखा था और यह दिन उनके मिलन का प्रतीक है। इस वर्ष यह शुभ दिन 30 अगस्त को पड़ रहा है। यह त्योहार मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में मनाया जाता है। हरतालिका तीज व्रत भाद्रपद में तृतीया तिथि, शुक्ल पक्ष में मनाया जाता है। पूजा करने के लिए, भक्तों को पूजा सामग्री की एक सूची की आवश्यकता होती है। पूरी सूची के लिए नीचे देखें।

हरतालिका तीज पूजा सामग्री:

– भगवान शिव और देवी पार्वती की मूर्तियों की सफाई के लिए एक धातु का टुकड़ा

– एक चौकी (देवताओं की मूर्तियां रखने के लिए लकड़ी का मंच)

– चौकी को ढकने के लिए एक साफ कपड़ा, पीला/नारंगी/लाल

– देवताओं की मूर्तियाँ बनाने के लिए मिट्टी या रेत

– एक पूरा नारियल अपनी भूसी के साथ

– पानी के साथ एक कलश

– कलश के लिए आम या पान के पत्ते

– घी

– चिराग

– अगरबत्ती (अगरबत्ती और धूप)

– कपास की बत्ती

– कपूर (कपूर)

पूजा की थाली के लिए

– भूसी के साथ दो साबुत नारियल (भगवान शिव और देवी पार्वती के लिए एक-एक)

– देवताओं के लिए पान 2 या 5 छोड़ता है

– सुपारी के 2 पीस

– केले के दो टुकड़े

– दक्षिणा (भगवान शिव और देवी पार्वती को नकद या मुद्रा प्रसाद)

भगवान गणेश के लिए

– सभी वस्तुओं को एक साथ रखने के लिए एक ट्रे या प्लेट

– बेल के पत्ते

– केले का पत्ता

– धतूरा फल और फूल

– सफेद मुकुट फूल

– शमी पत्ते

– कपड़े का एक ताजा टुकड़ा

– चंदन जनेयु

– फल

– साबुत नारियल अपनी भूसी के साथ

– चंदन

 देवी पार्वती के लिए:

– सभी वस्तुओं को एक साथ रखने के लिए एक ट्रे।

– मेहंदी

– काजल

– सिंदूर

– बिंदी

– कुमकुम

– चूड़ियाँ (चूड़ियाँ)

– पैर की अंगुली की अंगूठी (बिछिया)

– कंघा

 
 K.W.N.S.-गणेश उत्सव का पर्व 31 अगस्त से शुरू हो रहा है। इस दिन भगवान गणपति की विभिन्न तरह की मूर्ति स्थापित करने का परंपरा है। हर भक्त अपने अनुरुप भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करते हैं। कोई बाजार से लेकर मूर्ति स्थापित करता है, तो कोई घर में ही मिट्टी से मूर्ति बनाकर विधिवत पूजा करते विदा करता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मिट्टी के अलावा कुछ और चीजों से मूर्ति बनाकर पूजा की जा सकती है। आइए जानते हैं कि किन चीजों से गणेश जी की मूर्ति बनाना है शुभ। आक के पेड़ की जड़ से गणपति की मूर्ति आक का पौधा भगवान शिव को अतिप्रिय है। इसे आकड़ा भी कहा जाता है। आंकड़े के पौधे से निकले सफेद फूल भगवान शिव को चढ़ाने से वह अति प्रसन्न होते हैं। वहीं आक के पौधे की जड़ से गणेश जी की आकृति बनाई जाती है जिसे श्वेतार्क गणेश के नाम से जाना जाता है। इस जड़ की सफाई के बाद घर के मंदिर में स्थारित करते हैं और विधिवत पूजा करने का विधान है। हल्दी से बनें गणपति हल्दी को पीसकर उसमें पानी मिलाकर आटा की तरह इस्तेमाल करके गणपति की आकृति बनाकर मंदिर में रख सकते हैं। इसके अलावा हल्दी की कई ऐसी गांठ होती है जिसमें गणपति की आकृति दिखाई देती हैं। इन्हें भी मंदिर में रखकर पूजा कर सकते हैं। गाय के गोबर से बनी मूर्ति वेद शास्त्रों के अनुसार, गाय का गोबर काफी पवित्र माना जाता है। इसके साथ ही गोबर में मां लक्ष्मी का वास होता है।आप चाहे को गाय के गोबर के गणपति की आकृति बनाकर मंदिर में स्थापित कर सकते हैं। ये मूर्ति इकोफेंडली भी होगी। लकड़ी की मूर्ति वेद शास्त्रों में पीपल, आम और नीम की लकड़ी को काफी शुद्ध औऱ शुभ माना जाता है। इसलिए इन लकड़ी का इस्तेमाल करके गणेश जी की मूर्ति बनाएं। इस मूर्ति को प्रवेश द्वार के बाहर ऊपरी हिस्सा में रखें